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डाक्टर, नर्स नदारद, अस्पताल के बाहर दिया बच्चे को जन्म
यमुनानगर
Updated Thu, 19 Dec 2013 12:02 AM IST
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यमुनानगर जिले में सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का स्वास्थ्य विभाग का दावा खोखला साबित हो रहा है।
डिलीवरी के लिए मंगलवार देर रात बुड़िया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाई गई महिला को ठिठुरन और कोहरे भरी रात में गर्भवती महिला ने अस्पताल प्रांगण के ठंडे फर्श पर बच्चे को जन्म देने पड़ा।
महिला काफी देर तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन अस्पताल में डाक्टर और नर्स नदारद मिले। मामले की सूचना मिलने पर सिविल सर्जन बुधवार को जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
बुड़िया के प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र में रात करीब 12 बजे एक महिला डिलीवरी के लिए लाई गई। लेकिन परिजनों को अस्पताल का गेट बंद मिला। पड़ोसियों की सहायता से पीएचसी का मेन गेट खोला गया। भीतर जाने पर वहां भी कोई कर्मचारी नहीं मिला और पीएचसी का दरवाजा बंद था।
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गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाने पर ठंडे फर्श पर ही बच्चे का जन्म हुआ। करीब एक घंटे बाद नर्स पीएचसी पहुंची, जिसके बाद गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे को भीतर ले जाया गया। इस लेकर गर्भवती महिला के परिजनाें और नर्स के बीच कहासुनी भी हुई।
महिला के साथ आईं अनवरी, अखतरी और नसरीन ने बताया कि अगर हम अपने घर ही बच्चा पैदा कराएं तो स्वास्थ्य विभाग जन्म प्रमाण पत्र देने से मना कर देता है। इसलिए हम उसे प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र में लेकर आए। उन्होंने बताया कि यहां लाने के बाद आशा वर्कर के पास किसी नर्स का नंबर नहीं मिला।
प्रसव पीड़ा शुरू हो जाने से उसे वापस घर या किसी दूसरे अस्पताल ले जाना भी संभव नहीं था। ठंड के दौरान ही गर्भवती महिला ने अस्पताल परिसर में बच्चे को जन्म दिया। ठंड के कारण बच्चें और उसकी मां की जान भी जा सकती थी।
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डिलीवरी के लिए मंगलवार देर रात बुड़िया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाई गई महिला को ठिठुरन और कोहरे भरी रात में गर्भवती महिला ने अस्पताल प्रांगण के ठंडे फर्श पर बच्चे को जन्म देने पड़ा।
महिला काफी देर तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन अस्पताल में डाक्टर और नर्स नदारद मिले। मामले की सूचना मिलने पर सिविल सर्जन बुधवार को जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
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बुड़िया के प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र में रात करीब 12 बजे एक महिला डिलीवरी के लिए लाई गई। लेकिन परिजनों को अस्पताल का गेट बंद मिला। पड़ोसियों की सहायता से पीएचसी का मेन गेट खोला गया। भीतर जाने पर वहां भी कोई कर्मचारी नहीं मिला और पीएचसी का दरवाजा बंद था।
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गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाने पर ठंडे फर्श पर ही बच्चे का जन्म हुआ। करीब एक घंटे बाद नर्स पीएचसी पहुंची, जिसके बाद गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे को भीतर ले जाया गया। इस लेकर गर्भवती महिला के परिजनाें और नर्स के बीच कहासुनी भी हुई।
महिला के साथ आईं अनवरी, अखतरी और नसरीन ने बताया कि अगर हम अपने घर ही बच्चा पैदा कराएं तो स्वास्थ्य विभाग जन्म प्रमाण पत्र देने से मना कर देता है। इसलिए हम उसे प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र में लेकर आए। उन्होंने बताया कि यहां लाने के बाद आशा वर्कर के पास किसी नर्स का नंबर नहीं मिला।
प्रसव पीड़ा शुरू हो जाने से उसे वापस घर या किसी दूसरे अस्पताल ले जाना भी संभव नहीं था। ठंड के दौरान ही गर्भवती महिला ने अस्पताल परिसर में बच्चे को जन्म दिया। ठंड के कारण बच्चें और उसकी मां की जान भी जा सकती थी।