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गर्भवती महिलाओं की ओपीडी जगाधरी, अल्ट्रासाउंड के लिए पांच किलोमीटर की दौड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2022 01:36 AM IST
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2.30 lakh cheated by making an agreement in the name of selling plot
यमुनानगर। सिविल अस्पताल जगाधरी में उपचार के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए कई किलोमीटर की भागदौड़ करनी पड़ रही है। जिस अवस्था में गर्भवती महिलाओं को घर में आराम करना चाहिए, ठीक इसके विपरीत वह अल्ट्रासाउंड के लिए सिविल अस्पताल यमुनानगर में आने जाने के लिए पांच किलोमीटर की दूरी तय करने को विवश हैं।
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जगाधरी अस्पताल में रोजाना 300 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की ओपीडी होती है। रोजाना औसतन 22 से 25 महिलाओं की डिलीवरी होती है। शहर में दो सिविल अस्पताल जगाधरी व यमुनानगर में है। यमुनानगर अस्पताल का नया भवन निर्माणाधीन है इसलिए कुछ माह पहले ही यमुनानगर में हो रही गर्भवती महिलाओं की ओपीडी को भी जगाधरी में ही शिफ्ट कर दिया था। ऐसे में पूरे जिले की गर्भवती महिलाओं की ओपीडी अब जगाधरी अस्पताल में ही होती है। दोनों अस्पतालों के बीच की दूरी पांच किलोमीटर है। गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास ठीक से हो रहा है या नहीं इसके लिए 18 सप्ताह में एक बार अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड करवाना डाक्टर की इच्छा पर निर्भर करता है। अल्ट्रासाउंड मशीन यमुनानगर के सिविल अस्पताल में ही स्थापित है। इसलिए अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को जगाधरी से यमुनानगर भागदौड़ करनी पड़ रही है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए दोबारा बनवानी पड़ती है ओपीडी की पर्ची
कोई महिला जब अल्ट्रासाउंड कराने के लिए यमुनानगर अस्पताल में जाती है तो उन्हें वहां दोबारा से ओपीडी की पर्ची बनवानी पड़ती है। इसके लिए महिलाओं को जगाधरी के बाद यमुनानगर अस्पताल में लाइन में लग कर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इतना ही नहीं जगाधरी अस्पताल में पर्ची पर डाक्टर ने जो ट्रीटमेंट लिखा था उसकी फोटो कॉपी साथ लगानी होती है। अस्पताल परिसर में फोटो कॉपी की सुविधा नहीं है। ऐसे में उन्हें ओपीडी पर्ची व अन्य दस्तावेजों की फोटो कॉपी कराने के लिए फिर से अस्पताल के बाहर पौन किलोमीटर जाना व इतनी दूरी वापसी में तय करनी होती है। यदि किसी के पास बाइक या कार की सुविधा नहीं है तो उन्हें पैदल ही सारा सफर तय करना होगा। अल्ट्रासाउंड केंद्र में भीड़ ज्यादा होती हैं। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखाने के लिए दोबारा जगाधरी अस्पताल जाना पड़ता है। कई बार तो वहां जाकर पता चलता है कि जिस महिला डाक्टर से उपचार करा रहे हैं वह ऑपरेशन थियेटर में हैं या फिर छुट्टी हो चुकी होती है।
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महिला बोली काफी परेशानी है
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने आई महिला की सास ने बताया कि वह जगाधरी से ई-रिक्शा किराये पर लेकर अस्पताल में आई। रिक्शा चालक ने उनसे 80 रुपये लिए। इसके बाद उन्हें पर्ची की फोटो स्टेट कराने के लिए बाहर जाना पड़ा। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई। इसी तरह एक व्यक्ति ने बताया कि अनचाहे गर्भ का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए वह पत्नी को लेकर पहले जगाधरी गया था। वहां से उसे यमुनानगर भेज दिया गया। अल्ट्रासाउंड भले ही निशुल्क है लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं है। इससे काफी परेशानी होती है।

मशीन शिफ्ट करना कानूनी प्रक्रिया है : डॉ. मंजीत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि यह सही है कि अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को काफी दूर आना पड़ रहा है। अस्पताल के भवन का निर्माण चलने के कारण ओपीडी को जगाधरी शिफ्ट किया गया था, परंतु मशीन को जगाधरी शिफ्ट करना कानूनी प्रक्रिया है। यह मशीन यमुनानगर अस्पताल के लिए रजिस्टर्ड है। इसलिए मशीन को जगाधरी में शिफ्ट नहीं किया जा रहा।
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