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Yamuna Nagar News: आबादी का रुख कर रहे भूखे हाथी
Wed, 08 Jan 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 08 Jan 2025 12:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर (यमुनानगर)। कलेसर नेशनल पार्क में भूख व प्यास को मिटाने के संसाधन कम होने के चलते हाथी अब यमुना व आबादी का रुख करने लगे हैं। ऐसे में वे वन संपदा को नुकसान तो पहुंचा रहे, साथ ही आबादी की सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
वन्य प्राणी विहार कलेसर लगभग 12 हजार एकड़ में फैला है। इसकी सुरक्षा का जिम्मा केवल एक वन्य जीव प्राणी विभाग पर है। वन्य प्राणी विभाग में पर्याप्त कर्मचारी न होना भी जंगली जीवों की सुरक्षा के लिए खतरा है।
वन्य प्राणी विभाग का एक कर्मचारी हजारों एकड़ में फैले जंगल की सुरक्षा कैसे कर पाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है जंगल में बने गजलर (हाथियों के लिए पानी का बड़ा टब) पर्याप्त नहीं हैं। गजलरों की संख्या बढ़ाकर उनमें भारी भरा जाना चाहिए। कई बार गजलर सूख जाते हैं ऐसे में हाथियों को पीने के लिए पानी न मिलने पर यमुना की तरफ रुख करते हैं।
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वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलूराम का कहना है कि हाथी यमुना किनारे धूप सेंकने व पानी पीने के लिए आते रहते हैं। जंगल में हाथियों के लिए पर्याप्त सुविधा हैं। समय-समय पर गजलरों व तालाबों में पानी भरा जाता है।
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प्रतापनगर (यमुनानगर)। कलेसर नेशनल पार्क में भूख व प्यास को मिटाने के संसाधन कम होने के चलते हाथी अब यमुना व आबादी का रुख करने लगे हैं। ऐसे में वे वन संपदा को नुकसान तो पहुंचा रहे, साथ ही आबादी की सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
वन्य प्राणी विहार कलेसर लगभग 12 हजार एकड़ में फैला है। इसकी सुरक्षा का जिम्मा केवल एक वन्य जीव प्राणी विभाग पर है। वन्य प्राणी विभाग में पर्याप्त कर्मचारी न होना भी जंगली जीवों की सुरक्षा के लिए खतरा है।
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वन्य प्राणी विभाग का एक कर्मचारी हजारों एकड़ में फैले जंगल की सुरक्षा कैसे कर पाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है जंगल में बने गजलर (हाथियों के लिए पानी का बड़ा टब) पर्याप्त नहीं हैं। गजलरों की संख्या बढ़ाकर उनमें भारी भरा जाना चाहिए। कई बार गजलर सूख जाते हैं ऐसे में हाथियों को पीने के लिए पानी न मिलने पर यमुना की तरफ रुख करते हैं।
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वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलूराम का कहना है कि हाथी यमुना किनारे धूप सेंकने व पानी पीने के लिए आते रहते हैं। जंगल में हाथियों के लिए पर्याप्त सुविधा हैं। समय-समय पर गजलरों व तालाबों में पानी भरा जाता है।