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50 या इससे अधिक बेड वाले अस्पतालों को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कराना होगा रजिस्ट्रेशन
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जिले में चल रहे 50 या इससे अधिक बेड के अस्पतालों को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के दायरे में लाया जाएगा। इसके तहत उक्त बेड की क्षमता वाले सभी अस्पतालों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से गाइडलाइन पहले ही जारी की जा चुकी है। इस रजिस्ट्रेशन के बाद स्वास्थ्य विभाग के पास सारा रिकॉर्ड रहेगा कि इन अस्पतालों का संचालक कौन है। इनमें दाखिल मरीजों को क्या सुविधाएं अस्पतालों द्वारा दी जा रही है।
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष डॉ. सुनीला सोनी, अन्य डाक्टरों व उन अस्पतालों के संचालकों को बुलाया गया जिनकी क्षमता 50 बेड या इससे अधिक की है। सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 में बनाया था। हरियाणा में इस एक्ट का नोटिफिकेशन जनवरी-2018 में जारी हुआ था। इसके तहत हुआ रजिस्ट्रेशन एक साल के लिए मान्य है। इसके बाद उसे रिन्यू कराना होगा। डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल के प्रतिनिधियों को इस एक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि जो अस्पताल इसे लागू करने में लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ एक्ट में दिए गए प्रावधानों के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकता है। 50 बेड या इससे अधिक वाले सभी अस्पतालों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के लिए अस्पताल को दी साइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इससे स्वास्थ्य विभाग को यह भी पता चल जाएगा कि किस क्षमता के जिले में कितने अस्पताल हैं। उन्होंने बताया कि डीसी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें सिविल सर्जन, आईएमए के प्रतिनिधि के अलावा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सदस्यों को शामिल किया जाएगा। फाइनल रजिस्ट्रेशन से पहले अस्पतालों की साइट की जांच की जाएगी। इसके अलावा लैब संचालकों को भी इसके तहत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
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क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष डॉ. सुनीला सोनी, अन्य डाक्टरों व उन अस्पतालों के संचालकों को बुलाया गया जिनकी क्षमता 50 बेड या इससे अधिक की है। सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 में बनाया था। हरियाणा में इस एक्ट का नोटिफिकेशन जनवरी-2018 में जारी हुआ था। इसके तहत हुआ रजिस्ट्रेशन एक साल के लिए मान्य है। इसके बाद उसे रिन्यू कराना होगा। डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल के प्रतिनिधियों को इस एक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए।
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जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि जो अस्पताल इसे लागू करने में लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ एक्ट में दिए गए प्रावधानों के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकता है। 50 बेड या इससे अधिक वाले सभी अस्पतालों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के लिए अस्पताल को दी साइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इससे स्वास्थ्य विभाग को यह भी पता चल जाएगा कि किस क्षमता के जिले में कितने अस्पताल हैं। उन्होंने बताया कि डीसी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें सिविल सर्जन, आईएमए के प्रतिनिधि के अलावा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सदस्यों को शामिल किया जाएगा। फाइनल रजिस्ट्रेशन से पहले अस्पतालों की साइट की जांच की जाएगी। इसके अलावा लैब संचालकों को भी इसके तहत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
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