UP PCS 2018 Result: हरियाणा की अनुज नेहरा ने किया टॉप, खुद बताया कैसे रचा इतिहास
- पानीपत की बेटी अनुज नेहरा ने यूपीपीएससी की परीक्षा में किया टॉप
- पहले ही प्रयास में पाया मुकाम, इससे पहले यूपीएससी में दो नंबर से रह गईं थीं
- पिता फौज से हवलदार की पोस्ट से सेवानिवृत्त, भाई पीजीआई में सर्जन
- अनुज नेहरा ने अपनी सफलता का श्रय माता-पिता को दिया, बोलीं- वही प्रेरणास्त्रोत
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस 2018 का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार हरियाणा की बेटी ने यूपीपीएससी में अपना परचम फहराया। हरियाणा के पानीपत की रहने वाले अनुज नेहरा ने पहले ही प्रयास में टॉप किया है। अनुज नेहरा इससे पहले संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दो बार दे चुकी हैं। पिछली परीक्षा में दो अंकों से चयन नहीं हो पाया था।
अनुज नेहरा ने बताया कि उन्हें टॉप करने की उम्मीद नहीं थी, हालांकि परीक्षा अच्छी हुई थी। पिता अश्बीर सिंह फौज में हवलदार थे, अब सेवानिवृत्त है। मां गृहिणी हैं। अनुज नेहरा के भाई पीजीआई रोहतक में सर्जन है। उन्होंने बताया कि उनके प्रेरणास्रोत माता-पिता हैं, जिन्होंने हमेशा सहयोग दिया। उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया। परीक्षा के दौरान वह 12 घंटे तक पढ़ाई करती थीं।
10 घंटे रोजाना पढ़ाई की
पांच साल से औसतन 10 घंटे की रोज पढ़ाई की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पिता अश्बीर सिंह, मां ऊषा नेहरा और भाई डॉ. विकास नेहरा को दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता और भाई प्रेरणास्त्रोत हैं। जिन्होंने हमेशा सहयोग किया। उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया। अनुज का परिवार मूलरूप से गांव जौली (सोनीपत) का रहने वाला है और लंबे समय से पानीपत में रह रहे हैं।
फौज में हवलदार से पद से सेवानिवृत्त पिता अश्बीर सिंह ने कहा कि हम कम पढ़े लिखे हैं लेकिन बेटी ने सारी कमी पूरी कर दी। बेटी की सफलता से इतनी खुशी हुई है कि बता नहीं सकते।
असफलताओं को मेहनत और ईमानदार कोशिश से हराएं: अनुजा नेहरा
असफलताओं को मेहनत और ईमानदार से हराया जा सकता है। असफलताओं से हार नहीं मानें। यह कहना है कि यूपी पीसीएस परीक्षा में प्रथम रैंक लाने वाली पानीपत की अनुज नेहरा का। यूपीएससी और एचसीएस की परीक्षा में असफलता के बावजूद अनुज ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि यह मेरा पहला प्रयास था लेकिन जो कर रही थी, उस पर विश्वास था। डिमॉरिलाइजेशन और डिमोटिवेशन के केस भी आते हैं लेकिन इन चीजों को आसानी से लेना चाहिए। असफलताएं देखने को मिलती हैं लेकिन मेहनत पर विश्वास करना चाहिए।
प्रश्न: पहली रैंक पाकर कैसा महसूस कर रहीं हैं ?
उत्तर: बहुत अच्छा लगता है कि जिस चीज से आप मेहनत करते हैं, उसमें सफलता भी मिल जाए तो इससे बड़ी उपलब्धि नहीं हो सकती है। बहुत समय से यह सफलता चाह रही थी, जिसके लिए मेहनत जारी थी। यह ऐसी फीलिंग है।
प्रश्न: अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी ?
उत्तर: माता-पिता और भाई को। जिन्होंने हर वक्त हौसला बढ़ाया। मैं बहुत इमोशनल हो जाती थी और बहुत जल्दी रोती थी। फिर वे मेरे असफलता को स्वीकार करने में मदद करते थे और और फिर से प्रेरित करते थे। दोस्तों ने भी बहुत सपोर्ट किया है।
प्रश्न: आपका अगला लक्ष्य क्या होगा ?
उत्तर: अब मुझे संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा देनी है। इस बार मैंने फार्म नहीं भरा था लेकिन 2021 में यूपीएससी की परीक्षा देनी हैं और आईएएस का लक्ष्य पूरा करना है।
प्रश्न: नंबर वन रैंक लाने की कितनी उम्मीद थी?
उत्तर: अच्छा होने की उम्मीद थी, टॉप 100 में आने का विश्वास था लेकिन रैंक वन आने की उम्मीद नहीं थी। रिजल्ट आने के 15 मिनट पहले तक भी नहीं लगा था कि ऐसा कुछ होगा।
प्रश्न: आप युवाओं के क्या कहेंगी ?
उत्तर: मेहनत करों, ईमानदारी से मेहनत करो। जो पढ़ों उसे मल्टीपल टाइम रिवाइज करो। नोट्स जरूर बनाओ क्योंकि आपके नोट्स से अच्छा कोई स्टडी मैटेरियल नहीं हो सकता है, मोटिवेटेड रहो और एक पेपर की नॉलेज, दूसरे पेपर में इस्तेमाल करो।
प्रश्न: असफलताओं ने कितना सिखाया?
उत्तर: असफलताओं ने बहुत सिखाया। आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुश्किल भी आई। यूपीएससी की तैयार साइंस से की थी, जिसमें काफी मेहनत की, लेकिन सफलता नहीं मिली। पीसीएस में लिबरल आर्ट्स का विषय था, ऐसे में फिर से मेहनत करनी पड़ी। 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई की। इकोनॉमिक्स और विषयों की जानकारी नहीं थी, जिससे मुश्किल आई। एचसीएस की परीक्षा भी दी लेकिन सफलता नहीं मिली। पढ़ाई का तरीका भी नहीं पता था।