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Sonipat News: स्टेट हाईवे पर जलभराव से त्योहारी सीजन में बाजारों से रौनक गायब
Wed, 14 Oct 2026 02:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:28 AM IST
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सोनीपत के कच्चे क्वार्टर बाजार के पास पार्किंग की कमी के साथ खरीदारी करने वालों की भीड़।
सोनीपत। त्योहारी सीजन में जहां बाजारों में रौनक होनी चाहिए वहीं बीसवां मील-बहादुरगढ़ स्टेट हाईवे पर जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। गांव बढ़मलिक से जठेड़ी तक सड़क पर दूषित पानी जमा है और कई जगह सड़क में गड्ढे बन गए हैं।
निकासी की व्यवस्था नहीं होने से हाईवे फिर तालाब में तब्दील हो गया है। इससे 14 गांवों और आसपास की रिहायशी कॉलोनियों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग खासा जोखिम भरा बना हुआ है।
सड़क पर पानी भरा होने के कारण वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता। इससे फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। पैदल राहगीरों को भी दूषित पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। त्योहारी सीजन में खरीदारी के लिए बाजार जाने वाले लोगों को भी इस मार्ग पर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार विरोध के बाद जनवरी 2018 में करीब 9.5 करोड़ रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में 2.5 करोड़ रुपये और 2021 में गड्ढे भरने के लिए 45 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद जलनिकासी की समस्या दूर नहीं हुई।
नालों के ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पर जमा रहता है और सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। उद्योगों की सप्लाई भी प्रभावित राई औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों को भी इस मार्ग पर जलभराव के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। कच्चे माल की आवाजाही प्रभावित होने से औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई उद्योगों ने इस मार्ग से कच्चा माल मंगवाने और भेजने में दिक्कतों के चलते आवाजाही रोक दी है। बीसवां मील चौक से जठेड़ी तक का यह मार्ग शहीद मेजर सत्यप्रकाश के नाम से भी जाना जाता है।
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निकासी की व्यवस्था नहीं होने से हाईवे फिर तालाब में तब्दील हो गया है। इससे 14 गांवों और आसपास की रिहायशी कॉलोनियों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग खासा जोखिम भरा बना हुआ है।
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सड़क पर पानी भरा होने के कारण वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता। इससे फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। पैदल राहगीरों को भी दूषित पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। त्योहारी सीजन में खरीदारी के लिए बाजार जाने वाले लोगों को भी इस मार्ग पर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार विरोध के बाद जनवरी 2018 में करीब 9.5 करोड़ रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में 2.5 करोड़ रुपये और 2021 में गड्ढे भरने के लिए 45 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद जलनिकासी की समस्या दूर नहीं हुई।
नालों के ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पर जमा रहता है और सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। उद्योगों की सप्लाई भी प्रभावित राई औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों को भी इस मार्ग पर जलभराव के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। कच्चे माल की आवाजाही प्रभावित होने से औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई उद्योगों ने इस मार्ग से कच्चा माल मंगवाने और भेजने में दिक्कतों के चलते आवाजाही रोक दी है। बीसवां मील चौक से जठेड़ी तक का यह मार्ग शहीद मेजर सत्यप्रकाश के नाम से भी जाना जाता है।