फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   सुरक्षित नहीं सड़क का सफर -पार्ट एक

सुरक्षित नहीं सड़क का सफर -पार्ट एक

Wed, 14 Feb 2018 12:09 AM IST
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
सुरक्षित नहीं सड़क का सफर -पार्ट एक
तीन साल में सड़कों हादसों में गई 770 की जान, 1305 हुए घायल
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में सड़क का सफर साल-दर साल खतरनाक हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन सालों में सड़क हादसों के 1461 मामले दर्ज हुए। इनमें 770 मौतें हुई, जबकि 1305 घायल हुए। जिले में साल-दर-साल सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से वर्ष 2017 सबसे बुरा रहा। वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2017 में 91 अधिक मौतें हुई। पिछले तीन सालों में भी सबसे अधिक मौतें वर्ष 2017 में हुई हैं।

तीन सालों में सड़क हादसों का ब्योरा
-वर्ष 2015 में जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कुल 468 मामले दर्ज किए गए। इनमें 237 व्यक्तियों की जान गई, जबकि कुल 409 व्यक्ति घायल हुए।
-वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटनाओं के 478 मामले दर्ज किए गए। इनमें 209 व्यक्तियों की जान गई और 466 घायल हुए।
-वर्ष 2017 में सड़क दुर्घटनाओं के 515 मामले दर्ज किए गए। इनमें 312 की मौत हुई और 430 घायल हुए।

ओवरलोड वाहन भी जानलेवा
यमुनानगर जिले में खनन व प्लाईवुड भले ही जिले के विकास को गति दे रहे हैं, लेकिन एक सच यह भी है कि इनकी वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। खनन जोन से ओवरलोड रेत-बजरी लादकर सड़कों पर दौड़ने वाले डंपर व ट्रक से आए-दिन सड़कों पर जानलेवा हादसे हो रहे हैं। रेत-बजरी से लदे भारी वाहनों से अधिकतर जानलेवा हादसे नेशनल हाइवे पर हुए हैं। इसके बावजूद हाइवे पर ना तो रेत-बजरी के वाहनों की स्पीड कम हुई है और न ही ओवरलोड।
विज्ञापन


अधिकतर ट्रैक्टर-ट्राली चालकों के पास नहीं होता लाइसेंस
ट्रैक्टर-ट्रालियों से होने वाले सड़क हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ट्रैक्टर ट्रालियों से होने वाले हादसों में यह बात सामने आई है कि अधिकतर ट्रैक्टर-ट्राली चालकों के पास लाइसेंस नहीं होता है। खनन सामग्री और पाप्लर, सफेदा व प्लाई पत्ते से लदी सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियों रोज सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं। शहरी क्षेत्र मेें ट्रैक्टर-ट्रालियों के सड़कों पर खराब होने से आए-दिन सड़क जाम भी लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जानलेवा हादसों के बाद भी हेलमेट से परहेज
दो मोटरसाइकिल की भिड़ंत के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। सालभर में मोटरसाइकिलों की भिड़ंत में 10 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। अधिकतर मामलों में मोटरसाइकिल पर ट्रिपल राइडिंग के साथ-साथ बाइक स्पीड में चलाने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि मोटरसाइकिलों की भिड़ंत में मरने वालों और घायलों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था। जानकारों का मानना है कि मोटरसाइकिलों की भिड़ंत मेें मौत होने की संभावना कम होती है। लेकिन सिर पर हेलमेट न पहनने के कारण सड़क पर गिरने से बाइक सवार के सिर पर चोट लग जाती है। इससे उसकी जान चली जाती है। सड़क हादसों में मोटरसाइकिल सवारों की मौतें होने के बावजूद दुपहिया वाहन सवार हेलमेट पहनने से परहेज कर रहे हैं।

------
अधिकतर सड़क हादसों में वाहन चालकों की लापरवाही सामने आती है। अक्सर वाहन चालक शराब पीकर वाहन चलाते हैं, जो हादसे का कारण बनता है। बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाने वालों के हर महीने चालान काटे जाते हैं। इसके बावजूद सभी लोग हेलमेट पहनकर वाहन नहीं चलाते।
- निर्मल सिंह, एसएचओ ट्रैफिक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed