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जीवन को जीव की सेवा में लगाएं : डॉ. स्वाति
Fri, 09 Aug 2024 04:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 09 Aug 2024 04:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 20वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि मनुष्य का जन्म मिलना बहुत दुर्लभ है। इस दुर्लभ मानव जीवन को हमें पाप कार्यों में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। धर्म ध्यान करके इस जीवन का लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 84 करोड़ योनियों में भटकने के बाद यह दुर्लभ मानव जीवन नसीब में आता है। यदि उसके बाद भी इसको हमने व्यर्थ व्यसनों में या ईर्ष्या, लोभ, क्रोध, माया, मोह में खोया तो यह हमारी बदकिस्मती होगी। यह जीवन क्षण भंगुर है। एक सांस लेने के बाद दूसरा सांस आएगा या नहीं इसका कोई भरोसा नहीं है। यह जीवन हथेली पर रखी बर्फ के समान है जो प्रतिपल पिघल रही है।
ऐसे ही हमारा जीवन भी पल-पल मृत्यु के करीब जा रहा है। इस संसार में प्रत्येक वस्तु का विनाश निश्चित है। फूल खिलता है तो मुरझाता भी है। सूर्य उदित होता है तो अस्त भी होता है। जन्म के साथ ही व्यक्ति की मृत्यु लिख दी जाती है। इस संसार में प्रत्येक प्राणी को मरना है, लेकिन मरने से पूर्व हम अपने जीवन को धर्ममय बना लें।
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गुरुओं की शरण में बैठे, गरीबों का भला करें, समाज में जो भी वंचित वर्ग है उनके उत्थान के लिए तन मन धन से जुट जाएं। यह अमूल्य जीवन हमें मिला है। इसका यही भरपूर लाभ उठा सकते हैं ताकि हमारी आत्मा को परमात्मा की प्राप्ति हो जाए और बार-बार जन्म मृत्यु के इस चक्कर से हम बाहर निकल जाएं।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 20वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि मनुष्य का जन्म मिलना बहुत दुर्लभ है। इस दुर्लभ मानव जीवन को हमें पाप कार्यों में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। धर्म ध्यान करके इस जीवन का लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 84 करोड़ योनियों में भटकने के बाद यह दुर्लभ मानव जीवन नसीब में आता है। यदि उसके बाद भी इसको हमने व्यर्थ व्यसनों में या ईर्ष्या, लोभ, क्रोध, माया, मोह में खोया तो यह हमारी बदकिस्मती होगी। यह जीवन क्षण भंगुर है। एक सांस लेने के बाद दूसरा सांस आएगा या नहीं इसका कोई भरोसा नहीं है। यह जीवन हथेली पर रखी बर्फ के समान है जो प्रतिपल पिघल रही है।
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ऐसे ही हमारा जीवन भी पल-पल मृत्यु के करीब जा रहा है। इस संसार में प्रत्येक वस्तु का विनाश निश्चित है। फूल खिलता है तो मुरझाता भी है। सूर्य उदित होता है तो अस्त भी होता है। जन्म के साथ ही व्यक्ति की मृत्यु लिख दी जाती है। इस संसार में प्रत्येक प्राणी को मरना है, लेकिन मरने से पूर्व हम अपने जीवन को धर्ममय बना लें।
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गुरुओं की शरण में बैठे, गरीबों का भला करें, समाज में जो भी वंचित वर्ग है उनके उत्थान के लिए तन मन धन से जुट जाएं। यह अमूल्य जीवन हमें मिला है। इसका यही भरपूर लाभ उठा सकते हैं ताकि हमारी आत्मा को परमात्मा की प्राप्ति हो जाए और बार-बार जन्म मृत्यु के इस चक्कर से हम बाहर निकल जाएं।