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Yamuna Nagar News: किसानों की पंचायत देख प्रशासन ने टाला टावर लगाने का निर्णय

Sat, 31 Jan 2026 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 31 Jan 2026 12:03 AM IST
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After seeing the farmers' protest, the administration postponed the decision to install the tower
गांव सुढल में टावर लगाने के विरोध में धरने पर बैठेे भाकियू के पदा​धिकारी व किसान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। 66 केवी बिजली लाइन के टावरों को लेकर सुढैल गांव में किसानों का आक्रोश शुक्रवार को खुलकर सामने आ गया। टावरों का विरोध करने के लिए गांव सुढैल में किसानों ने पंचायत की। बाद में टावरों की कीमत और मुआवजे को लेकर प्रशासन व किसानों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते जिला सचिवालय में हुई लंबी बैठक भी बेनतीजा रही।
किसानों ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि जब तक उन्हें मार्केट रेट के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक वे अपने खेतों में टावर नहीं लगने देंगे। प्रशासन पर जबरदस्ती टावर लगाने की कोशिश का आरोप भी किसानों ने लगाया है। सुढैल गांव में शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर किसानों ने पंचायत आयोजित की।
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पंचाच में भारतीय किसान यूनियन चढ़ूीनी और टिकैत, दोनों संगठनों से जुड़े किसानों ने भाग लिया। पंचायत में किसानों ने एकजुट होकर टावर लगाने का विरोध करने और आगे की रणनीति तय करने पर चर्चा की। पंचायत के बाद किसानों की एसडीएम जगाधरी विश्वनाथ के कार्यालय में एचवीपीएनएल अधिकारियों के साथ बैठक भी कराई गई, जो करीब दो से ढाई घंटे तक चली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।
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भाकियू टिकैत के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर व भाकियू चढूनी के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना व किसान नेता हरपाल सुढल ने बताया कि रादौर के बकाना से लेकर सेक्टर-18 जगाधरी तक 66 केवी की बिजली लाइन बिछाई जा रही है। इसके तहत सुढल और सुढैल गांव की कृषि भूमि में बिजली के टावर लगाए जाने हैं। इन दोनों गांवों में अभी करीब 11 टावर लगाए जाना बाकी हैं।
किसान शुरू से ही टावर लगाने के बदले अपनी जमीन और फसलों का मुआवजा मार्केट रेट के हिसाब से देने की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि पहले टावर लगाए जाएंगे और बाद में भुगतान किया जाएगा। यही बात किसानों को मंजूर नहीं है। एक तरफ प्रशासन कह रहा है कि मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा देने का उनके पास कोई नोटिफिकेशन नहीं है।
किसानों का कहना है कि जो अधिकारी आज पहले टावर लगाकर बाद में मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा दिलवाने की बात कह रहे हैं यदि कल को उनका तबादला हो गया तो वह किससे पैसे मांगेंगे। किसानों का आरोप है कि शुक्रवार सुबह प्रशासन ने बिना सहमति के खेतों में टावर लगाने के लिए मशीनरी मंगवा ली थी। पुलिस बल बुलाने की तैयारी भी थी, लेकिन गांव में किसानों की पंचायत और एकजुटता को देखते हुए प्रशासन को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
हरपाल सिंह सुढल ने बैठक में कहा कि उनके खेत में पहले से बाग लगा हुआ था। टावर लाइन के चलते उसके कई पेड़ कटे, जिनका मुआवजा तत्कालीन डीसी ने तय किया था, लेकिन आज तक उन्हें उसका भुगतान नहीं मिला है। ऐसे में प्रशासन पर भरोसा करना किसानों के लिए मुश्किल हो गया है। जब पुराने मामलों का भुगतान नहीं हुआ, तो नए टावरों का पैसा बाद में मिलने की बात कैसे मानी जाए।

सुढल-सुढैल में बिजली लाइन के टावर लगाने को लेकर बात चल रही है। प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को कोई नुकसान न हो। उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। यदि कहीं मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा किसानों को मिला है तो उसकी भी डिटेल मंगवाई जा रही है। - विश्वनाथ, एसडीएम जगाधरी।

गांव सुढल में टावर लगाने के विरोध में धरने पर बैठेे भाकियू के पदाधिकारी व किसान। संवाद

गांव सुढल में टावर लगाने के विरोध में धरने पर बैठेे भाकियू के पदाधिकारी व किसान। संवाद

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