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कर्ज देने लिए जाते हैं कोरे स्टांप, फिर लिख लिया जाता है बयाना
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शहर में सूदखोरी का कारोबार करने वाले अवैध फाइनेंसरों का बहुत बड़ा नेटवर्क है। सैकड़ों परिवार इनके मक्कड़जाल में फंसे हुए हैं। जरूरतमंद लोगों को ढूंढकर अपने जाल में फंसाना और इसके बाद उनकी प्रोपर्टी हड़प लेना यह सभी काम इन अवैध फाइनेंसरों के हैं। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि शहर की हर कॉलोनी में छोटा या बड़ा कोई न कोई फाइनेंसर मौजूद है। जबकि इनका ट्विन सिटी की हर गली में एक बड़ा तंत्र है। हर गली में इनके एक दो दलाल हैं। जो जरूरतमंदों को ढूंढते हैं।
यूं फंसाया जाता है लोगों को
कर्ज के लिए व्यक्ति के हस्ताक्षर किया कोरा स्टांप लिया जाता है। स्टांप लेने के बाद व्यक्ति को कर्ज दे दिया जाता है। इस दौरान सूदखोरों के दलाल व्यक्ति के प्रोपर्टी व बैकग्राउंड का पता करते हैं। संपत्ति अच्छी होने पर फाइनेंसर का खेल शुरू हो जाता है। व्यक्ति के कर्ज पर ब्याज, चक्रवृति ब्याज, पैनेल्टी जोड़कर रकम इतनी कर दी जाती है कि कर्जदार इससे मुक्त ही न हो सके। ब्याज चुकाकर जब व्यक्ति हार जाता है, तो फाइनेंसर उन्हें प्रताड़ित करते हैं। मूल की रकम का दस गुणा ब्याज वसूलने के बाद भी व्यक्ति कर्ज मुक्त नहीं हो पाता।
कोरे स्टांप पर खुद लिख लेते हैं बयाना
सूदखोरों का ब्याज पहले दोगुणा, फिर चार गुणा हो जाता है। जब व्यक्ति पूरी तरह बेबस हो जाता है, तो उसके बाद कोरा स्टांप पेपर दिखा कर ब्लैकमेल किया जाता है। फाइनेंसर इस कोरे स्टांप पेपर पर कर्जदार के मकान, दुकान, प्लाट, खेतिहर जमीन का लाखों रुपये बयाना लिख देते हैं। जो व्यक्ति न तो दे सकता है और न ही इससे झुठला सकता है। फाइनेंसर उसकी संपत्ति हड़प लेते हैं। फाइनेंसर की ऐसी ही प्रताड़ना से परेशान होकर मनोज जोशी ने आत्महत्या कर ली थी।
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पिछले साल दर्ज हुए आधा दर्जन मामले
फाइनेंसर लोगों के कोरे स्टांप का लाभ उठाकर उनकी संपत्ति हड़प रहे हैं। इसे लेकर पिछले साल छह मामले ऐसे दर्ज हुए। जिसमें पीड़ित ने ब्याज पर रुपये देने के लिए कोरा स्टांप लेकर उस पर बयाना लिखवाने का आरोप लगाया। जिसमें धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। इस दौरान केस दर्ज करवाने वाली तीन महिलाएं थीं।
लोगों को ऐसे जालसाजों से बचना चाहिए। संभव हो तो ऋण बैंक व सहकारी समितियों से लें। ऐसे कथित फाइनेंसरों के जाल में फंसने या फंसे लोगों को इसकी शिकायत देनी चाहिए। जिले में फाइनेंसरों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा।
बीबी कौशिक, सीटीएम, यमुनानगर।
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यूं फंसाया जाता है लोगों को
कर्ज के लिए व्यक्ति के हस्ताक्षर किया कोरा स्टांप लिया जाता है। स्टांप लेने के बाद व्यक्ति को कर्ज दे दिया जाता है। इस दौरान सूदखोरों के दलाल व्यक्ति के प्रोपर्टी व बैकग्राउंड का पता करते हैं। संपत्ति अच्छी होने पर फाइनेंसर का खेल शुरू हो जाता है। व्यक्ति के कर्ज पर ब्याज, चक्रवृति ब्याज, पैनेल्टी जोड़कर रकम इतनी कर दी जाती है कि कर्जदार इससे मुक्त ही न हो सके। ब्याज चुकाकर जब व्यक्ति हार जाता है, तो फाइनेंसर उन्हें प्रताड़ित करते हैं। मूल की रकम का दस गुणा ब्याज वसूलने के बाद भी व्यक्ति कर्ज मुक्त नहीं हो पाता।
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कोरे स्टांप पर खुद लिख लेते हैं बयाना
सूदखोरों का ब्याज पहले दोगुणा, फिर चार गुणा हो जाता है। जब व्यक्ति पूरी तरह बेबस हो जाता है, तो उसके बाद कोरा स्टांप पेपर दिखा कर ब्लैकमेल किया जाता है। फाइनेंसर इस कोरे स्टांप पेपर पर कर्जदार के मकान, दुकान, प्लाट, खेतिहर जमीन का लाखों रुपये बयाना लिख देते हैं। जो व्यक्ति न तो दे सकता है और न ही इससे झुठला सकता है। फाइनेंसर उसकी संपत्ति हड़प लेते हैं। फाइनेंसर की ऐसी ही प्रताड़ना से परेशान होकर मनोज जोशी ने आत्महत्या कर ली थी।
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पिछले साल दर्ज हुए आधा दर्जन मामले
फाइनेंसर लोगों के कोरे स्टांप का लाभ उठाकर उनकी संपत्ति हड़प रहे हैं। इसे लेकर पिछले साल छह मामले ऐसे दर्ज हुए। जिसमें पीड़ित ने ब्याज पर रुपये देने के लिए कोरा स्टांप लेकर उस पर बयाना लिखवाने का आरोप लगाया। जिसमें धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। इस दौरान केस दर्ज करवाने वाली तीन महिलाएं थीं।
लोगों को ऐसे जालसाजों से बचना चाहिए। संभव हो तो ऋण बैंक व सहकारी समितियों से लें। ऐसे कथित फाइनेंसरों के जाल में फंसने या फंसे लोगों को इसकी शिकायत देनी चाहिए। जिले में फाइनेंसरों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा।
बीबी कौशिक, सीटीएम, यमुनानगर।