{"_id":"5b92ce9c867a557ebb22d3a4","slug":"153634778911-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एफआईआर के खिलाफ कर्मचारियों ने थाने का घेराव कर किया हंगामा, थानेदार से बोले-एक नहीं सभी को करो अरेस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एफआईआर के खिलाफ कर्मचारियों ने थाने का घेराव कर किया हंगामा, थानेदार से बोले-एक नहीं सभी को करो अरेस्ट
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एफआईआर के खिलाफ कर्मचारियों ने थाने का घेराव कर किया हंगामा
-बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मी पहले जगाधरी अनाज मंडी एकजुट, वहां से थाली बजाते हुए सिटी थाने पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। एस्मा के बाद हड़ताल कर रहे बहुउद्देशीय कर्मचारियों में से नौ कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद वीरवार देर रात पुलिस ने तीन कर्मियों को घर से उठाकर गिरफ्तार कर लिया। इस पर भड़के कर्मचारी शुक्रवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले जगाधरी अनाज मंडी में एकजुट हुए। संघ के प्रदेश सचिव सुभाष लांबा ने कर्मियों को कहा कि यहां धरना-प्रदर्शन से कोई फायदा नहीं, जिस थाना पुलिस ने साथी कर्मियों को उठाया है, वहीं जाकर प्रदर्शन करें। इसके बाद प्रदर्शनकारी थाली बजाते व रोष मार्च निकालते हुए सिटी थाना पहुंचे। यहां थाने का घेराव कर सरकार व पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में एस्मा का उल्लघंन करने के आरोप में नामजद महिला कर्मी सबसे आगे खड़ी होकर प्रदर्शन कर रही थीं। बावजूद इसके पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई। जबकि एक घंटे तक प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे। लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय बेबस नजर आई। इसके बाद प्रदर्शनकारी रोष प्रकट कर वापस चलते बने।
थानेदार से बोले-एक नहीं सभी को करो गिरफ्तार
थाने के अंदर नारेबाजी करने के बाद एसएचओ नरेंद्र राणा ने कर्मचारियों के शिष्टमंडल को अंदर बुलाया। इसमें बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की तरफ से राज्य की वित्त सचिव संतोष सैनी, जिला प्रधान अंजू शर्मा, सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान महीपाल सोढे, सचिव राजपाल सांगवान, विक्रम तथा सतीश राणा शामिल थे। एसएचओ ने उन्हें एस्मा का उल्लंघन के आरोप में नामजद छह कर्मचारियों को गिरफ्तारी देने की बात कही। इस पर कर्मचारी यह कहकर उठ गए कि एक नहीं सभी को करो अरेस्ट। उन्होंने बाहर आकर दोबारा से नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद सर्वकर्मचारी संघ के राजपाल सांगवान ने कर्मचारियों को समझा-बुझाकर उन्हें वापस जाने को कहा। इसके बाद कर्मचारी वहां से चल पड़े।
इन कर्मचारियों को उठाया रातों रात
स्वास्थ्य विभाग ने एस्मा के उल्लंघन के बाद भी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों में से नौ कर्मचारियों के खिलाफ सिटी थाना में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस ने तीन कर्मचारी सुरेश, रोहित कक्कड़ व विरेंद्र कुमार को रात को ही घर से उठा कर गिरफ्तार कर लिया था। बाकी नामजद छह महिला कर्मचारी संतोष सैनी, सरस्वती, अंजू शर्मा, परमजीत, रूबि व प्रोमिला की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
विज्ञापन
ये है एस्मा : एस्मा यानि आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। एस्मा लागू करने से पूर्व इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्य माध्यम से सूचित किया जाता है। एस्मा का नियम अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है। एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध एवं दंडनीय है। क्रिमिनल प्रोसीजर 1898 (5 ऑफ 1898) के अंतर्गत एस्मा लागू होने के बाद इस आदेश से संबंध किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।
विज्ञापन
-बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मी पहले जगाधरी अनाज मंडी एकजुट, वहां से थाली बजाते हुए सिटी थाने पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। एस्मा के बाद हड़ताल कर रहे बहुउद्देशीय कर्मचारियों में से नौ कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद वीरवार देर रात पुलिस ने तीन कर्मियों को घर से उठाकर गिरफ्तार कर लिया। इस पर भड़के कर्मचारी शुक्रवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले जगाधरी अनाज मंडी में एकजुट हुए। संघ के प्रदेश सचिव सुभाष लांबा ने कर्मियों को कहा कि यहां धरना-प्रदर्शन से कोई फायदा नहीं, जिस थाना पुलिस ने साथी कर्मियों को उठाया है, वहीं जाकर प्रदर्शन करें। इसके बाद प्रदर्शनकारी थाली बजाते व रोष मार्च निकालते हुए सिटी थाना पहुंचे। यहां थाने का घेराव कर सरकार व पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में एस्मा का उल्लघंन करने के आरोप में नामजद महिला कर्मी सबसे आगे खड़ी होकर प्रदर्शन कर रही थीं। बावजूद इसके पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई। जबकि एक घंटे तक प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे। लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय बेबस नजर आई। इसके बाद प्रदर्शनकारी रोष प्रकट कर वापस चलते बने।
थानेदार से बोले-एक नहीं सभी को करो गिरफ्तार
थाने के अंदर नारेबाजी करने के बाद एसएचओ नरेंद्र राणा ने कर्मचारियों के शिष्टमंडल को अंदर बुलाया। इसमें बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की तरफ से राज्य की वित्त सचिव संतोष सैनी, जिला प्रधान अंजू शर्मा, सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान महीपाल सोढे, सचिव राजपाल सांगवान, विक्रम तथा सतीश राणा शामिल थे। एसएचओ ने उन्हें एस्मा का उल्लंघन के आरोप में नामजद छह कर्मचारियों को गिरफ्तारी देने की बात कही। इस पर कर्मचारी यह कहकर उठ गए कि एक नहीं सभी को करो अरेस्ट। उन्होंने बाहर आकर दोबारा से नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद सर्वकर्मचारी संघ के राजपाल सांगवान ने कर्मचारियों को समझा-बुझाकर उन्हें वापस जाने को कहा। इसके बाद कर्मचारी वहां से चल पड़े।
विज्ञापन
इन कर्मचारियों को उठाया रातों रात
स्वास्थ्य विभाग ने एस्मा के उल्लंघन के बाद भी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों में से नौ कर्मचारियों के खिलाफ सिटी थाना में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस ने तीन कर्मचारी सुरेश, रोहित कक्कड़ व विरेंद्र कुमार को रात को ही घर से उठा कर गिरफ्तार कर लिया था। बाकी नामजद छह महिला कर्मचारी संतोष सैनी, सरस्वती, अंजू शर्मा, परमजीत, रूबि व प्रोमिला की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
विज्ञापन
ये है एस्मा : एस्मा यानि आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। एस्मा लागू करने से पूर्व इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्य माध्यम से सूचित किया जाता है। एस्मा का नियम अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है। एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध एवं दंडनीय है। क्रिमिनल प्रोसीजर 1898 (5 ऑफ 1898) के अंतर्गत एस्मा लागू होने के बाद इस आदेश से संबंध किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।