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स्कूल में खुले रोशनदानों से ठिठुर रहे मासूम
भिवानी/ब्यूरो
Updated Sun, 22 Dec 2013 10:59 PM IST
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घना कोहरा, हड्डियां कंपकंपा देने वाला लगातार गिरता पारा और सर्द हवाएं।
ऐसे मौसम में जहां अधिकारी हीटर लगाकर कमरे में दुबके रहते हैं, वहीं सरकारी स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले मासूम बच्चे नीचे फटी हुई दरी पर बैठकर ठंड में पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसा एक नहीं, जिले के दर्जनों स्कूलों में हो रहा है, जिसकी किसी को परवाह नहीं है। ऊपर से स्कूल के कमरों के दरवाजे, खिड़कियां और रोशनदान तक टूटे पड़े हैं, जिनसे सर्द हवाएं अंदर आ रही हैं। स्कूल संचालक इन खुले रोशनदानों को ढकने तक की जहमत नहीं उठा रहे। अभी मासूम बच्चों को छुट्टियां पड़ने तक इस कुदरत और प्रशासनिक लापरवाही के इस ‘कहर’ को झेलना पड़ेगा।
कम से कम टूटी खिड़कियां तो ठीक करवा दो
भिवानी सुधार एवं विकास समिति के अध्यक्ष एडवोकेट पवन अंचल, हरीश कुमार और विजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से घना कोहरा और एकाएक बढ़ी ठंड बच्चों को स्कूल में ठिठुरा रही है। बच्चे सर्दी में बीमार न हो जाएं इसका डर बना रहता है। स्कूलों में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए किसी प्रकार के प्रबंध भी नहीं हैं, जिस वजह से वे बीमार पड़ रहे हैं। कम से कम टूटे पड़े रोशनदानों और खिड़कियों को तो ठीक करवाया ही जा सकता है। बैठने को बेंच उपलब्ध करवाए जाने चाहिए थे।
स्कूलों के समय में फेरबदल हो : दिलबाग
हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ संबंध हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलबाग सिंह अहलावत और प्रदेश प्रवक्ता जयवीर नाफरिया ने बताया कि एकाएक ठंड बढ़ गई है। बच्चों को ठंड से बचाना जरूरी है। इसके लिए स्कूलों की छुट्टी करने की बजाय स्कूल समय में फेरबदल किया जा सकता है। स्कूलों में टूटे खिड़की जंगलों की मरम्मत कराने के अलावा बिजली का प्रबंध भी किया जाए।
फिलहाल ठंड इतनी ज्यादा नहीं है कि स्कूलों में बच्चों पर इसका ज्यादा असर हो। स्कूलों में टूटी खिड़की और रोशनदानों की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई होगी।
- निर्मल श्योराण, डीईओ, भिवानी
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ऐसे मौसम में जहां अधिकारी हीटर लगाकर कमरे में दुबके रहते हैं, वहीं सरकारी स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले मासूम बच्चे नीचे फटी हुई दरी पर बैठकर ठंड में पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसा एक नहीं, जिले के दर्जनों स्कूलों में हो रहा है, जिसकी किसी को परवाह नहीं है। ऊपर से स्कूल के कमरों के दरवाजे, खिड़कियां और रोशनदान तक टूटे पड़े हैं, जिनसे सर्द हवाएं अंदर आ रही हैं। स्कूल संचालक इन खुले रोशनदानों को ढकने तक की जहमत नहीं उठा रहे। अभी मासूम बच्चों को छुट्टियां पड़ने तक इस कुदरत और प्रशासनिक लापरवाही के इस ‘कहर’ को झेलना पड़ेगा।
कम से कम टूटी खिड़कियां तो ठीक करवा दो
भिवानी सुधार एवं विकास समिति के अध्यक्ष एडवोकेट पवन अंचल, हरीश कुमार और विजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से घना कोहरा और एकाएक बढ़ी ठंड बच्चों को स्कूल में ठिठुरा रही है। बच्चे सर्दी में बीमार न हो जाएं इसका डर बना रहता है। स्कूलों में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए किसी प्रकार के प्रबंध भी नहीं हैं, जिस वजह से वे बीमार पड़ रहे हैं। कम से कम टूटे पड़े रोशनदानों और खिड़कियों को तो ठीक करवाया ही जा सकता है। बैठने को बेंच उपलब्ध करवाए जाने चाहिए थे।
स्कूलों के समय में फेरबदल हो : दिलबाग
हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ संबंध हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलबाग सिंह अहलावत और प्रदेश प्रवक्ता जयवीर नाफरिया ने बताया कि एकाएक ठंड बढ़ गई है। बच्चों को ठंड से बचाना जरूरी है। इसके लिए स्कूलों की छुट्टी करने की बजाय स्कूल समय में फेरबदल किया जा सकता है। स्कूलों में टूटे खिड़की जंगलों की मरम्मत कराने के अलावा बिजली का प्रबंध भी किया जाए।
फिलहाल ठंड इतनी ज्यादा नहीं है कि स्कूलों में बच्चों पर इसका ज्यादा असर हो। स्कूलों में टूटी खिड़की और रोशनदानों की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई होगी।
- निर्मल श्योराण, डीईओ, भिवानी