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बोतल में बंद हो गया मनरेगा का जिन्न

Tue, 24 Sep 2013 12:47 AM IST
अंबाला
अंबाला Updated Tue, 24 Sep 2013 12:47 AM IST
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The genie of NREGA closed in the bottle
हरियाणा के जिले अंबाला में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी में हुए करोड़ों रुपये के गोलमाल मामले में विजिलेंस रिपोर्ट अरसे से फाइल में ही दफन है।
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अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वन विभाग भी इस बात का इंतजार कर रहा है कि जब मुख्य सचिव व सरकार की ओर से कोई निर्देश आएंगे तो वे आगे की कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि ‘अमर उजाला’ ने इस मुदद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
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यह था मामला
जिले में मनरेगा के तहत 2006-07 से 2008-09 तक जो राशि जिले में खर्च की गई। वह पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर की गई। नियमानुसार 50 फीसदी कार्य ग्राम पंचायतों और 50 फीसदी कार्य सरकारी विभागों एवं अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से करवाया जाना था।
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लेकिन नियमों को ताक पर रखकर रिलीज की गई, कुल 30 करोड़ की राशि में से तकरीबन 25 करोड़ का माल वन विभाग के माध्यम से ही करवा दिया गया था। पूर्व एडीसी संजीव वर्मा व वजीर सिंह गोयत ने इस मामले में अलग-अलग जांच की और सनसनीखेज खुलासों को उजागर किया।

दोनों की जांच में ये बात सामने आई कि इस परियोजना के तहत जो काम मजदूरों से करवाने का दावा जिला वन विभाग ने किया, इसमें अधिकतर जगह पाया गया कि वहां तो वे साइट ही मौजूद नहीं है, जहां विभाग ने काम करवाया गया दिखाया गया।

दूसरा, जिन मजदूरों से काम करवाया व दिखाया गया, वे मजदूर ही नहीं है और फर्जी मजदूरों को कागजों में ही मजदूरी बांट दी गई। तीसरा, जब जिला वन विभाग से सारे कामों की रिपोर्ट मांगी गई, तो जिला वन विभाग ने कहा कि अब कामों की रिपोर्ट उपलब्ध करवाना संभव नहीं है।

 ये रिपोर्ट हरियाणा सरकार के का माध्यम से केंद्र सरकार को भेज दी गई। उसके बाद बाकायदा केंद्र सरकार की एक टीम ने अंबाला आकर इस मामले की जांच कर चुकी है।

 जिसके बाद इस मामले को एक बार ओर जांच के लिए विजिलेंस अंबाला को सौंपा गया है।

कई अधिकारी, कर्मचारी जांच के घेरे में
अंबाला विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट करीब डेढ़ साल में तैयार की। उसके बाद इस रिपोर्ट को आगे विजिलेंस हेडक्वार्टर भेज दिया गया। वहां भी कई महीनों तक ये रिपोर्ट इसलिए पड़ी रही कि आला अफसर इस रिपोर्ट अपना ‘मंथन’ करेंगे और फिर ‘टिप्पणी’ करेंगे।


अब महीनों बाद विजिलेंस ने ये रिपोर्ट टिप्पणी के साथ मुख्य सचिव को भेज दी है और वहां भी काफी समय से विजिलेंस की ये रिपोर्ट फाइलों में ही दफन है। सूत्रों के अनुसार इस गड़बड़झाले में तीन आईएएस अफसरों समेत सौ कर्मचारियों की संलिप्तता बताई गई है।  लेकिन अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
 
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