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शहीद की राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि
चरखी दादरी
Updated Sun, 08 Sep 2013 01:18 AM IST
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बीएसएफ के 48 वर्षीय सहायक उपनिरीक्षक शहीद सुरेंद्र सिंह गत 5 सितंबर को असम में एक आपसी मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए।
शहीद सुरेंद्र की शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव हिंडोल में अंत्येष्टि की गई।
सहकारिता मंत्री सतपाल सांगवान ने चरखीदादरी में शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
गांव छिल्लर निवासी पिता प्रकाश यादव व माता लीलावती के पुत्र सुरेंद्र 28 वर्ष पूर्व बीएसएफ में भर्ती हुए तथा मौजूदा समय में असम में कार्यरत थे।
5 सितंबर को ड्यूटी के दौरान जवानों के आपसी झगड़े में बीच- बचाव करते समय उन्हें गोली लगने के कारण मौके पर ही उनका देहांत हो गया। शनिवार सुबह उनके शव को उनके पैतृक गांव हिंडोल लाया गया।
जहां राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। अंतिम संस्कार के दौरान राज्य सरकार की तरफ से सहकारिता एवं आवास मंत्री सतपाल सांगवान व प्रशासन की तरफ से बौंद के नायब तहसीलदार सुरेंद्र साहरवन ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
वह पीछे पत्नी ज्ञानवती, एक बेटी व एक पुत्र के अलावा भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। शव को उनके बेटे दिनेश कुमार ने मुखागिभन दी।
उनके अंतिम संस्कार में राजदीप फौगाट, सरपंच नत्थू सिंह परमार, पूर्व सरपंच धर्मबीर यादव, ज्ञानचंद, मंतीजत फौगाट, प्रवीन शर्मा, ऋषिपाल यादव इत्यादि समेत आसपास के गांवों से आए अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
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शहीद सुरेंद्र की शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव हिंडोल में अंत्येष्टि की गई।
सहकारिता मंत्री सतपाल सांगवान ने चरखीदादरी में शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
गांव छिल्लर निवासी पिता प्रकाश यादव व माता लीलावती के पुत्र सुरेंद्र 28 वर्ष पूर्व बीएसएफ में भर्ती हुए तथा मौजूदा समय में असम में कार्यरत थे।
5 सितंबर को ड्यूटी के दौरान जवानों के आपसी झगड़े में बीच- बचाव करते समय उन्हें गोली लगने के कारण मौके पर ही उनका देहांत हो गया। शनिवार सुबह उनके शव को उनके पैतृक गांव हिंडोल लाया गया।
जहां राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। अंतिम संस्कार के दौरान राज्य सरकार की तरफ से सहकारिता एवं आवास मंत्री सतपाल सांगवान व प्रशासन की तरफ से बौंद के नायब तहसीलदार सुरेंद्र साहरवन ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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वह पीछे पत्नी ज्ञानवती, एक बेटी व एक पुत्र के अलावा भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। शव को उनके बेटे दिनेश कुमार ने मुखागिभन दी।
उनके अंतिम संस्कार में राजदीप फौगाट, सरपंच नत्थू सिंह परमार, पूर्व सरपंच धर्मबीर यादव, ज्ञानचंद, मंतीजत फौगाट, प्रवीन शर्मा, ऋषिपाल यादव इत्यादि समेत आसपास के गांवों से आए अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
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