Haryana Election: यमुना किनारे चल रही भितरघात, मुद्दों व बागियों की हवा, नेताओं को इन मुद्दों घेर रहे मतदाता
हरियाणा विधानसभा चुनाव में पूरे राज्य में चुनावी माहौल है। वहीं बात करें यमुनानगर जिले के तो यहां चार विधानसभा सीटें हैं। यमुनानगर, जगाधरी, साढौरा और रादौर सीटों पर उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर है।
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यमुना किनारे बसे हरियाणा के यमुनानगर जिले की चारों सीटों पर प्रत्याशियों की जीत को लेकर तस्वीर धुंधली है। यहां प्रत्याशियों को भितरघात का खतरा है। स्थानीय मुद्दों की चर्चा है और बागियों का रुख ही हवा की दिशा तय करेगा। प्रत्याशी व उनके समर्थक जब गांवों में वोट मांगने जाते हैं तो लोग कटु शब्दों में पूछते हैं कि पांच साल में हमारे लिए क्या किया? नेता व समर्थक लोगों को समझाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं।
गुरजीत कौर, नीरज राणा व पकंज का कहना है कि सरकार चाहे किसी भी दल की हो, सभी ने शहर में लगने वाले जाम, अतिक्रमण, बारिश में जलभराव, कूड़ा उठान, बेसहारा गोवंश, मैली यमुना नहर व बंद स्ट्रीट लाइटों पर खूब राजनीति खेली। गांवों में बाढ़ के मुद्दे पर लोग त्रस्त हैं। कारोबारी विनोद कुमार व रविंदर वोहरा कहते हैं कि हर साल करोड़ों रुपये यमुना नदी के तटबंद बनाने पर खर्च किए जाते हैं लेकिन हर बार ही पैसे व तटबंध पानी में बह जाते हैं और नुकसान वे लोग झेलते हैं। पिछली बार चार में से दो पर भाजपा व दो बार कांग्रेस जीती थी। रादौर और जगाधरी में भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर नजर आ रही है लेकिन आरक्षित सीट साढौरा में भाजपा के फूल के सामने हाथी पहाड़ बनकर खड़ा है।
जगाधरी में मंत्री व पूर्व मंत्री की टक्कर को झाड़ू व बसपा ने किया रोचक
जगाधरी में मंत्री और पूर्व मंत्री में कांटे की टक्कर है। भाजपा ने मंत्री रहे कंवरपाल गुर्जर पर विश्वास जताया है। उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के अकरम खान से है। अकरम खान मुस्लिम व कंवरपाल की गुर्जर समाज में अच्छी पैठ है। अकरम को टिकट देने से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमे के आदर्श पाल ने बगावत कर दी। नामांकन के आखिरी दिन उन्होंने आम आदमी पार्टी का झाड़ू थामकर परचा भर दिया। उनकी एंट्री से मुकाबला रोचक हो गया है। यहां बसपा प्रत्याशी व कारोबारी दर्शन लाल खेड़ा भी शहरी वोट सेंध लगाते दिख रहे हैं।
यमुनानगर में त्रिकोणीय मुकाबला
यमुनानगर में भाजपा ने निवर्तमान विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को तीसरी बार उतारा है। पिछले दो चुनाव से पूर्व विधायक व इनेलो प्रत्याशी दिलबाग सिंह उन्हें कड़ी टक्कर देते रहे हैं। वे इनेलो नेता अभय चौटाला के समधी हैं। इस बार कांग्रेस से रमन त्यागी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां भाजपा को भितरघात का खतरा है, क्योंकि घनश्याम दास को टिकट देने के बाद से कुछ नेता अभी भी खुलकर प्रचार नहीं कर रहे।
साढौरा में हुड्डा समर्थक हाथी पर सवार होकर मुख्य मुकाबले में आए
आरक्षित सीट साढौरा में कांग्रेस की निवर्तमान विधायक रेनू बाला के सामने तीन बार के पूर्व विधायक व भाजपा प्रत्याशी बलवंत सिंह है। रेणु बाला को टिकट देने से नाराज भूपेंद्र और दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक बृजपाल छप्पर बागी हो गए। वह हाथ को छोड़कर हाथी पर सवार हैं। इस कारण मुख्य मुकाबला अब बलवंत सिंह और बृजपाल के बीच ही नजर आ रहा है। बलवंत सिंह की राह भी पूर्व प्रत्याशी दाता राम ने बागी होकर मुश्किल कर रखी है। वे कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं।
रादौर में कांबोज खराब कर सकते हैं खेल, बसपा के प्रदेशाध्यक्ष भी मुकाबले में
यहां भाजपा ने पूर्व राज्य मंत्री कर्णदेव कांबोज को दरकिनार करते हुए पूर्व मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा को प्रत्याशी बनाया है। रादौर या इंद्री दोनों में से किसी एक जगह से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कांबोज को यहां भी टिकट नहीं मिला। सीएम नायब सैनी के मनाने से भी वह नहीं माने और बागी होकर कांग्रेस में शामिल हो गए। यहां श्याम सिंह राणा का मुकाबला कांग्रेस के वर्तमान विधायक डॉ. बीएल सैनी से है। अब बीएल सैनी को कर्णदेव का भी साथ है। यहां कांबोज समाज के वोट राजपूत समाज से ज्यादा हैं। दलित समाज के वोट काटने के लिए खुद बहुजन समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल तिगरा रादौर से चुनाव लड़ रहे हैं।