जंतर-मंतर : दिल्ली में आज महिलाएं चलाएंगी किसान संसद, अविश्वास प्रस्ताव होगा पारित
- किसान नेताओं ने कहा गुरनाम सिंह चढूनी उनके अहम नेता, जल्द ही दूर करेंगे नाराजगी
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जंतर-मंतर पर आज महिला किसान संसद का आयोजन किया जाएगा। किसान संसद के अंतिम दिन कॉरपोरेट भारत छोड़ों का नारा देते हुए महिला किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। आज की संसद में भाग लेने के लिए दिल्ली और आसपास के इलाकों की महिलाएं जंतर-मंतर पहुंचेंगी।
सोनीपत से खबर है कि संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किसान संसद में महिलाएं भाग लेंगी। किसान संसद के अंतिम दिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उसके साथ ही अब संयुक्त किसान मोर्चा 15 अगस्त के कार्यक्रमों की तैयारियों में जुट जाएगा। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया कि गुरनाम सिंह चढूनी मोर्चा के लिए अहम नेता हैं। उनकी नाराजगी को जल्द दूर किया जाएगा।
कुंडली बॉर्डर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में रविवार देर शाम संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि संसद के समानांतर किसान संसद चलाई जा रही है। इसमें 78 घंटे किसानों की संसद ने काम किया। उसमें नए कृषि कानून, दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन में पराली के प्रभाव, विद्युत संशोधन विधेयक, डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बहस और चर्चा हुई।
किसान मोर्चा ने विपक्ष को चेतावनी पत्र जारी किया था। उसका नतीजा यह रहा कि विपक्ष ने संसद में जोरदार विरोध किया और कृषि कानूनों के खिलाफ प्रभावशाली तरीके से आवाज उठाई। कई बार संसद चलने नहीं दी।
किसान संसद का सोमवार को आखिरी दिन है और इसे महिलाएं चलाएगी। अंतिम दिन किसान संसद में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किया जाएगा। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा पीएम से इस्तीफे की मांग की जाएगी।
किसान मजदूर आजादी संग्राम दिवस के रूप में मनेगा 15 अगस्त
कामरेड इंद्रजीत ने बताया कि 15 अगस्त का दिन किसान मजदूर आजादी संग्राम दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन जिला व तहसील पर सभी किसान अपने ट्रैक्टर और वाहनों पर तिरंगा व संगठन का झंडा लगाकर जुलूस निकालकर आजादी दिवस मनाएंगे। 15 अगस्त को आयोजित सरकारी कार्यक्रमों का संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से विरोध नहीं किया जाएगा।
गुरनाम सिंह चढूनी को जल्द साथ ले आएंगे
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बूटा सिंह ने गुरनाम सिंह चढूनी द्वारा मोर्चे की बैठकों का बहिष्कार करने को लेकर कहा कि मोर्चे में कोई भी नई जत्थेबंदी आती है हम उसकी जांच पड़ताल करके संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल करेंगे। 26 जनवरी को हमारे साथ बहुत बड़ा धोखा हो चुका है। गुरनाम सिंह चढूनी जिन जत्थेबंदियों की बात कर रहे हैं, वह हमारी जानकारी में नहीं थी।
चढूनी के साथ हमारी 5 सदस्यीय कमेटी बात करेगी। हमारा आपसी मामला है इस को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। गुरनाम सिंह चढूनी ने संयुक्त मोर्चे से यह पूछा था कि इन जत्थेबंदियों को संयुक्त मोर्चा में शामिल क्यों नहीं किया जा रहा। हमने कहा था कि किसान संगठनों जांच पड़ताल करके मोर्चे में शामिल किया जाएगा। इन्हीं बातों से नाराज होकर किसान मोर्चा से अलग हो गए गुरनाम सिंह से बातचीत के लिए जो कमेटी बनाई है। वह मोर्चे के लिए अहम है। उनको जल्द साथ लेकर आएंगे।
‘मोदी गद्दी छोड़ो’ अभियान का संचालन करेंगी महिलाएं
कृषि कानूनों की वापसी व न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून की मांग को लेकर पलवल के अटोहां चौक पर चल रहे किसानों के धरने में रविवार को निर्णय लिया गया कि नौ अगस्त को पलवल से जंतर-मंतर पर काफी संख्या में महिलाएं व पुरुष हिस्सा लेने जाएंगे। रविवार को धरने की अध्यक्षता 52 पाल के चौधरी अरुण जेलदार ने की। संचालन किशन चंद बंचारी ने किया। इस अवसर पर सौरोत पाल के किसानों ने धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन किया। किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसान नेता रतन सिंह सौरोत ने कहा कि दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर चल रही किसान संसद में महिलाएं किसान 9 अगस्त को मोदी गद्दी छोड़ो अभियान की शुरुआत करेंगी। इस अभियान में पलवल जिले से भी महिला और पुरूष किसान शामिल होंगे। आंदोलन में शामिल हुए किसानों ने कहा कि सरकार को तीनों कृषि कानून वापिस लेने होंगे। एमएसपी गारंटी बिल पास करना होगा।
किसानों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार किसानों की मांगों को मान नहीं लेती है। किसान आंदोलन को चलते-चलते 8 माह से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन सरकार किसानों की सुनने को तयार नहीं है। किसान अलग-अलग तरीकों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी बात रख रहे हैं। सरकार द्वारा किसानों की बातें नहीं मानने के कारण देश के किसानों में सरकार के खिलाफ काफी रोष है। आंदोलन को और तेज करने के लिए किसान अलग-अलग रणनीति में जुटे रहते हैं। किसान आंदोलन में लगातार महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि इलाके की महिलाएं एकजुट होकर किसानों के साथ रहेंगी और उनके आंदोलन में हर तरीके से सहयोग करेंगी। धरने को सिकंदर, जगदीश नांगल जाट, सुखराम, गोबिंदराम खिरबी, अच्छेलाल जोधपुर, इंद्रसिंह सहरावत, रणजीत चौहान मीतरौल, चंदन सिंह डराना, ब्रजलाल मीतरौल, सुभाष गढ़ी, बीर सिंह मीतरौल, हुकम सिंह ने संबोधित किया।