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सख्ती के बावजूद नहीं रुक रहा अवैध खनन
डबवाली/सिरसा/ब्यूरो
Updated Tue, 08 Oct 2013 09:57 PM IST
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हरियाणा के जिला सिरसा के डबवाली के गांव जोगेवाला में नकेल कसे जाने के बाद खनन माफिया ने अब गांव मौजगढ़ में डेरा डाल लिया है।
नहरों से सटे गांव मौजगढ़ के लंबी रोड पर जेसीबी मशीनों की सहायता से जमीन के नीचे से रेत (बरेती) निकाली जा रही है। घटिया स्तर की यह रेत खंड डबवाली सहित ऐलनाबाद क्षेत्र में बन रहे सरकारी गोदामों में पहुंचाई जा रही है।
डमी ग्राहक ने खोला राज
गांव मौजगढ़ में रेत (बरेती) निकाले जाने की सूचना पाकर डमी रेत ग्राहक (संवाददाता) बनकर पहुंचा। दो जेसीबी की सहायता से करीब 35 फुट गहरे खड्डे से अंधाधुंध रेत निकाली जा रही थी।
रेत को ले जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली मौजूद थे। रेत निकालने वालों की ओर से तय किया जाता है कि साधारण ट्रैक्टर-ट्राली का भाव 2500 रुपये प्रति ट्राली है, जबकि उससे बड़ी ट्रैक्टर-ट्राली का भाव 3500 रुपये है।
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डबवाली तक रेत की पहुंच करनी है तो भाव प्रति क्विंटल के अनुसार लगेगा। खनन माफिया से जुड़े लोगों ने बताया कि उनका ठेकेदार सूबाखेड़ा से है, जबकि मशीनरी का खर्च रामसरा (पंजाब) से जुड़ा एक व्यक्ति उठा रहा है।
दोनों में पार्टनरशिप है। वे जोगेवाला सहित सिरसा के डिंग में खनन कार्य कर चुके हैं। यहीं नहीं, गांव मौजगढ़ में दो गड्ढों से रेत निकाली जा चुकी है।
गोदामों में जा रही रेत
खनन माफिया ने ग्राहक को बताया कि उनकी रेत सरकारी गोदामों में प्रयोग हो रही है। लखुआना और ऐलनाबाद में बन रहे गोदामों में बड़े पैमाने पर रेत पहुंचाई जा रही है।
गांव मौजगढ़ नहरों से सटा हुआ है। उपरोक्त स्थान (खड्डे) पर पहुंचने के लिए सड़क से करीब आठ किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। जोकि इतना आसान नहीं है।
नहरी की पटरी के सहारे लंबी रोड पर पहुंचने के लिए कच्चा मार्ग है, जिसके चलते किसी को भनक तक नहीं लगती।
खनन माफिया गांव मौजगढ़ में जिस जगह पर माइनिंग कर रहा है, वह एक गांव के चौकीदार की बताई जाती है, जबकि चौकीदार पर ही गांव में होने वाले गलत कार्य की जानकारी देने का दायित्व होता है।
पौने पांच फुट तक हो सकती है खुदाई
उपमंडलाधीश सतीश ने बताया कि खेत में से पौने पांच फुट तक मिट्टी उठाई जा सकती है। खनन के लिए केंद्र सरकार का पर्यावरण विभाग इसे क्लीयरेंस देता है।
विभाग ही जमीन के नीचे रेत के घटिया या बढ़िया होने का सर्टिफिकेट देता है। यह प्रक्रिया सरल नहीं होती। बिना क्लीयरेंस के खनन करना गैर कानूनी है। अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मेरी जानकारी में नहीं मामला
थाना सदर प्रभारी रवि खुंडिया ने बताया कि यह सारा मामला मेरी जानकारी में नहीं था। इस बारे में आज ही मालूम पड़ा है। मौका का मुआयना करके कार्रवाई की जाएगी।
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नहरों से सटे गांव मौजगढ़ के लंबी रोड पर जेसीबी मशीनों की सहायता से जमीन के नीचे से रेत (बरेती) निकाली जा रही है। घटिया स्तर की यह रेत खंड डबवाली सहित ऐलनाबाद क्षेत्र में बन रहे सरकारी गोदामों में पहुंचाई जा रही है।
डमी ग्राहक ने खोला राज
गांव मौजगढ़ में रेत (बरेती) निकाले जाने की सूचना पाकर डमी रेत ग्राहक (संवाददाता) बनकर पहुंचा। दो जेसीबी की सहायता से करीब 35 फुट गहरे खड्डे से अंधाधुंध रेत निकाली जा रही थी।
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रेत को ले जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली मौजूद थे। रेत निकालने वालों की ओर से तय किया जाता है कि साधारण ट्रैक्टर-ट्राली का भाव 2500 रुपये प्रति ट्राली है, जबकि उससे बड़ी ट्रैक्टर-ट्राली का भाव 3500 रुपये है।
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डबवाली तक रेत की पहुंच करनी है तो भाव प्रति क्विंटल के अनुसार लगेगा। खनन माफिया से जुड़े लोगों ने बताया कि उनका ठेकेदार सूबाखेड़ा से है, जबकि मशीनरी का खर्च रामसरा (पंजाब) से जुड़ा एक व्यक्ति उठा रहा है।
दोनों में पार्टनरशिप है। वे जोगेवाला सहित सिरसा के डिंग में खनन कार्य कर चुके हैं। यहीं नहीं, गांव मौजगढ़ में दो गड्ढों से रेत निकाली जा चुकी है।
गोदामों में जा रही रेत
खनन माफिया ने ग्राहक को बताया कि उनकी रेत सरकारी गोदामों में प्रयोग हो रही है। लखुआना और ऐलनाबाद में बन रहे गोदामों में बड़े पैमाने पर रेत पहुंचाई जा रही है।
गांव मौजगढ़ नहरों से सटा हुआ है। उपरोक्त स्थान (खड्डे) पर पहुंचने के लिए सड़क से करीब आठ किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। जोकि इतना आसान नहीं है।
नहरी की पटरी के सहारे लंबी रोड पर पहुंचने के लिए कच्चा मार्ग है, जिसके चलते किसी को भनक तक नहीं लगती।
खनन माफिया गांव मौजगढ़ में जिस जगह पर माइनिंग कर रहा है, वह एक गांव के चौकीदार की बताई जाती है, जबकि चौकीदार पर ही गांव में होने वाले गलत कार्य की जानकारी देने का दायित्व होता है।
पौने पांच फुट तक हो सकती है खुदाई
उपमंडलाधीश सतीश ने बताया कि खेत में से पौने पांच फुट तक मिट्टी उठाई जा सकती है। खनन के लिए केंद्र सरकार का पर्यावरण विभाग इसे क्लीयरेंस देता है।
विभाग ही जमीन के नीचे रेत के घटिया या बढ़िया होने का सर्टिफिकेट देता है। यह प्रक्रिया सरल नहीं होती। बिना क्लीयरेंस के खनन करना गैर कानूनी है। अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मेरी जानकारी में नहीं मामला
थाना सदर प्रभारी रवि खुंडिया ने बताया कि यह सारा मामला मेरी जानकारी में नहीं था। इस बारे में आज ही मालूम पड़ा है। मौका का मुआयना करके कार्रवाई की जाएगी।