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विश्वास के बिना भक्ति प्राण रहित देह के समान : सिद्धेश्वरी

Mon, 05 Jan 2026 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 05 Jan 2026 01:10 AM IST
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Devotion without faith is like a lifeless body: Siddheshwari
प्रवचन करतीं साध्वी सिद्धेश्वरी। संस्थान - फोटो : अमावां चौराहा पर हंगामा करते ग्रामीणों को समझाती पुलिस।
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने श्रद्धालुओं को भक्ति सूत्रों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विश्वास भक्ति का आधार है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि विश्वास के बिना भक्ति प्राण रहित देह के समान है, जिसे कितना भी सुंदर सजा लिया जाए, परंतु दुर्गंध ही आएगी। परमात्मा के प्रति हृदय में दृढ़ विश्वास पैदा करना ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न है। इसके लिए संत महापुरुष हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
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साध्वी ने कहा कि ब्रह्मनिष्ठ संत से जब हमें ब्रह्मज्ञान प्राप्त होता है, तो हमें अंतर घट में ही परमात्मा की ज्योति का दर्शन होता है। इससे हमारे जीवन में फैला अज्ञानता का अंधकार समूल विनष्ट हो जाता है। अज्ञानता के कारण ही अविश्वास पैदा होता है और ज्ञान रूपी प्रकाश के उपस्थित होते ही अज्ञानता रूपी अंधकार छंट जाता है। हम जो कुछ भी बाहरी इंद्रियों से देखते सुनते या अनुभव करते हैं, केवल उसे ही सत्य मानते हैं।
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किंतु यहां विचारणीय है कि यह संसार व संसार के भोग पदार्थ, जिन्हें हम अनुभव कर रहे हैं, वे सदा नहीं रहने वाले हैं। निश्चित ही इस नश्वर संसार के विश्वास का आधार भी नश्वर ही होगा, परंतु परमात्मा की शाश्वत सत्ता पर विश्वास होने पर हमें सत्यता का ज्ञान होता है और उस विश्वास के द्वारा हम अपने मन, वचन, कर्म से होने वाले पापों से बच जाते हैं।
जब हम परमात्मा की असीम सत्ता को इस संसार के कण-कण में अनुभव करते हैं, तो सहज रूप से ही हमारे मन के विचार, वाणी की शब्द और हमारे कर्म भी प्रकृति के अनुकूल हो जाते हैं, जिससे हमारे जीवन में आने वाली बाधाओं और दुविधाओं का निवारण स्वयं परमात्मा करते हैं।

उन्होंने कहा कि आशुतोष महाराज कहते हैं कि विश्वास तभी दृढ़ हो सकता है जब उसका आधार सत्य और धर्म से जुड़ा हो। पीतल के पात्र को पूरे विश्वास के साथ स्वर्ण का कहते रहें तो वह स्वर्ण में परिवर्तित नहीं होगा अपितु स्वर्ण पात्र को पूरी तरह परख कर फिर उस पर अपना दृढ़ विश्वास टिकाएं, तभी विश्वास करना सार्थक हो पाएगा। साध्वियों ने भजनों से गुरु व ईश्वर की महिमा का गुणगान किया।

प्रवचन करतीं साध्वी सिद्धेश्वरी। संस्थान

प्रवचन करतीं साध्वी सिद्धेश्वरी। संस्थान- फोटो : अमावां चौराहा पर हंगामा करते ग्रामीणों को समझाती पुलिस।

प्रवचन करतीं साध्वी सिद्धेश्वरी। संस्थान

प्रवचन करतीं साध्वी सिद्धेश्वरी। संस्थान- फोटो : अमावां चौराहा पर हंगामा करते ग्रामीणों को समझाती पुलिस।

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