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दो साल से पहले अफसरों का नहीं हो सकेगा तबादला
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Feb 2014 01:36 PM IST
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हरियाणा में आल इंडिया सर्विस (आईएएस, आईपीएस, आईएफएस) अफसरों का तबादला दो साल से पहले नहीं हो सकेगा। इसके लिए हरियाणा सिविल सर्विस बोर्ड गठित किया गया है।
आईएएस अफसरों के लिए गठित बोर्ड में मुख्य सचिव अध्यक्ष बनाए गए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) बोर्ड के सदस्य और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव बोर्ड के सदस्य सचिव बनाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्तूबर, 2013 को फैसला दिया था। उस फैसले को अमलीजामा पहनाते हुए हरियाणा सरकार ने यह बोर्ड गठित किया है। कैडर और नॉन कैडर पदों पर आईएएस अफसर की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए होगी।
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प्रमोशन होने, रिटायरमेंट होने, ट्रेनिंग पर जाने या दूसरे राज्य में डेपुटेशन होने पर यह अवधि कम हो सकती है। यह बोर्ड प्रदेश सरकार को आईएएस के सेवा मामलों खासकर तबादलों और नियुक्तियों के मामले में सलाह देगा।
कैडर और नॉन कैडर पदों पर आईएएएस अफसरों की कम से कम तैनाती अवधि भी यह बोर्ड सुनिश्चित करेगा। मुख्य सचिव एससी चौधरी ने गत 28 जनवरी को बोर्ड गठित करने की अधिसूचना जारी की थी। मगर इस बोर्ड के गठन होने के बाद चार जिलों के उपायुक्तों का तबादला भी कर दिया था।
आईपीएस और आईएफएस के लिए भी बोर्ड बनेंगे
हरियाणा के आईपीएस और आईएफएस कैडर के अफसरों की कम से कम तैनाती दो साल रहेगी, मगर इन अफसरों के तबादलों और नियुक्तियों के लिए भी अलग-अलग बोर्ड गठित होंगे।
आईपीएस अफसरों के लिए बोर्ड में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन), कार्मिक एवं प्रशिक्षण के सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक शामिल होंगे।
आईएफएस के लिए बोर्ड में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन), कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव, वन एवं वन्य जीव विभाग के प्रधान सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक शामिल होंगे।
ऐसे काम करेगा बोर्ड
जब किसी अफसर को दो साल के बाद या दो साल से पहले बदलना होगा तो बोर्ड के सदस्य सचिव बोर्ड की बैठक में एजेंडा पेश करेंगे। जिन अफसरों का दो साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा, उन्हें किसी अन्य पद पर बदलते समय कोई कारण बताने की जरूरत नहीं होगी।
मगर दो साल से पहले अगर किसी अफसर का तबादला करना होगा तो उसका कारण लिखना होगा। बोर्ड की कार्यवाही मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास जाएगी। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होगा।
अगर किसी अफसर को अपने तबादले पर ऐतराज होगा तो वह हाईकोर्ट की शरण ले सकता है। तबादलों के लिए अफसरों का दो साल के कार्यकाल की गणना में उनकी वर्तमान पोस्टिंग के कार्यकाल को शामिल किया जाएगा।
पहले दिन ही तोड़ दिया सरकार ने अपना नियम
हरियाणा सरकार ने आईएएस अफसरों का तबादला दो साल से पहले न करने का अपना नियम पहले ही दिन तोड़ दिया।
सरकार ने सिविल सर्विस बोर्ड गठित किया था। आईएएस आरसी वर्मा को 12 दिसंबर, 2013 को मेवात का उपायुक्त लगाया था जबकि अतुल कुमार को 28 जनवरी, 2014 महेंद्रगढ़ का डीसी लगाया गया था।
सरकार ने बोर्ड में फैसला किए बगैर दो साल के बजाय छह दिन बाद अतुल कुमार को मेवात का डीसी नियुक्त कर दिया और आरसी वर्मा को दो साल के बजाय 53 दिन बाद महेंद्रगढ़ का डीसी नियुक्त कर दिया।
चुनाव आयोग ने निर्देश दिए थे कि अगर किसी अफसर को एक स्थान पर तीन साल से ज्यादा समय हो गया है तो उन्हें बदल दिया जाए।
सरकार ने गुड़गांव के हुडा प्रशासक पीसी मीणा को रोजगार विभाग का निदेशक नियुक्त करने के आदेश जारी किए मगर हुडा प्रशासक का अतिरिक्त जिम्मा भी रखा। गुड़गांव के डीसी, नगर निगम आयुक्त और हुडा प्रशासक के तौर पर गुड़गांव में मीणा का कार्यकाल तीन साल से ज्यादा हो गया है।
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आईएएस अफसरों के लिए गठित बोर्ड में मुख्य सचिव अध्यक्ष बनाए गए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) बोर्ड के सदस्य और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव बोर्ड के सदस्य सचिव बनाए गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्तूबर, 2013 को फैसला दिया था। उस फैसले को अमलीजामा पहनाते हुए हरियाणा सरकार ने यह बोर्ड गठित किया है। कैडर और नॉन कैडर पदों पर आईएएस अफसर की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए होगी।
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प्रमोशन होने, रिटायरमेंट होने, ट्रेनिंग पर जाने या दूसरे राज्य में डेपुटेशन होने पर यह अवधि कम हो सकती है। यह बोर्ड प्रदेश सरकार को आईएएस के सेवा मामलों खासकर तबादलों और नियुक्तियों के मामले में सलाह देगा।
कैडर और नॉन कैडर पदों पर आईएएएस अफसरों की कम से कम तैनाती अवधि भी यह बोर्ड सुनिश्चित करेगा। मुख्य सचिव एससी चौधरी ने गत 28 जनवरी को बोर्ड गठित करने की अधिसूचना जारी की थी। मगर इस बोर्ड के गठन होने के बाद चार जिलों के उपायुक्तों का तबादला भी कर दिया था।
आईपीएस और आईएफएस के लिए भी बोर्ड बनेंगे
हरियाणा के आईपीएस और आईएफएस कैडर के अफसरों की कम से कम तैनाती दो साल रहेगी, मगर इन अफसरों के तबादलों और नियुक्तियों के लिए भी अलग-अलग बोर्ड गठित होंगे।
आईपीएस अफसरों के लिए बोर्ड में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन), कार्मिक एवं प्रशिक्षण के सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक शामिल होंगे।
आईएफएस के लिए बोर्ड में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन), कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव, वन एवं वन्य जीव विभाग के प्रधान सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक शामिल होंगे।
ऐसे काम करेगा बोर्ड
जब किसी अफसर को दो साल के बाद या दो साल से पहले बदलना होगा तो बोर्ड के सदस्य सचिव बोर्ड की बैठक में एजेंडा पेश करेंगे। जिन अफसरों का दो साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा, उन्हें किसी अन्य पद पर बदलते समय कोई कारण बताने की जरूरत नहीं होगी।
मगर दो साल से पहले अगर किसी अफसर का तबादला करना होगा तो उसका कारण लिखना होगा। बोर्ड की कार्यवाही मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास जाएगी। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होगा।
अगर किसी अफसर को अपने तबादले पर ऐतराज होगा तो वह हाईकोर्ट की शरण ले सकता है। तबादलों के लिए अफसरों का दो साल के कार्यकाल की गणना में उनकी वर्तमान पोस्टिंग के कार्यकाल को शामिल किया जाएगा।
पहले दिन ही तोड़ दिया सरकार ने अपना नियम
हरियाणा सरकार ने आईएएस अफसरों का तबादला दो साल से पहले न करने का अपना नियम पहले ही दिन तोड़ दिया।
सरकार ने सिविल सर्विस बोर्ड गठित किया था। आईएएस आरसी वर्मा को 12 दिसंबर, 2013 को मेवात का उपायुक्त लगाया था जबकि अतुल कुमार को 28 जनवरी, 2014 महेंद्रगढ़ का डीसी लगाया गया था।
सरकार ने बोर्ड में फैसला किए बगैर दो साल के बजाय छह दिन बाद अतुल कुमार को मेवात का डीसी नियुक्त कर दिया और आरसी वर्मा को दो साल के बजाय 53 दिन बाद महेंद्रगढ़ का डीसी नियुक्त कर दिया।
चुनाव आयोग ने निर्देश दिए थे कि अगर किसी अफसर को एक स्थान पर तीन साल से ज्यादा समय हो गया है तो उन्हें बदल दिया जाए।
सरकार ने गुड़गांव के हुडा प्रशासक पीसी मीणा को रोजगार विभाग का निदेशक नियुक्त करने के आदेश जारी किए मगर हुडा प्रशासक का अतिरिक्त जिम्मा भी रखा। गुड़गांव के डीसी, नगर निगम आयुक्त और हुडा प्रशासक के तौर पर गुड़गांव में मीणा का कार्यकाल तीन साल से ज्यादा हो गया है।