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एल्युमीनियम मिल्क केन बनाने वाली फैक्टरी में 400 किलो के एलपीजी में लीकेज से लगी आग, 13 झुलसे
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आग बुझाते दमकल कर्मी
- फोटो : YAMUNA NAGAR
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यहां की इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एल्युमीनियम मिल्क केन बनाने वाली बिमल एल्युमीनियम प्राइवेट लिमिटेड फैक्टरी में सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। फैक्टरी में लगे 400 किलोग्राम एलपीजी में अचानक लीकेज हो गया जिससे आग भभक उठी। इससे वहां काम कर रहे 13 कर्मचारी आग की चपेट में आकर बुरी तरह से झुलस गए। झुलसने वालों में फैक्टरी का जीएम और मालिक भी शामिल है।
घायलों को एंबुलेंस की मदद से तुरंत पास के प्राइवेट अस्पतालों में पहुंचाया गया। किंतु नौ की हालत गंभीर होने के बाद उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया, जबकि चार का शहर के निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। उधर, हादसे की सूचना फायर ब्रिगेड व पुलिस को दी गई। मौके पर तुरंत दमकल की सात गाड़ियां पहुंची। दमकल कर्मचारियों ने डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
इस तरह से लगी आग : दरअसल, फैक्टरी में एल्युमीनियम स्क्रैब को पिघलाकर मिल्क केन बनाई जाती है। इस स्क्रैब को रोटरी भट्ठी में पिघलाया जाता है और यह भट्ठी एलपीजी से चलती है। इसलिए वहां 400 किलोग्राम के गैस सिलिंडर लगाए गए हैं। किंतु सोमवार सुबह से ही भट्ठी में कुछ दिक्कत चल रही थी। जिससे बार-बार सिलिंडर लीकेज हो रहा था। हालांकि इस लीकेज को रोकने के लिए ऊपर से पानी की बौछार (शॉवर) चलाया हुआ था। ताकि सिलिंडर ठंडा रहे। लेकिन सुबह करीब सवा 11 बजे अचानक से सिलिंडर लीकेज होकर तेजी से भभकने लगा। जिससे वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए और बुरी तरह से झुलस गए। खुद फैक्टरी मालिक और जीएम भी चपेट में आ गए। घटना के बाद बाकी के मजदूरों में भगदड़ मच गई। फैक्टरी यूनिट को बंद कर दिया गया और मजदूरों को बाहर निकाला गया। उधर, घटना की सूचना मिलते ही आसपास की फैक्टरियों में भी हड़कंप मच गया। जान बचाने के लिए मजदूर इधर-उधर भागने लगे।
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फट सकते थे दस और सिलिंडर : बता दें जिस 400 किलोग्राम के गैस सिलिंडर में आग लगी थी, उसके साथ लगभग पांच-पांच फुट की दूरी पर करीब दस सिलिंडर और रखे थे। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो पास रखे सिलिंडर भी फट सकते थे। जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। जिसमें जान का भी नुकसान हो सकता था।
अचानक से क्या हुआ कुछ समझ में नहीं आया : हादसे में झुलसे अनिल व अन्य ने बताया कि वो काम कर रहे थे। अचानक गैस लीकेज शुरू हो गई और आग के गोले में तबदील हो गई। वहीं दूसरे घायल मजदूर ने बताया कि अचानक से क्या हुआ, कुछ समझ नहीं आया। ब्लास्ट होता तो पता लगता, किंतु फ्लेम सी उठी और भयंकर आग में तबदील हो गई। जिसकी चपेट में वो आ गया। उसने बताया कि रोजाना काम करते हैं किंतु कभी कोई दिक्कत नहीं आई। लेकिन सुबह अचानक से सिलिंडर लीकेज होने से हादसा हो गया।
आग में यह झुलसे : सिलिंडर की लीकेज के बाद लगी आग में वर्कर कमल, हर्षित, मोहन, संदीप, अनिल, सुमेर, प्रताप, सचिन, सत्यवीर, विकास, विनय, जीएम एसएस पुंडीर और फैक्टरी मालिक रजनीश खरबंदा झुलसे हैं। इनमें कमल, हर्षित, मोहन, सत्यवीर, सुमेर, सोमपाल, सचिन, एसएस पुंडीर और रजनीश खरबंदा को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया है। बाकी अन्य चार का शहर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से एक घायल को मरहम पट्टी कर घर भेज दिया गया है। उधर, आग में झुलसे घायलों का इलाज करने वाले प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि उनके पास नौ लोग आए थे। जिसमें से चार लोग 70 से 80 प्रतिशत तक झुलसे हुए थे। बाकी अन्य को पीजीआई रेफर किया गया है।
आग लगने की सूचना मिलते ही पहले चार गाड़ियों को भेजा गया। उसके बाद तीन गाड़ियां ओर भेजी गई। भभक रही आग को बुझाने में डेढ़ घंटा लग गया। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो सिलिंडर फट भी सकते थे। जिससे बहुत बड़ा नुकसान होने की संभावना थी।
- प्रमोद दुग्गल, जिला दमकल अधिकारी
घायल मजदूरों की शिकायत पर फैक्टरी मालिक के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया गया है। हादसे में 13 मजदूर घायल हैं। मामले की जांच की जा रही है।
- कमलजीत सिंह, एसएचओ, सिटी यमुनानगर
कोई लापरवाही नहीं हुई है। सिलिंडर वायु प्रदूषण न हो इसलिए लगाए गए हैं। घायलों में से कुछ ऐसे हैं जो उपचार करवाकर वापस लौट आए हैं। बाकी का इलाज चल रहा है।
- राजेश खरबंदा, फैक्टरी मालिक
आग से घायल सभी मजदूरों को इलाज के लिए सरकार से सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। मामले की जांच की जा रही है।
मुकुल कुमार, डीसी, यमुनानगर
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घायलों को एंबुलेंस की मदद से तुरंत पास के प्राइवेट अस्पतालों में पहुंचाया गया। किंतु नौ की हालत गंभीर होने के बाद उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया, जबकि चार का शहर के निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। उधर, हादसे की सूचना फायर ब्रिगेड व पुलिस को दी गई। मौके पर तुरंत दमकल की सात गाड़ियां पहुंची। दमकल कर्मचारियों ने डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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इस तरह से लगी आग : दरअसल, फैक्टरी में एल्युमीनियम स्क्रैब को पिघलाकर मिल्क केन बनाई जाती है। इस स्क्रैब को रोटरी भट्ठी में पिघलाया जाता है और यह भट्ठी एलपीजी से चलती है। इसलिए वहां 400 किलोग्राम के गैस सिलिंडर लगाए गए हैं। किंतु सोमवार सुबह से ही भट्ठी में कुछ दिक्कत चल रही थी। जिससे बार-बार सिलिंडर लीकेज हो रहा था। हालांकि इस लीकेज को रोकने के लिए ऊपर से पानी की बौछार (शॉवर) चलाया हुआ था। ताकि सिलिंडर ठंडा रहे। लेकिन सुबह करीब सवा 11 बजे अचानक से सिलिंडर लीकेज होकर तेजी से भभकने लगा। जिससे वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए और बुरी तरह से झुलस गए। खुद फैक्टरी मालिक और जीएम भी चपेट में आ गए। घटना के बाद बाकी के मजदूरों में भगदड़ मच गई। फैक्टरी यूनिट को बंद कर दिया गया और मजदूरों को बाहर निकाला गया। उधर, घटना की सूचना मिलते ही आसपास की फैक्टरियों में भी हड़कंप मच गया। जान बचाने के लिए मजदूर इधर-उधर भागने लगे।
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फट सकते थे दस और सिलिंडर : बता दें जिस 400 किलोग्राम के गैस सिलिंडर में आग लगी थी, उसके साथ लगभग पांच-पांच फुट की दूरी पर करीब दस सिलिंडर और रखे थे। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो पास रखे सिलिंडर भी फट सकते थे। जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। जिसमें जान का भी नुकसान हो सकता था।
अचानक से क्या हुआ कुछ समझ में नहीं आया : हादसे में झुलसे अनिल व अन्य ने बताया कि वो काम कर रहे थे। अचानक गैस लीकेज शुरू हो गई और आग के गोले में तबदील हो गई। वहीं दूसरे घायल मजदूर ने बताया कि अचानक से क्या हुआ, कुछ समझ नहीं आया। ब्लास्ट होता तो पता लगता, किंतु फ्लेम सी उठी और भयंकर आग में तबदील हो गई। जिसकी चपेट में वो आ गया। उसने बताया कि रोजाना काम करते हैं किंतु कभी कोई दिक्कत नहीं आई। लेकिन सुबह अचानक से सिलिंडर लीकेज होने से हादसा हो गया।
आग में यह झुलसे : सिलिंडर की लीकेज के बाद लगी आग में वर्कर कमल, हर्षित, मोहन, संदीप, अनिल, सुमेर, प्रताप, सचिन, सत्यवीर, विकास, विनय, जीएम एसएस पुंडीर और फैक्टरी मालिक रजनीश खरबंदा झुलसे हैं। इनमें कमल, हर्षित, मोहन, सत्यवीर, सुमेर, सोमपाल, सचिन, एसएस पुंडीर और रजनीश खरबंदा को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया है। बाकी अन्य चार का शहर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से एक घायल को मरहम पट्टी कर घर भेज दिया गया है। उधर, आग में झुलसे घायलों का इलाज करने वाले प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि उनके पास नौ लोग आए थे। जिसमें से चार लोग 70 से 80 प्रतिशत तक झुलसे हुए थे। बाकी अन्य को पीजीआई रेफर किया गया है।
आग लगने की सूचना मिलते ही पहले चार गाड़ियों को भेजा गया। उसके बाद तीन गाड़ियां ओर भेजी गई। भभक रही आग को बुझाने में डेढ़ घंटा लग गया। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो सिलिंडर फट भी सकते थे। जिससे बहुत बड़ा नुकसान होने की संभावना थी।
- प्रमोद दुग्गल, जिला दमकल अधिकारी
घायल मजदूरों की शिकायत पर फैक्टरी मालिक के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया गया है। हादसे में 13 मजदूर घायल हैं। मामले की जांच की जा रही है।
- कमलजीत सिंह, एसएचओ, सिटी यमुनानगर
कोई लापरवाही नहीं हुई है। सिलिंडर वायु प्रदूषण न हो इसलिए लगाए गए हैं। घायलों में से कुछ ऐसे हैं जो उपचार करवाकर वापस लौट आए हैं। बाकी का इलाज चल रहा है।
- राजेश खरबंदा, फैक्टरी मालिक
आग से घायल सभी मजदूरों को इलाज के लिए सरकार से सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। मामले की जांच की जा रही है।
मुकुल कुमार, डीसी, यमुनानगर

बिमल एल्यूमिनयम में सिलेंडरो गैस रिसाव के बाद लगी आग के बाद साथ की फैक्टरीयों के कर्मचारी बाहर ज?- फोटो : YAMUNA NAGAR

बिमल एल्यूमिनयम में सिलेंडरो गैस रिसाव के बाद लगी आग ।- फोटो : YAMUNA NAGAR