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Yamuna Nagar News: कांग्रेस प्रधानों के सिर पर चुनौतियों का ताज
Thu, 14 Aug 2025 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 14 Aug 2025 03:54 AM IST
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यमुनानगर। 11 साल बाद आखिरकार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपने शहरी व ग्रामीण जिलाध्यक्ष मिल ही गए। कार्यकर्ताओं को इसके लिए एक दशक से ज्यादा का इंतजार करना पड़ा। इतने साल से बाकी के जो नेता इन पदों पर नजर लगाए बैठे थे इसी के साथ वह भी शांत बैठ गए।
शहरी प्रधान के रूप में देवेंद्र सिंह व ग्रामीण में नरपाल गुर्जर को चुनौतियों का ताज मिला है। अब उन्हें कांग्रेस में जान फूंकने के साथ-साथ गुटबाजी को भी पार पाना होगा। दोनों पद अंबाला सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा खेमे को मिले हैं। ऐसे में हुडा खेमे को साथ लेकर चलना दोनों के लिए इतना आसान भी नहीं है। हुडा व सैलजा खेमे की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। जब भी हाईकमान के आदेशों पर कांग्रेस सड़क पर उतरी है या फिर धरने प्रदर्शन हुए उससे एक खेमा ज्यादातर गैरहाजिर ही रहा है।
धरने प्रदर्शन में यदि सैलजा गुट के सदस्य ज्यादा पहुंचे तो वहां हुड्डा खेमा नहीं आया। हुड्डा खेमा हावी रहा तो सैलजा गुट ने दूरी बना ली। जानकारों की माने तो अब जिला कांग्रेस में पहले से ज्यादा गुटबाजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह प्रधान पदों में खेमों का संतुलन न होना है। हुड्डा खेमा जिला प्रधानों के कार्यक्रमों से पूरी तरह से दूरी बनाने जैसी रणनीति बना सकता है।
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वैसे इसकी संभावना कम भी मानी जा रही है। वह इसलिए क्योंकि पहले संगठन नहीं था। इसलिए कौन पार्टी का साथ दे रहा है और कौन नहीं इसकी रिपोर्ट हाईकमान तक ठीक से पहुंच नहीं पाती थी। अब शहरी व ग्रामीण जिला प्रधान एक-एक आयोजन की रिपोर्ट मुख्यालय भेजेंगे। ऐसे में नाराज नेताओं की दूरी अब पार्टी में भारी भी पड़ सकती है। संवाद
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शहरी प्रधान के रूप में देवेंद्र सिंह व ग्रामीण में नरपाल गुर्जर को चुनौतियों का ताज मिला है। अब उन्हें कांग्रेस में जान फूंकने के साथ-साथ गुटबाजी को भी पार पाना होगा। दोनों पद अंबाला सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा खेमे को मिले हैं। ऐसे में हुडा खेमे को साथ लेकर चलना दोनों के लिए इतना आसान भी नहीं है। हुडा व सैलजा खेमे की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। जब भी हाईकमान के आदेशों पर कांग्रेस सड़क पर उतरी है या फिर धरने प्रदर्शन हुए उससे एक खेमा ज्यादातर गैरहाजिर ही रहा है।
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धरने प्रदर्शन में यदि सैलजा गुट के सदस्य ज्यादा पहुंचे तो वहां हुड्डा खेमा नहीं आया। हुड्डा खेमा हावी रहा तो सैलजा गुट ने दूरी बना ली। जानकारों की माने तो अब जिला कांग्रेस में पहले से ज्यादा गुटबाजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह प्रधान पदों में खेमों का संतुलन न होना है। हुड्डा खेमा जिला प्रधानों के कार्यक्रमों से पूरी तरह से दूरी बनाने जैसी रणनीति बना सकता है।
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वैसे इसकी संभावना कम भी मानी जा रही है। वह इसलिए क्योंकि पहले संगठन नहीं था। इसलिए कौन पार्टी का साथ दे रहा है और कौन नहीं इसकी रिपोर्ट हाईकमान तक ठीक से पहुंच नहीं पाती थी। अब शहरी व ग्रामीण जिला प्रधान एक-एक आयोजन की रिपोर्ट मुख्यालय भेजेंगे। ऐसे में नाराज नेताओं की दूरी अब पार्टी में भारी भी पड़ सकती है। संवाद