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लौकिक पर्वों का साथ मनोरंजन संग होता है : निराले बाबा
Mon, 02 Sep 2024 05:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 02 Sep 2024 05:06 AM IST
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फोटो 25- सोनीपत के सेक्टर-15 में पर्यूषण महापर्व के दौरान प्रवचन करते राष्ट्रसंत जैनाचार्य डॉ.
सोनीपत। समन्वय मिशन के संस्थापक एवं पंजाब मालवा केसरी राष्ट्रसंत जैनाचार्य डॉ. आचार्य दिव्यानंद सूरीश्वर महाराज (निराले बाबा) ने कहा कि पर्वों को दो भागों में बांटा गया है। कुछ पर्व लौकिक तो कई लोकोत्तर कहलाते हैं। लौकिक पर्वों का साथ शरीर व मनोरंजन के साथ होता है। ऐसे पर्वों पर नए वस्त्र पहनना, पकवान खाना, मौज-मस्ती को बढ़ाने की परंपरा है, जबकि लोकोतर पर्व में आत्म साधना, भगवान की आराधना, भक्ति व तपस्या शामिल है।
सूरीश्वर महाराज, दिव्यानंद निराले बाबा चातुर्मास समिति की ओर से सेक्टर-15 में आयोजित पर्यूषण महापर्व के दूसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में लौकिक पर्वों का इतना महत्व नहीं, जितना लोकोत्तर पर्व का है। उसी आत्म साधना का पर्व अष्ट दिवसीय पर्यूषण महापर्व कहलाता है।
इसका अर्थ है, चारों ओर से ध्यान हटाकर स्वयं को भगवान के प्रति समर्पित करके आत्म साधना में लीन हो जाना। ऐसी परंपरा देखने को नहीं मिलती, जहां दूसरे से क्षमा याचना करना या क्षमा प्रदान करने को भी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व के प्रथम सात दिन साधक तपस्या कर स्वयं को पवित्र करते हैं। अंतिम दिन अपनी उज्ज्वलता का प्रमाण देते हैं।
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जगमोहन जैन के 24 घंटे में दो समय सिर्फ पानी पीकर उपवास किया गया। विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष पवन गर्ग के एक भोजन कर एकासना व्रत रखने पर सेक्टर-15 एसएस जैन सभा के मंत्री भूषण जैन ने उनका अभिनंदन किया। समिति के मंत्री मुकेश सिंगला ने बताया कि 3 सितंबर को प्रवचन स्थल से दोपहर 2 बजे कल्पसूत्र ग्रंथ की शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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सूरीश्वर महाराज, दिव्यानंद निराले बाबा चातुर्मास समिति की ओर से सेक्टर-15 में आयोजित पर्यूषण महापर्व के दूसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में लौकिक पर्वों का इतना महत्व नहीं, जितना लोकोत्तर पर्व का है। उसी आत्म साधना का पर्व अष्ट दिवसीय पर्यूषण महापर्व कहलाता है।
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इसका अर्थ है, चारों ओर से ध्यान हटाकर स्वयं को भगवान के प्रति समर्पित करके आत्म साधना में लीन हो जाना। ऐसी परंपरा देखने को नहीं मिलती, जहां दूसरे से क्षमा याचना करना या क्षमा प्रदान करने को भी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व के प्रथम सात दिन साधक तपस्या कर स्वयं को पवित्र करते हैं। अंतिम दिन अपनी उज्ज्वलता का प्रमाण देते हैं।
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जगमोहन जैन के 24 घंटे में दो समय सिर्फ पानी पीकर उपवास किया गया। विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष पवन गर्ग के एक भोजन कर एकासना व्रत रखने पर सेक्टर-15 एसएस जैन सभा के मंत्री भूषण जैन ने उनका अभिनंदन किया। समिति के मंत्री मुकेश सिंगला ने बताया कि 3 सितंबर को प्रवचन स्थल से दोपहर 2 बजे कल्पसूत्र ग्रंथ की शोभायात्रा निकाली जाएगी।