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Sonipat News: खेतों की बिगड़ती सेहत सुधारेगी, चलेगा अभियान
Mon, 01 Jun 2026 08:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 01 Jun 2026 08:49 PM IST
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किसानों को प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किया जाएगा जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से प्रभावित हो रही कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक स्तर पर खेत बचाओ अभियान शुरू किया है। इसके तहत कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र संयुक्त रूप से गांव-गांव पहुंचकर किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
जून के दौरान चलाए जाने वाले इस विशेष अभियान में खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को यह बताया जाएगा कि उनकी भूमि में किन पोषक तत्वों की कमी है। उसे किस प्रकार दूर किया जा सकता है।
इसके लिए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की संयुक्त टीमें तैयार की जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे न केवल खेती की लागत बढ़ रही है बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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स्थिति यह है कि भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के लिए हर वर्ष अधिक मात्रा में उर्वरकों की आवश्यकता पड़ रही है। इसी चुनौती से निपटने और कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने खेत बचाओ अभियान शुरू किया है जिसे अब जिले में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
अभियान के दौरान प्राकृतिक खेती को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। कृषि विभाग ऐसे किसानों को आगे लाएगा जो पहले से प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, ताकि उनके अनुभवों से अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल सके।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा से जुड़ी खाद वितरण व्यवस्था
रासायनिक उर्वरकों के नियंत्रित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने खाद वितरण प्रणाली को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से जोड़ दिया है। अब पंजीकृत फसल विवरण के आधार पर ही किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे।
वैज्ञानिकों के साथ तैयार हो रहा जागरूकता कार्यक्रम
कृषि उपनिदेशक पीके गुलिया ने बताया कि खेत बचाओ अभियान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर जागरूकता शिविरों का कार्यक्रम लगभग अंतिम रूप ले चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से प्रभावित हो रही कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक स्तर पर खेत बचाओ अभियान शुरू किया है। इसके तहत कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र संयुक्त रूप से गांव-गांव पहुंचकर किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
जून के दौरान चलाए जाने वाले इस विशेष अभियान में खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को यह बताया जाएगा कि उनकी भूमि में किन पोषक तत्वों की कमी है। उसे किस प्रकार दूर किया जा सकता है।
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इसके लिए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की संयुक्त टीमें तैयार की जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे न केवल खेती की लागत बढ़ रही है बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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स्थिति यह है कि भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के लिए हर वर्ष अधिक मात्रा में उर्वरकों की आवश्यकता पड़ रही है। इसी चुनौती से निपटने और कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने खेत बचाओ अभियान शुरू किया है जिसे अब जिले में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
अभियान के दौरान प्राकृतिक खेती को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। कृषि विभाग ऐसे किसानों को आगे लाएगा जो पहले से प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, ताकि उनके अनुभवों से अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल सके।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा से जुड़ी खाद वितरण व्यवस्था
रासायनिक उर्वरकों के नियंत्रित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने खाद वितरण प्रणाली को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से जोड़ दिया है। अब पंजीकृत फसल विवरण के आधार पर ही किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे।
वैज्ञानिकों के साथ तैयार हो रहा जागरूकता कार्यक्रम
कृषि उपनिदेशक पीके गुलिया ने बताया कि खेत बचाओ अभियान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर जागरूकता शिविरों का कार्यक्रम लगभग अंतिम रूप ले चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।