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Yamuna Nagar News: पुनर्वास केंद्र में हथिनियों को मिलेगी जंजीरों से मुक्ति
Wed, 11 Feb 2026 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 11 Feb 2026 01:07 AM IST
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पुनर्वास केंद्र में हथिनियों के लिए बनाया जा रहा इनक्लोजर। संवाद
कौशिक खान
छछरौली। चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बन-संतौर में रह रही हथिनियों लक्ष्मी वन, लक्ष्मी टू, लीली और चंचल के लिए लगभग पांच हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में आधुनिक इनक्लोजर का निर्माण किया जा रहा है। इस पहल से हाथियों को चेन में बांधकर रखने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और वे खुले वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेंगी।
हाथियों की देखभाल प्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ एसओएस संस्था की ओर से की जा रही है, जो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखती है। केंद्र में प्रत्येक हाथी के लिए अलग-अलग महावत नियुक्त किए गए हैं, जो उनके दैनिक भोजन, नहलाने, मालिश, नाखूनों की ट्रिमिंग (नील ट्रिमिंग) और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराते हैं। इससे हाथियों को प्राकृतिक और तनावमुक्त जीवन का अनुभव मिलेगा।
वन्य जीव प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलू राम ने बताया कि इनक्लोजर तैयार होने के बाद हाथियों को बिना किसी बंधन के खुले क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने का अवसर मिलेगा। यह बदलाव हाथियों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालेगा और उनके जीवन को और अधिक प्राकृतिक बनाएगा। करीब 50 एकड़ क्षेत्र में फैले इस पुनर्वास केंद्र को भविष्य में और अधिक सुरक्षित बनाने की योजना है। केंद्र की चारदीवारी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
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वन्यजीव प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे हाथियों के कल्याण और संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। हाथियों को प्राकृतिक वातावरण में रखने से न केवल उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि यह वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पहल के माध्यम से छछरौली का हाथी पुनर्वास केंद्र मादा हाथियों के लिए सुरक्षित, खुला और तनावमुक्त आवास प्रदान करने वाला क्षेत्र बनकर उभरेगा, जो वन्य जीवन संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक साबित होगा। संवाद
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छछरौली। चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बन-संतौर में रह रही हथिनियों लक्ष्मी वन, लक्ष्मी टू, लीली और चंचल के लिए लगभग पांच हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में आधुनिक इनक्लोजर का निर्माण किया जा रहा है। इस पहल से हाथियों को चेन में बांधकर रखने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और वे खुले वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेंगी।
हाथियों की देखभाल प्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ एसओएस संस्था की ओर से की जा रही है, जो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखती है। केंद्र में प्रत्येक हाथी के लिए अलग-अलग महावत नियुक्त किए गए हैं, जो उनके दैनिक भोजन, नहलाने, मालिश, नाखूनों की ट्रिमिंग (नील ट्रिमिंग) और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराते हैं। इससे हाथियों को प्राकृतिक और तनावमुक्त जीवन का अनुभव मिलेगा।
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वन्य जीव प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलू राम ने बताया कि इनक्लोजर तैयार होने के बाद हाथियों को बिना किसी बंधन के खुले क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने का अवसर मिलेगा। यह बदलाव हाथियों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालेगा और उनके जीवन को और अधिक प्राकृतिक बनाएगा। करीब 50 एकड़ क्षेत्र में फैले इस पुनर्वास केंद्र को भविष्य में और अधिक सुरक्षित बनाने की योजना है। केंद्र की चारदीवारी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
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वन्यजीव प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे हाथियों के कल्याण और संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। हाथियों को प्राकृतिक वातावरण में रखने से न केवल उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि यह वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पहल के माध्यम से छछरौली का हाथी पुनर्वास केंद्र मादा हाथियों के लिए सुरक्षित, खुला और तनावमुक्त आवास प्रदान करने वाला क्षेत्र बनकर उभरेगा, जो वन्य जीवन संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक साबित होगा। संवाद