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खेत में खड़े नरमे के साथ उगेगी गेहूं
डबवाली (सिरसा)/ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2013 07:44 PM IST
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अब नरमा की फसल के साथ ही गेहूं भी उगेगी। एक खेत में एक साथ दो फसलें होंगी। कृषि विभाग ने इस नई तकनीक को अपनाने की तैयारियां कर ली हैं। विभाग के 10 कृषि विकास अधिकारी उपमंडल डबवाली का सर्वेक्षण कर रहे है। रिपोर्ट आते ही इस पर कार्य शुरू हो जाएगा।
उपमंडल डबवाली में कृषि योग्य भूमि के काफी हिस्से पर अभी भी नरमा खड़ा है। टिंडे खुले नहीं है। इस बीच किसान को हानि से बचाने के लिए कृषि विभाग ने ऐसे खेतों की पहचान करके उन्हें मुफ्त में गेहूं बीज और डीएपी उपलब्ध करवाने की योजना तैयार की है। पहले चरण में 500 प्रदर्शनी प्लांट लगाए जाने हैं।
खेतों की पहचान करने के लिए खंड औढ़ां में चार, डबवाली में छह एडीओ सर्वे में जुटे हुए हैं। जो अपनी सर्वे रिपोर्ट उपमंडल कृषि अधिकारी को उपलब्ध करवाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को डीएपी और बीज उपलब्ध करवाया जाएगा।
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यह है नई तकनीक
उपमंडल कृषि अधिकारी एमके भादू के अनुसार नरमा के पौधों पर टिंडे लगे हुए हैं। ऐसे खेतों में गेहूं की बिजाई हो सकती है। इसके लिए किसान को ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी। गेहूं बीज की बिजाई करने से पूर्व किसान को जमीन में पानी लगाना होगा। इसके बाद डीएपी का छिड़काव करना होगा।
छिड़काव के करीब आधे घंटे बाद गेहूं बीज का छिड़काव करना होगा। पानी लगने से नरम हुई जमीन में बीज आसानी से अपनी जगह बना लेगा। जिससे किसान को दोगुना मुनाफा होगा। उन्होंने बताया कि खेत में खड़े नरमे के पौधों पर लगे टिंडों को तोड़कर किसान घर पर रख लेता है। सुखाने के बाद उससे कॉटन निकालता है।
इस विधि में उसे एक क्विंटल टिंडों में से मुश्किल से सात किलो कॉटन मिलती है जबकि उपरोक्त तकनीक के बल पर किसान को एक क्विंटल टिंडों में से 25 किलो कॉटन मिलेगी। भादू के अनुसार किसानों को 20 नवंबर तक गेहूं का बीज और डीएपी उपलब्ध करवा दिया जाएगा ताकि समय पर बिजाई हो सके।
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उपमंडल डबवाली में कृषि योग्य भूमि के काफी हिस्से पर अभी भी नरमा खड़ा है। टिंडे खुले नहीं है। इस बीच किसान को हानि से बचाने के लिए कृषि विभाग ने ऐसे खेतों की पहचान करके उन्हें मुफ्त में गेहूं बीज और डीएपी उपलब्ध करवाने की योजना तैयार की है। पहले चरण में 500 प्रदर्शनी प्लांट लगाए जाने हैं।
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खेतों की पहचान करने के लिए खंड औढ़ां में चार, डबवाली में छह एडीओ सर्वे में जुटे हुए हैं। जो अपनी सर्वे रिपोर्ट उपमंडल कृषि अधिकारी को उपलब्ध करवाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को डीएपी और बीज उपलब्ध करवाया जाएगा।
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यह है नई तकनीक
उपमंडल कृषि अधिकारी एमके भादू के अनुसार नरमा के पौधों पर टिंडे लगे हुए हैं। ऐसे खेतों में गेहूं की बिजाई हो सकती है। इसके लिए किसान को ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी। गेहूं बीज की बिजाई करने से पूर्व किसान को जमीन में पानी लगाना होगा। इसके बाद डीएपी का छिड़काव करना होगा।
छिड़काव के करीब आधे घंटे बाद गेहूं बीज का छिड़काव करना होगा। पानी लगने से नरम हुई जमीन में बीज आसानी से अपनी जगह बना लेगा। जिससे किसान को दोगुना मुनाफा होगा। उन्होंने बताया कि खेत में खड़े नरमे के पौधों पर लगे टिंडों को तोड़कर किसान घर पर रख लेता है। सुखाने के बाद उससे कॉटन निकालता है।
इस विधि में उसे एक क्विंटल टिंडों में से मुश्किल से सात किलो कॉटन मिलती है जबकि उपरोक्त तकनीक के बल पर किसान को एक क्विंटल टिंडों में से 25 किलो कॉटन मिलेगी। भादू के अनुसार किसानों को 20 नवंबर तक गेहूं का बीज और डीएपी उपलब्ध करवा दिया जाएगा ताकि समय पर बिजाई हो सके।