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Sonipat News: यमुना का जलस्तर हो रहा कम, चिंता बरकरार
Tue, 25 Jul 2023 01:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 25 Jul 2023 01:24 AM IST
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सरढाना माइनर में पानी छोडऩे व सफाई की मांग को लेकर सिंचाई विभाग में ज्ञापन देने पहुंचे किसान।
सोनीपत/गन्नौर। यमुना का जलस्तर कम होने लगा है। इससे किसानों और आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, मगर अभी भी उनकी चिंता बरकरार है। सोमवार को यमुना का जलस्तर 214.9 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 217 से 2.1 मीटर कम है। हालांकि यमुना के पानी का बहाव तेज होने के कारण आसपास की भूमि का कटाव हो रहा है। प्रशासन ने किसानों को यमुना के पास नहीं जाने की सलाह दी है।
हथिनी कुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ गया था। इससे पहले ही आसपास के गांवों के खेत में पानी भरा होने से उनकी चिंता फिर से बढ़ गई थी। रविवार को यमुना का जलस्तर बढ़कर 215.2 मीटर पर पहुंच गया था। यमुना में करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। इससे किसानों को डेढ़ सप्ताह पहले हुई तबाही का मंजर फिर से नजर आने लगा था। उन्हें चिंता सता रही थी कि कहीं फिर से पानी तटबंध को तोड़कर उनके गांव की तरफ न आ जाए। हालांकि यमुना में ढाई लाख क्यूसेक पानी ही छोड़ गया था। वह आसानी से दिल्ली तरफ निकल रहा है। जिससे यमुना की तलहटी के लोगों को काफी राहत मिली है।
24 घंटे में पानी उतरने की उम्मीद
अधिकारियों का कहना है कि जिस गति से पानी कम हो रहा है, उससे उम्मीद है कि यमुना का जलस्तर 24 घंटे में पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा। पानी लगातार कम हो रहा है। अब आगे फिर से पानी का स्तर बारिश पर निर्भर रहेगा। यदि बारिश तेज हुई तो फिर से पानी छोड़ा जा सकता है। प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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जलस्तर कम होने पर हो सकेगा कटाव का आकलन
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अभिषेक कौशिक ने बताया कि यमुना क्षेत्र में भूमि कटाव होने का आकलन जल स्तर और कम होने पर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अब लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यमुना की तरफ जाने से बचना चाहिए। भूमि कटाव की वजह से कोई भी बड़ा हादसा न हो सके इसके लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी यमुना के तटबंधों व घाटों पर पूरी तरह मुस्तैद है।
सरढाना माइनर में पानी नहीं छोड़ने पर बिफरे किसान
किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। किसानों का आरोप है कि पहले प्रकृति का प्रकोप हुआ तो अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी किसानों पर भारी पड़ रही है। गांव सरढ़ाना माइनर के जुड़े गांवों के किसानों का आरोप है कि सरकार ने नहरों का निर्माण कराया है जिससे किसान फसलों की सिंचाई कर सकें। लेकिन कुछ अधिकारी किसानों की अनदेखी कर रहे हैं। सरढ़ाना माइनर पर कई गांवों की खेती निर्भर रहती है। बारिश के मौसम से पहले माइनर की सफाई व मरम्मत कर सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है, लेकिन लंबे समय से न तो माइनर की सफाई हुई ओर न ही माइनर में पानी छोड़ा गया। इस वजह से कई गांव की खेती प्रभावित हो रही है। पानी न छोड़े जाने को लेकर किसानों ने कई बार विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। किसान नेता वीरेंद्र पहल के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने सिंचाई विभाग के कार्यालय में पहुंचकर रोष जताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह विभाग के कार्यालय पर ताला जड़कर सड़क जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे।
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हथिनी कुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ गया था। इससे पहले ही आसपास के गांवों के खेत में पानी भरा होने से उनकी चिंता फिर से बढ़ गई थी। रविवार को यमुना का जलस्तर बढ़कर 215.2 मीटर पर पहुंच गया था। यमुना में करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। इससे किसानों को डेढ़ सप्ताह पहले हुई तबाही का मंजर फिर से नजर आने लगा था। उन्हें चिंता सता रही थी कि कहीं फिर से पानी तटबंध को तोड़कर उनके गांव की तरफ न आ जाए। हालांकि यमुना में ढाई लाख क्यूसेक पानी ही छोड़ गया था। वह आसानी से दिल्ली तरफ निकल रहा है। जिससे यमुना की तलहटी के लोगों को काफी राहत मिली है।
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24 घंटे में पानी उतरने की उम्मीद
अधिकारियों का कहना है कि जिस गति से पानी कम हो रहा है, उससे उम्मीद है कि यमुना का जलस्तर 24 घंटे में पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा। पानी लगातार कम हो रहा है। अब आगे फिर से पानी का स्तर बारिश पर निर्भर रहेगा। यदि बारिश तेज हुई तो फिर से पानी छोड़ा जा सकता है। प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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जलस्तर कम होने पर हो सकेगा कटाव का आकलन
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अभिषेक कौशिक ने बताया कि यमुना क्षेत्र में भूमि कटाव होने का आकलन जल स्तर और कम होने पर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अब लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यमुना की तरफ जाने से बचना चाहिए। भूमि कटाव की वजह से कोई भी बड़ा हादसा न हो सके इसके लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी यमुना के तटबंधों व घाटों पर पूरी तरह मुस्तैद है।
सरढाना माइनर में पानी नहीं छोड़ने पर बिफरे किसान
किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। किसानों का आरोप है कि पहले प्रकृति का प्रकोप हुआ तो अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी किसानों पर भारी पड़ रही है। गांव सरढ़ाना माइनर के जुड़े गांवों के किसानों का आरोप है कि सरकार ने नहरों का निर्माण कराया है जिससे किसान फसलों की सिंचाई कर सकें। लेकिन कुछ अधिकारी किसानों की अनदेखी कर रहे हैं। सरढ़ाना माइनर पर कई गांवों की खेती निर्भर रहती है। बारिश के मौसम से पहले माइनर की सफाई व मरम्मत कर सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है, लेकिन लंबे समय से न तो माइनर की सफाई हुई ओर न ही माइनर में पानी छोड़ा गया। इस वजह से कई गांव की खेती प्रभावित हो रही है। पानी न छोड़े जाने को लेकर किसानों ने कई बार विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। किसान नेता वीरेंद्र पहल के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने सिंचाई विभाग के कार्यालय में पहुंचकर रोष जताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह विभाग के कार्यालय पर ताला जड़कर सड़क जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे।