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Yamuna Nagar News: हथिनीकुंड बैराज में पानी कम, गहरा सकता है जल संकट

Wed, 19 Jun 2024 06:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 19 Jun 2024 06:12 AM IST
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Less water in Hathinikund Barrage, water crisis may deepen
नवाब आजाद
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प्रतापनगर (यमुनानगर)। हथिनीकुंड बैराज से तीन राज्यों हरियाणा, उत्तरप्रदेश व दिल्ली को पानी दिया जाता है मगर इस बार 18 जून तक भी बारिश न होने से बैराज में पानी बहुत कम रह गया है। जिस वजह से जल संकट गहरा सकता है।इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली को दिए जाने वाले पानी की सप्लाई पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी से कई इलाकों में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
जानकारों की माने तो हथिनीकुंड बैराज पर 20 वर्षों में कभी इतना जल संकट देखने को नहीं मिला। 18 जून तक न तो मैदानी इलाकों में बारिश हुई और न ही पहाड़ों पर। मंगलवार को बैराज पर सिर्फ 5568 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया जबकि बैराज की क्षमता 10 लाख क्यूसेक पानी की है।
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हिमाचल प्रदेश से दिल्ली के लिए छोड़े जाने वाला पानी, हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज में आता है। बैराज से पानी मुनक नहर के जरिये दिल्ली जाता है। फिर यही पानी दिल्ली के विभिन्न वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है। बैराज के गेज रीडर शेर सिंह ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज पर 20 वर्षों में कभी इतना कम पानी देखने को नहीं मिला।
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हालांकि पनबिजली परियोजना चलाने में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजे 4674, सात बजे 4644, आठ बजे 4518, नौ बजे 4499, दस बजे 4559 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जबकि 11 बजे 4499 क्यूसेक, 12 बजे 4602, एक बजे 4404, दो बजे 4076, तीन बजे 4343, चार बजे 5568 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जिसमें से यमुना में 352, पश्चिमी यमुना नहर में 3945 और यूपी को 1271 क्यूसेक पानी दिया गया। संवाद
तीन राज्यों का केंद्र हथिनीकुंड बैराज

पहाड़ी व मैदानी इलाकों में बारिश न होने से हथिनीकुंड बैराज जल संकट से जूझ रहा है। क्षमता से बहुत कम पानी यहां पहुंच पा रहा है। हालात तो यह है कि यमुना के बीच में खाली टापू नजर आने लगे हैं। जो इन दिनों जानवरों के चरने का मैदान बना हुआ है। यमुना नदी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों से निकलती हुई यमुनानगर के मैदानी क्षेत्र में हथिनीकुंड बैराज तक पहुंचती है। हथिनी कुंड बैराज उत्तर प्रदेश व हरियाणा के बॉर्डर पर स्थित है, यहीं से यमुना का जल तीन हिस्सों में बंट जाता है।

यमुना के पानी का पहला हिस्सा पश्चिमी यमुना नहर में जाता है, जो हरियाणा की तरफ चला जाता है। यह पानी आगे चलकर दिल्ली व राजस्थान के भी काम आता है। बैराज से यमुना के पानी का दूसरा हिस्सा उत्तर प्रदेश की तरफ चला जाता है, इससे उत्तर प्रदेश के लोग सिंचाई करते हैं। बैराज के पानी का तीसरा हिस्सा मुख्य यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है।



उल्लेखनीय है कि हथिनीकुंड बैराज का काम हिमाचल प्रदेश से तेज गति से आने वाले पानी को नियंत्रित करना है। इस बैराज की लंबाई 360 मीटर है। इसमें 18 फ्लड गेट बनाए गए हैं ताकि पानी ज्यादा होने पर तेजी से बैराज को खाली किया जा सके। बैराज निर्माण में लगभग 168 करोड़ रुपये की लागत आई थी और इसका काम 1996 में शुरू हुआ था। यह 1999 में यह बनकर तैयार हो गया था, लेकिन 2002 से यह पूरी तरह से काम करने लगा। बैराज की कुल क्षमता 10 लाख क्यूसेक पानी इकट्ठा करने की है।
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