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‘श्रीराम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण...’
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:55 AM IST
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‘श्रीराम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण...’
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। श्रीराम कला मंदिर की ओर से गांव करेड़ा खुर्द में आयोजित की जा रही रामलीला में कलाकारों ने दशरथ के प्राण त्यागने और भरत मिलाप की कथा का मंचन किया। कलाकारों के सजीव अभिनय से श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इस दरम्यान मां शक्ति की झांकियों का पंडाल भी सजाया गया। मंचन से पूर्व पूर्व सरपंच अनिल शर्मा ने उपस्थित दर्शकों को नवरात्रों की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक-पारिवारिक रिश्तों में मिठास कम होती जा रही है। इसलिए रामलीला के माध्यम से भावी पीढ़ी को आदर्श रिश्तों की अहमियत समझाना जरूरी हो गया है।
आज के श्रीरामचरितमानस के प्रसंग के मुताबिक, राम, सीता और लक्ष्मण निषादराज के साथ गंगातट पर पहुंचते हैं, जहां केवट उन्हें नाव से गंगा पार कराने के लिए मना कर दिया। कहा कि आपकी चरण रज से जब एक शिला नारी का रूप धर सकती है तो प्रभु मेरी तो काठ की नाव है। मुझे चरण पखारने की आज्ञा दें तो आपको गंगा पार करा दूं। गंगा पार का ये दृश्य इतना मार्मिक था कि पूरा पांडाल दर्शकों की करतल ध्वनि से गूंज उठा। उधर, राम वियोग में राजा दशरथ अयोध्या में प्राण त्याग देते हैं, तब भरत और शत्रुघ्न नाना के घर से वहां आते हैं और सारा वृत्तांत सुनकर केकैयी मंथरा को बहुत भला बुरा कहते हैं। राजा दशरथ के क्रिया कर्म के बाद भरत कुटुंब सहित रघुकुल शिरोमणि राम को मनाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं, जहां श्रीराम चरण पादुका देकर भरत को वापस भेज देते हैं और पिता के आदेश का पालन करने की सीख देते हैं। राम और भरत के इस भ्रातृ प्रेम को देखकर दर्शक गदगद हो उठे। लीला के बाद मानिकटाहला परिवार की तरफ से सभी कलाकारों के लिए रात्रि भोज की व्यवस्था की गई। राम का रोल दीपक शर्मा ने, लक्ष्मण का राकेश कश्यप, सीता का पंकज, भरत का राजकुमार मिगलानी ने निभाया।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। श्रीराम कला मंदिर की ओर से गांव करेड़ा खुर्द में आयोजित की जा रही रामलीला में कलाकारों ने दशरथ के प्राण त्यागने और भरत मिलाप की कथा का मंचन किया। कलाकारों के सजीव अभिनय से श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इस दरम्यान मां शक्ति की झांकियों का पंडाल भी सजाया गया। मंचन से पूर्व पूर्व सरपंच अनिल शर्मा ने उपस्थित दर्शकों को नवरात्रों की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक-पारिवारिक रिश्तों में मिठास कम होती जा रही है। इसलिए रामलीला के माध्यम से भावी पीढ़ी को आदर्श रिश्तों की अहमियत समझाना जरूरी हो गया है।
आज के श्रीरामचरितमानस के प्रसंग के मुताबिक, राम, सीता और लक्ष्मण निषादराज के साथ गंगातट पर पहुंचते हैं, जहां केवट उन्हें नाव से गंगा पार कराने के लिए मना कर दिया। कहा कि आपकी चरण रज से जब एक शिला नारी का रूप धर सकती है तो प्रभु मेरी तो काठ की नाव है। मुझे चरण पखारने की आज्ञा दें तो आपको गंगा पार करा दूं। गंगा पार का ये दृश्य इतना मार्मिक था कि पूरा पांडाल दर्शकों की करतल ध्वनि से गूंज उठा। उधर, राम वियोग में राजा दशरथ अयोध्या में प्राण त्याग देते हैं, तब भरत और शत्रुघ्न नाना के घर से वहां आते हैं और सारा वृत्तांत सुनकर केकैयी मंथरा को बहुत भला बुरा कहते हैं। राजा दशरथ के क्रिया कर्म के बाद भरत कुटुंब सहित रघुकुल शिरोमणि राम को मनाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं, जहां श्रीराम चरण पादुका देकर भरत को वापस भेज देते हैं और पिता के आदेश का पालन करने की सीख देते हैं। राम और भरत के इस भ्रातृ प्रेम को देखकर दर्शक गदगद हो उठे। लीला के बाद मानिकटाहला परिवार की तरफ से सभी कलाकारों के लिए रात्रि भोज की व्यवस्था की गई। राम का रोल दीपक शर्मा ने, लक्ष्मण का राकेश कश्यप, सीता का पंकज, भरत का राजकुमार मिगलानी ने निभाया।
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