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Yamuna Nagar News: लक्ष्मण-परशुराम संवाद का किया मंचन
Tue, 23 Sep 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 23 Sep 2025 01:31 AM IST
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रामलीला में सीता स्वयंवर प्रसंग का मंचन करते कलाकार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। श्री वेद व्यास रामलीला एवं दशहरा कमेटी की तरफ से काली माता मंदिर में आयोजित रामलीला मंचन में रविवार रात सीता स्वयंवर व लक्ष्मण-परशुराम संवाद दृश्य का मंचन किया गया।
सीता स्वयंवर दृश्य में दिखाया गया कि भगवान शिव का दिया धनुष राजा जनक के घर पर था। एक दिन घर की सफाई करते समय माता सीता ने उसे उठाकर दूसरे स्थान पर रख दिया। सीता जी को इतना ताकतवर देख राजा जनक ने उसी समय घोषणा कर दी कि जो भी राजा इस धनुष को उठाएगा उसी के साथ सीता का स्वयंवर होगा। सीता स्वयंवर की सारी तैयारियां पूरी की गईं।
कई देशों के महाराजा स्वयंवर में शामिल हुए। कोई भी धनुष को हिला तक न सका। यह देख राजा जनक विलाप करने लगे। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा लेकर भगवान श्रीराम धनुष की ओर बढ़े और धनुष को प्रणाम कर उसकी प्रत्यंचा खीचीं तो वह धनुष टूट गया। धनुष के टूटते ही क्रोध में भरे परशुराम आते हैं और पूछते हैं कि धनुष तोड़ने का दुस्साहस किसने किया तो लक्ष्मण भी क्रोध में भर जाते हैं। तब दोनों के बीच संवाद होता हैं। भगवान परशुराम धनुष को तोड़ने वाले को सजा देने का ऐलान करते हैं।
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व्यासपुर। श्री वेद व्यास रामलीला एवं दशहरा कमेटी की तरफ से काली माता मंदिर में आयोजित रामलीला मंचन में रविवार रात सीता स्वयंवर व लक्ष्मण-परशुराम संवाद दृश्य का मंचन किया गया।
सीता स्वयंवर दृश्य में दिखाया गया कि भगवान शिव का दिया धनुष राजा जनक के घर पर था। एक दिन घर की सफाई करते समय माता सीता ने उसे उठाकर दूसरे स्थान पर रख दिया। सीता जी को इतना ताकतवर देख राजा जनक ने उसी समय घोषणा कर दी कि जो भी राजा इस धनुष को उठाएगा उसी के साथ सीता का स्वयंवर होगा। सीता स्वयंवर की सारी तैयारियां पूरी की गईं।
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कई देशों के महाराजा स्वयंवर में शामिल हुए। कोई भी धनुष को हिला तक न सका। यह देख राजा जनक विलाप करने लगे। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा लेकर भगवान श्रीराम धनुष की ओर बढ़े और धनुष को प्रणाम कर उसकी प्रत्यंचा खीचीं तो वह धनुष टूट गया। धनुष के टूटते ही क्रोध में भरे परशुराम आते हैं और पूछते हैं कि धनुष तोड़ने का दुस्साहस किसने किया तो लक्ष्मण भी क्रोध में भर जाते हैं। तब दोनों के बीच संवाद होता हैं। भगवान परशुराम धनुष को तोड़ने वाले को सजा देने का ऐलान करते हैं।
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