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बैंक पर दस हजार रुपये का जुर्माना
Yamuna Nagar
Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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यमुनानगर। रोजगार के लिए बैंक से लिए लोन की अदायगी के बाद भी बैंक ने लगभग 20 हजार बकाया बताते हुए एक व्यक्ति को पहले नोटिस दिया और बाद में डिफाल्टर करार कर दिया। परेशान व्यक्ति ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। उपभोक्ता फोरम ने मामले की सुनवाई करते हुए बैंक को गलत बताते हुए पीड़ित को 10 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश सुनाया।
उपभोक्ता फोरम ने पीड़ित को यह मुआवजा राशि 30 दिन के भीतर देने को कहा है। वीणा नगर कैंप निवासी मंगतराम ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में बताया कि उसने वर्ष 2005 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत सिंडिकेट बैंक की कैंप शाखा से 85 हजार रुपये लोन लिया था। लोन पर सरकार की ओर से 7500 रुपये की सबसिडी दी जा रही थी। मंगत राम ने बताया कि उसने बैंक की सभी औपचारिकताएं पूरी करके ऑटो रिक्शा के लिए लोन ले लिया। उसने लोन 60 मासिक किश्तों में चुकता कर दिया। मंगत राम ने जब बैंक से इसकी एनओसी मांगी तो बैंक ने उसे बताया कि उसकी लोन राशि अभी बकाया है। मंगतराम ने बैंक प्रबंधक व लोन विभाग के अधिकारियों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि उसे बैंक के 19 हजार 796 रुपये देने है। कुछ दिन बाद बैंक ने मंगत राम को डिफाल्टर करार कर दिया। मंगतराम ने इसकी शिकायत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को दी, जिस पर रिजर्व बैंक ने भी माना कि उसका बैंक पर कोई बकाया नहीं है। इसके बाद मंगतराम ने जिला उपभोक्ता फोरम में गुहार लगाई। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष दीनानाथ अरोड़ा व सदस्य उर्मिल बेनीवाल ने पीड़ित की शिकायत पर सुनवाई करते हुए बैंक को दोषी पाया। फोरम ने अपने फैसले में बैंक को आदेश सुनाया कि वह पीड़ित को उसके कानूनी खर्च व उसे बेवजह परेशान करने के लिए 10 हजार रुपये हर्जाना अदा करें।
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उपभोक्ता फोरम ने पीड़ित को यह मुआवजा राशि 30 दिन के भीतर देने को कहा है। वीणा नगर कैंप निवासी मंगतराम ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में बताया कि उसने वर्ष 2005 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत सिंडिकेट बैंक की कैंप शाखा से 85 हजार रुपये लोन लिया था। लोन पर सरकार की ओर से 7500 रुपये की सबसिडी दी जा रही थी। मंगत राम ने बताया कि उसने बैंक की सभी औपचारिकताएं पूरी करके ऑटो रिक्शा के लिए लोन ले लिया। उसने लोन 60 मासिक किश्तों में चुकता कर दिया। मंगत राम ने जब बैंक से इसकी एनओसी मांगी तो बैंक ने उसे बताया कि उसकी लोन राशि अभी बकाया है। मंगतराम ने बैंक प्रबंधक व लोन विभाग के अधिकारियों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि उसे बैंक के 19 हजार 796 रुपये देने है। कुछ दिन बाद बैंक ने मंगत राम को डिफाल्टर करार कर दिया। मंगतराम ने इसकी शिकायत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को दी, जिस पर रिजर्व बैंक ने भी माना कि उसका बैंक पर कोई बकाया नहीं है। इसके बाद मंगतराम ने जिला उपभोक्ता फोरम में गुहार लगाई। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष दीनानाथ अरोड़ा व सदस्य उर्मिल बेनीवाल ने पीड़ित की शिकायत पर सुनवाई करते हुए बैंक को दोषी पाया। फोरम ने अपने फैसले में बैंक को आदेश सुनाया कि वह पीड़ित को उसके कानूनी खर्च व उसे बेवजह परेशान करने के लिए 10 हजार रुपये हर्जाना अदा करें।
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