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Yamuna Nagar News: मंदिरों में उमड़ी भीड़, भोर पहर से लगा रहा श्रद्धालुआ का तांता
Mon, 31 Mar 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 31 Mar 2025 12:57 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। चैत्र नवरात्र पहले दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में तड़के ही दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगने लगा था। नवसंवत्सर के शुभारंभ पर मंदिरों में विभिन्न धार्मिक व वैदिक अनुष्ठान करवाए गए। वहीं पहले दिन घरों में घट स्थापना कर भक्तों ने की मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई।
नवरात्र के चलते मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों व फूलों से सजाया गया है। रविवार तड़के ही मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने मंदिरों में पहुंच कर मां दुर्गा की पूजा की और मनोकामनाएं मांगी। जगाधरी के देवी भवन मंदिर और रेलवे स्टेशन स्थित श्री मूर्ति देवी मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ रही। मंदिरों में रात तक श्रद्धालुओं का आना जारी रहा। भक्तों ने घरों, कार्यालय, प्रतिष्ठानों में घट स्थापना कर मां दुर्गा की नौ दिन आराधना का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने घट स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की। मां शैलपुत्री की पूजन के साथ श्रद्धालुओं ने व्रत धारण किया। व्रत करने वाले श्रद्धालु नौ दिन मां दुर्गा के नव रूपों की पूजा करेंगे। वहीं, अष्टमी व नवमी पर कन्या पूजन व भोज के साथ व्रत पूर्ण करेंगे। इसे लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।
ज्योतिषाचार्य पंडित रमन वत्स ने बताया कि दूसरे नवरात्र पर मां के द्वितीय रूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही ममता व करुणामयी है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से साधक श्रेष्ठ व्यक्तित्व को प्राप्त करता है। चूंकि ब्रह्मचारिणी तप व भक्ति की देवी हैं। उन्होंने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी के नाम में ही उनकी शक्तियों की महिमा का वर्णन मिलता है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली है। अर्थात तप का आचरण करने वाली शक्ति है।
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मां के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, संयम, सदाचार में वृद्धि होती है। जीवन के कठिन से कठिन समय में भी मनुष्य अपने पथ से विचलित नहीं होता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप श्वेत वस्त्र में लिपटी कन्या के रूप में है, जिनके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे में कमंडल है। यह अक्षयमाला और कमंडल धारिणी ब्रह्मचारिणी नामक दुर्गा शास्त्रों के ज्ञान व निगमागम तंत्र-मंत्र आदि से संयुक्त हैं।
माता चंद्रघंटा की भी आज करें आराधना
ज्योतिषाचार्य पंडित रमन वत्स ने बताया सोमवार को ही तीसरा नवरात्र है। इस पर मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना होगी। मां चंद्रघंटा के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा है। चंद्रमा शांति एवं घंटा नाद का प्रतीक है। देवासुर संग्राम में देवी के घंटा नाद से अनेकानेक असुर काल के ग्रास बन गए। शास्त्रों में आराधना में नाद पर विशेष ध्यान दिया गया है। सुर एवं संगीत दोनों को ही वशीकरण का बीज मंत्र माना गया है।
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जगाधरी। चैत्र नवरात्र पहले दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में तड़के ही दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगने लगा था। नवसंवत्सर के शुभारंभ पर मंदिरों में विभिन्न धार्मिक व वैदिक अनुष्ठान करवाए गए। वहीं पहले दिन घरों में घट स्थापना कर भक्तों ने की मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई।
नवरात्र के चलते मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों व फूलों से सजाया गया है। रविवार तड़के ही मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने मंदिरों में पहुंच कर मां दुर्गा की पूजा की और मनोकामनाएं मांगी। जगाधरी के देवी भवन मंदिर और रेलवे स्टेशन स्थित श्री मूर्ति देवी मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ रही। मंदिरों में रात तक श्रद्धालुओं का आना जारी रहा। भक्तों ने घरों, कार्यालय, प्रतिष्ठानों में घट स्थापना कर मां दुर्गा की नौ दिन आराधना का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने घट स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की। मां शैलपुत्री की पूजन के साथ श्रद्धालुओं ने व्रत धारण किया। व्रत करने वाले श्रद्धालु नौ दिन मां दुर्गा के नव रूपों की पूजा करेंगे। वहीं, अष्टमी व नवमी पर कन्या पूजन व भोज के साथ व्रत पूर्ण करेंगे। इसे लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।
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ज्योतिषाचार्य पंडित रमन वत्स ने बताया कि दूसरे नवरात्र पर मां के द्वितीय रूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही ममता व करुणामयी है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से साधक श्रेष्ठ व्यक्तित्व को प्राप्त करता है। चूंकि ब्रह्मचारिणी तप व भक्ति की देवी हैं। उन्होंने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी के नाम में ही उनकी शक्तियों की महिमा का वर्णन मिलता है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली है। अर्थात तप का आचरण करने वाली शक्ति है।
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मां के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, संयम, सदाचार में वृद्धि होती है। जीवन के कठिन से कठिन समय में भी मनुष्य अपने पथ से विचलित नहीं होता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप श्वेत वस्त्र में लिपटी कन्या के रूप में है, जिनके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे में कमंडल है। यह अक्षयमाला और कमंडल धारिणी ब्रह्मचारिणी नामक दुर्गा शास्त्रों के ज्ञान व निगमागम तंत्र-मंत्र आदि से संयुक्त हैं।
माता चंद्रघंटा की भी आज करें आराधना
ज्योतिषाचार्य पंडित रमन वत्स ने बताया सोमवार को ही तीसरा नवरात्र है। इस पर मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना होगी। मां चंद्रघंटा के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा है। चंद्रमा शांति एवं घंटा नाद का प्रतीक है। देवासुर संग्राम में देवी के घंटा नाद से अनेकानेक असुर काल के ग्रास बन गए। शास्त्रों में आराधना में नाद पर विशेष ध्यान दिया गया है। सुर एवं संगीत दोनों को ही वशीकरण का बीज मंत्र माना गया है।