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काटा बवाल, लैब असिस्टेंट को पीटा, तोड़े लैब की शीशे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2016 12:22 AM IST
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लैब असिस्टेंट को पीटा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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छोटी लाइन स्थित एक ज्वेलर की पांच साल की पौती की मौत पर गुस्साए परिजनों ने गुरुवार को जगाधरी वर्कशॉप रोड स्थित स्वामी विवेकानंद मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में बवाल काटा। भड़के परिजनों ने एक लैब असिस्टेंट को जमकर पीटा और लैब का शीशा भी तोड़ डाला। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के एक डॉक्टर और लैब असिस्टेंट की लापरवाही से उनकी बच्ची की मौत हुई है। हंगामे की सूचना मिलते ही सिटी एसएचओ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत किया।
छोटी लाइन निवासी संजीव भोला और इंदू भोला ने बताया कि उनकी पांच वर्षीय लड़की तनवी भोला स्प्रिंग फिल्ड पब्लिक स्कूल में केजी की छात्रा थी। आठ अगस्त को स्कूल से वापस आने के बाद उसने कुछ नहीं खाया। वे उसी दिन शाम करीब सात बजे तनवी को चैकअप के लिए स्वामी विवेकानंद अस्पताल में लेकर आए। अस्पताल में मौजूद एक चिकित्सक ने उसकी लड़की का बीपी चैक किया और कुछ टेस्ट करने के लिए लैब में भेज दिया। इंदू ने बताया कि जैसे ही लैब असिस्टेंट ने टेस्ट लेने के लिए बच्ची का खून निकाला तो उसकी लड़की की तबीयत अचानक खराब होने लगी। उसने खून की उल्टियां की और बेसुध हो गई। वे तुरंत चिकित्सक के पास लेकर गए। चिकित्सक ने उसकी बच्ची को शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। जहां दो दिन उसे वेंटीलेटर पर रखा गया। बुधवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।
गलत नस में टीका लगाने का आरोप
बच्ची की मां इंदू भोला का आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें मिस गाइड किया और लैब असिस्टेंट ने भी गलत नस में टीका लगाया। जिससे उनकी बेटी की तबीयत खराब होने लगी। उनका आरोप यह भी है कि अस्पताल में बिना प्रमाणपत्र और ट्रेनिंग किए हुए लैब सहायक रखे गए है। जिन्हें काम का कोई अनुभव भी नहीं। जब बेटी की तबीयत अधिक खराब हुई तो अच्छे यंत्रों की सुविधा न होने की बात कहकर उनकी बेटी को दूसरे अस्पताल में रैफर कर दिया गया।
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आईएमए ने किया तोड़फोड़ का विरोध
अस्पताल में तोड़फोड़ और हंगामे की सूचना पर आईएमए जिलाध्यक्ष डा. विक्रम भारती, अन्य सदस्य डा. प्रदीप कोहली, डा. राजन शर्मा, डा. डीके सोनी, डा. रितू मगो, डा. राजेश मगो, डा. अजय शर्मा, डा. योगेश जिंदल और डा. सचिन मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना की निंदा की। भारती का कहना है कि परिवार को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। दिक्कत थी तो शिकायत करते। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाता। 2008 में अस्पताल व मरीज के लिए कानून बना था कि कोई भी कानून को हाथ में नहीं लेगा। मरीज को दिक्कत है तो वे तोडफ़ोड़ की बजाय शिकायत करे। यही नियम डाक्टर पर भी लागू होता है।
जब इलाज नहीं दिया तो लापरवाही कैसी : विमल
स्वामी विवेकानंद मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के संचालक विमल कांबोज का कहना है कि उनके स्तर पर कोई लापरवाही नहीं है। एक एमएल खून फ्रेश सूई से सैंपल के तौर पर लिया गया। न ही उसे कोई इलाज दिया गया और न ही कोई दवा। ऐसे में लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता। बुधवार शाम ही परिवार के 10-12 सदस्य उनसे मिलने आए थे। तब कोई दिक्कत नहीं थी। यदि दिक्कत थी तो परिवार पोस्टमार्टम करवाता, वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। ये किसी की शरारत है जो आज हंगामा किया गया। इस मामले की शिकायत वे शहर पुलिस को देंगे।
वर्जन
परिजनों द्वारा अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलने पर वे पुलिस के साथ मौके पर गए थे। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों व लैब असिस्टेंट पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए है। इसकी शिकायत भी उन्हें मिल चुकी है। मामले की जांच मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी। परिजनों की शिकायत को भी मेडिकल बोर्ड को भेज दिया जाएगा। वहीं अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की अभी तक उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अजीत कुमार, एसएचओ, थाना शहर यमुनानगर।
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छोटी लाइन निवासी संजीव भोला और इंदू भोला ने बताया कि उनकी पांच वर्षीय लड़की तनवी भोला स्प्रिंग फिल्ड पब्लिक स्कूल में केजी की छात्रा थी। आठ अगस्त को स्कूल से वापस आने के बाद उसने कुछ नहीं खाया। वे उसी दिन शाम करीब सात बजे तनवी को चैकअप के लिए स्वामी विवेकानंद अस्पताल में लेकर आए। अस्पताल में मौजूद एक चिकित्सक ने उसकी लड़की का बीपी चैक किया और कुछ टेस्ट करने के लिए लैब में भेज दिया। इंदू ने बताया कि जैसे ही लैब असिस्टेंट ने टेस्ट लेने के लिए बच्ची का खून निकाला तो उसकी लड़की की तबीयत अचानक खराब होने लगी। उसने खून की उल्टियां की और बेसुध हो गई। वे तुरंत चिकित्सक के पास लेकर गए। चिकित्सक ने उसकी बच्ची को शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। जहां दो दिन उसे वेंटीलेटर पर रखा गया। बुधवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।
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गलत नस में टीका लगाने का आरोप
बच्ची की मां इंदू भोला का आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें मिस गाइड किया और लैब असिस्टेंट ने भी गलत नस में टीका लगाया। जिससे उनकी बेटी की तबीयत खराब होने लगी। उनका आरोप यह भी है कि अस्पताल में बिना प्रमाणपत्र और ट्रेनिंग किए हुए लैब सहायक रखे गए है। जिन्हें काम का कोई अनुभव भी नहीं। जब बेटी की तबीयत अधिक खराब हुई तो अच्छे यंत्रों की सुविधा न होने की बात कहकर उनकी बेटी को दूसरे अस्पताल में रैफर कर दिया गया।
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आईएमए ने किया तोड़फोड़ का विरोध
अस्पताल में तोड़फोड़ और हंगामे की सूचना पर आईएमए जिलाध्यक्ष डा. विक्रम भारती, अन्य सदस्य डा. प्रदीप कोहली, डा. राजन शर्मा, डा. डीके सोनी, डा. रितू मगो, डा. राजेश मगो, डा. अजय शर्मा, डा. योगेश जिंदल और डा. सचिन मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना की निंदा की। भारती का कहना है कि परिवार को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। दिक्कत थी तो शिकायत करते। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाता। 2008 में अस्पताल व मरीज के लिए कानून बना था कि कोई भी कानून को हाथ में नहीं लेगा। मरीज को दिक्कत है तो वे तोडफ़ोड़ की बजाय शिकायत करे। यही नियम डाक्टर पर भी लागू होता है।
जब इलाज नहीं दिया तो लापरवाही कैसी : विमल
स्वामी विवेकानंद मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के संचालक विमल कांबोज का कहना है कि उनके स्तर पर कोई लापरवाही नहीं है। एक एमएल खून फ्रेश सूई से सैंपल के तौर पर लिया गया। न ही उसे कोई इलाज दिया गया और न ही कोई दवा। ऐसे में लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता। बुधवार शाम ही परिवार के 10-12 सदस्य उनसे मिलने आए थे। तब कोई दिक्कत नहीं थी। यदि दिक्कत थी तो परिवार पोस्टमार्टम करवाता, वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। ये किसी की शरारत है जो आज हंगामा किया गया। इस मामले की शिकायत वे शहर पुलिस को देंगे।
वर्जन
परिजनों द्वारा अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलने पर वे पुलिस के साथ मौके पर गए थे। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों व लैब असिस्टेंट पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए है। इसकी शिकायत भी उन्हें मिल चुकी है। मामले की जांच मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी। परिजनों की शिकायत को भी मेडिकल बोर्ड को भेज दिया जाएगा। वहीं अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की अभी तक उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अजीत कुमार, एसएचओ, थाना शहर यमुनानगर।