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Yamuna Nagar News: बिना डेसीबल लिखे बिक रहे पटाखे, विभाग में नहीं ध्वनि मापक यंत्र

Thu, 16 Oct 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 16 Oct 2025 01:04 AM IST
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Firecrackers are being sold without decibels written on them, the department does not have sound measuring devices.
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। दीपावली पर पटाखों से एक ओर जहां भयंकर वायु प्रदूषण होता है, वहीं ध्वनि प्रदूषण भी कई गुना बढ़ जाता है। इस समय तेज आवाज के पटाखे बाजार में मिल रहे हैं जो ध्वनि प्रदूषण के मानकों पर बिल्कुल खरे नहीं उतरते। वहीं जिले में दमकल और स्वास्थ्य विभाग के पास पटाखों की ध्वनि मापने का यंत्र ही नहीं है। न ही पटाखों पर उनकी तीव्रता अंकित होती है। ऐसे में दुकानदार पटाखे चाहे जितनी भी तेज आवाज वाले बेच लें, उन पर कोई कार्रवाई करने वाला नहीं है।
तेज आवाज वाले पटाखों से लोगों की श्रवण शक्ति पर जबरदस्त आघात होता है। इसके चलते कानों में कई तरह की परेशानियों से लोगों को जूझना पड़ता है। सामान्य ध्वनि का मानक 40 से 50 डेसीबल है, मगर दीपावली पर अधिकांश पटाखे 125 से 200 डेसीबल की आवाज में आ रहे हैं। 80 डेसीबल का एक्सपोजर साधारण आदमी सिर्फ आठ घंटे ही बर्दाश्त कर सकता है। इससे अधिक समय तक इस एक्सपोजर में रहने पर कानों की श्रवण शक्ति प्रभावित होती है। वहीं दमकल विभाग के पास पटाखे बेचने वालों का रिकॉर्ड भी नहीं है। दमकल केंद्र में केवल सात लाइसेंस धारकों की जानकारी है तो सेल्स एंड टैक्स विभाग में 13 का रिकॉर्ड मौजूद है।
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तेज धमाके से हो सकता है बहरापन:
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की ईएनटी डॉ. निशा बुरा का कहना है कि पटाखों से निकली 35 डेसीबल तीव्रता की ध्वनि कानों के लिए कष्टदायक होती है। अचानक निकली 70 डेसीबल की ध्वनि भयानक पीड़ा के साथ कान के परदे को खराब कर सकती है। सभी को चाहिए कि कम आवाज वाले और कम से कम पटाखें जलाएं। पटाखे फोड़ने के समय कानों में रूई लगा लें। 70 डेसीबल से अधिक तीव्रता के धमाके के बाद कान में स्थाई बहरापन आ सकता है, जो ऑपरेशन के बाद भी ठीक नहीं हो सकता। बाजार में 100 से लेकर 160 डेसीबल तक पटाखें देखने को मिल रहे हैं। इससे खास कर बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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दमकल विभाग में यमुनानगर के साथ-साथ पूरे प्रदेश में किसी भी जिले में पटाखों की ध्वनि मापने का यंत्र नहीं है। हम केवल लाइसेंस व सुरक्षा प्रबंधकों की ही जांच कर सकते हैं। जल्द ही पटाखों के गोदामों की जांच की जाएगी।

- पंकज पराशर, जिला दमकल अधिकारी, यमुनानगर।


कानों की सेहत के लिए रखें इन बातों का ध्यान
- अगर पटाखों की आवाज से कानों में तेज दर्द होने लगे तो कान को खुजलाएं नहीं।
- नुकीली वस्तु अथवा लकड़ी में रुई लपेट कर कान के अंदर न डालें।
- कई लोग दर्द होने पर लहसुन का तेल गरम करके कान में डालते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से दर्द सही जाएगी, लेकिन ये कान के पर्दे के लिए हानिकारक हो सकता है।

- कान में अगर लगातार सीटी बजती रहे या सुनना बंद हो जाए को डॉक्टर से जरूर मिलें।

यह है श्रवण शक्ति की क्षमता:

ध्वनि एक्सपोजर समय
80 डीबी 8 घंटे
85 डीबी 4 घंटे
90 डीबी 2 घंटे

95 डीबी 1 घंटा
100 डीबी 30 मिनट
105 डीबी 15 मिनट
110 डीबी 7.5 मिनट
115 डीबी 3.5 मिनट
120 डीबी डेढ़ मिनट
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