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Yamuna Nagar News: फसल अवशेष जलाने के आरोपी 20 किसानों के खेत रेड एंट्री में

Wed, 06 Nov 2024 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 06 Nov 2024 02:07 AM IST
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20 farmers accused of burning crop residues have their farms in red entry
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। मनाही के बावजूद खेत में पराली जलाने वाले 20 किसानों के खेतों कृषि विभाग ने रेड एंट्री में डाल दिया है। इससे यह किसान दो साल तक एमएसपी पर अनाज मंडियों में अपनी फसल को नहीं बेच पाएंगे। इससे खेत में पराली जलाने वाले किसानों की परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि उन्हें आगामी सीजन में अपनी गेहूं समेत अन्य फसलें मंडियों में बेचने की अनुमति नहीं होगी।
अब तक जिले में सेटेलाइट की मदद से पराली जलाने के कुल 34 मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि इनमें से केवल 20 जगह ही ऐसी मिलीं, जहां पर किसानों ने पराली को जलाया था। वहीं 14 लोकेशन अभी ट्रेस नहीं हो सकी हैं। खेतों में पराली जलाने को लेकर जिले में कुल सात एफआईआर हो चुकी हैं। जबकि दो दिन पहले बाल छप्पर में एक व छछरौली में पराली जलाने के दो मामले मिले थे। जिनमें एफआईआर के लिए कृषि विभाग के उपनिदेशक ने एसपी को पत्र लिखा हुआ है।
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उल्लेखनीय है कि दिन में अधिकारी अपने काम व बैठकों के सिलसिले में यहां से वहां आना-जाना करते रहते हैं। इसलिए खेत में पराली में आग लगी देख अधिकारी उन पर कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में किसान पराली में अंधेरा होते ही आग लगाना शुरू कर देते हैं। रात को अधिकारी भी अपने घरों में जा चुके होते हैं। इसलिए किसी की कार्रवाई का डर भी नहीं रहता।
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पराली जलाने के बाद खेत काले हो जाते हैं जिससे उनके पकड़ में आने का खतरा रहता है। इससे बचने का तरीका भी किसानों ने निकाल लिया है। आग लगाने के तुरंत बाद ट्यूबवेल से खेत में पानी छोड़ देते हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि पराली जलाने के मामलों की लगातार समीक्षा हो रही है।

पराली जलाने वालों पर जुर्माना न करके सीधे एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। अब तक जिले में सात एफआईआर हो चुकी हैं। वहीं 20 किसानों का नाम रेड एंट्री में डाला गया है। जिले में धान की पराली जलाने के बारे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 लागू है।
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