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30 फीसदी तोड़ गए दम, 1.12 लाख पौधे कम लगाएगा विभाग
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sun, 10 Jul 2016 12:00 AM IST
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पाौधाराोपण
- फोटो : अमर उजाला
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वन विभाग एक साल में अपनी ही उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। 40 प्रतिशत के करीब पौधे देखभाल के अभाव में दम तोड़ गए। हालांकि विभाग इसे 30 प्रतिशत ही मान रहा है। यही वजह है कि इस बार विभाग 1.12 लाख कम पौधे लगाएगा।
पर्यावरण की दृष्टि से वन विभाग की ओर से लाखों रुपये खर्च कर हर वर्ष पौधारोपण अभियान चलाया जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से सफल नहीं हो पाता। पिछले साल विभाग ने 5 लाख 50 हजार पौधे लगाए थे, इनमें से 40 प्रतिशत देखभाल के अभाव में दम तोड़ गए। इस बार विभाग की ओर से 4 लाख 42 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य कम करने के बारे में अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा, लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण, रेलवे लाइन के बिछ रहे जाल और नहरों के चौड़ीकरण के नाम पर घट रहे वन क्षेत्र को इसका जिम्मेदार माना जा रहा है। जिले में वर्तमान में वन विभाग का हरित क्षेत्र 7386 हेक्टेयर है। विभाग की ओर से पौधे रोपने के लिए लक्ष्य भी निर्धारित होते हैं। विभाग द्वारा हर वर्ष करीब 4 से 5 लाख पौधे लगाए जाते हैं। जिसमें से अधिकतर पौधे बिना देखभाल के नष्ट हो जाते हैं। विकास कार्यों की योजनाओं को तैयार करते समय सरकार वन विभाग द्वारा रोपे गए पौधों को ही कटवा रही है।
वन विभाग की 80 हेक्टेअर जमीन चली गई जीटी रोड चौड़ीकरण में
नवंबर-2015 में राई में एक रैली के दौरान जीटी रोड के चौड़ीकरण, केएमपी और केजीपी के निर्माण को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया था। जीटी रोड पर सड़क के चौड़ीकरण में जिले में वन विभाग की 80 हेक्टेयर जमीन चली गई। जहां पर सड़क चौड़ीकरण को लेकर दोनों तरफ लगातार पेड़ काटे जा रहे है। दिल्ली से पानीपत तक यह जीटी रोड आठ लेन का तैयार किया जाना है।
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मानसून में लगाए जाते हैं पौधे, बाद में पानी देना भूल जाता है विभाग
मानसून का सीजन शुरू होते ही विभाग लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पौधारोपण अभियान शुरू कर देता है। इस बार 4 लाख 42 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मानसून सीजन शुरू हो चुका है। विभाग की ओर से पौधे रोपने का काम भी शुरू कर दिया है। पिछले 10 दिनों में विभाग की ओर से अब तक करीब 25 प्रतिशत पौधे रोपे जा चुके हैं। हालांकि मानसून सीजन के बाद विभाग पौधों में पानी डालना भूल जाता है। समय पर पानी न मिलने वजह से पौधे सूखना शुरू कर देते हैं।
सूख जाते हैं 50 प्रतिशत, लेकिन विभाग मानता नहीं
मानसून सीजन में पौधारोपण के बाद पौधे अनदेखी का शिकार हो जाते है। समय पर देखभाल न होने से आधे पौधे सूख जाते है। जिसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। विभाग की अनदेखी के चलते 50 प्रतिशत पौधे सूख जाते है। लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभागीय नियमों के मुताबिक 20 प्रतिशत पौधे ही सूख पाते हैं। जिसके स्थान पर नए पौधे रोपे जाते हैं। ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंच पाए।
विभाग की ओर से हर वर्ष लगभग 4 से 5 लाख पौधे लगाए जाते हैं। विभागीय नॉर्म के अनुसार 20 प्रतिशत पौधे ही सूखते हैं। पौधारोपण के दौरान लुप्त हो रही पुरानी प्रजातियों के पौधे रोपने का इस बार लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पुरानी प्रजातियों में ज्यादातर पौधे छायादार हैं। एक लाख 12 हजार कम पौधे लगाने का टारगेट मुख्यालय से तय किया गया है। उन्हें भी इसके पीछे की वजह नहीं पता है।
-राजेश आर्य, जिला वन अधिकारी, सोनीपत
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पर्यावरण की दृष्टि से वन विभाग की ओर से लाखों रुपये खर्च कर हर वर्ष पौधारोपण अभियान चलाया जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से सफल नहीं हो पाता। पिछले साल विभाग ने 5 लाख 50 हजार पौधे लगाए थे, इनमें से 40 प्रतिशत देखभाल के अभाव में दम तोड़ गए। इस बार विभाग की ओर से 4 लाख 42 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य कम करने के बारे में अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा, लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण, रेलवे लाइन के बिछ रहे जाल और नहरों के चौड़ीकरण के नाम पर घट रहे वन क्षेत्र को इसका जिम्मेदार माना जा रहा है। जिले में वर्तमान में वन विभाग का हरित क्षेत्र 7386 हेक्टेयर है। विभाग की ओर से पौधे रोपने के लिए लक्ष्य भी निर्धारित होते हैं। विभाग द्वारा हर वर्ष करीब 4 से 5 लाख पौधे लगाए जाते हैं। जिसमें से अधिकतर पौधे बिना देखभाल के नष्ट हो जाते हैं। विकास कार्यों की योजनाओं को तैयार करते समय सरकार वन विभाग द्वारा रोपे गए पौधों को ही कटवा रही है।
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वन विभाग की 80 हेक्टेअर जमीन चली गई जीटी रोड चौड़ीकरण में
नवंबर-2015 में राई में एक रैली के दौरान जीटी रोड के चौड़ीकरण, केएमपी और केजीपी के निर्माण को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया था। जीटी रोड पर सड़क के चौड़ीकरण में जिले में वन विभाग की 80 हेक्टेयर जमीन चली गई। जहां पर सड़क चौड़ीकरण को लेकर दोनों तरफ लगातार पेड़ काटे जा रहे है। दिल्ली से पानीपत तक यह जीटी रोड आठ लेन का तैयार किया जाना है।
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मानसून में लगाए जाते हैं पौधे, बाद में पानी देना भूल जाता है विभाग
मानसून का सीजन शुरू होते ही विभाग लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पौधारोपण अभियान शुरू कर देता है। इस बार 4 लाख 42 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मानसून सीजन शुरू हो चुका है। विभाग की ओर से पौधे रोपने का काम भी शुरू कर दिया है। पिछले 10 दिनों में विभाग की ओर से अब तक करीब 25 प्रतिशत पौधे रोपे जा चुके हैं। हालांकि मानसून सीजन के बाद विभाग पौधों में पानी डालना भूल जाता है। समय पर पानी न मिलने वजह से पौधे सूखना शुरू कर देते हैं।
सूख जाते हैं 50 प्रतिशत, लेकिन विभाग मानता नहीं
मानसून सीजन में पौधारोपण के बाद पौधे अनदेखी का शिकार हो जाते है। समय पर देखभाल न होने से आधे पौधे सूख जाते है। जिसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। विभाग की अनदेखी के चलते 50 प्रतिशत पौधे सूख जाते है। लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभागीय नियमों के मुताबिक 20 प्रतिशत पौधे ही सूख पाते हैं। जिसके स्थान पर नए पौधे रोपे जाते हैं। ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंच पाए।
विभाग की ओर से हर वर्ष लगभग 4 से 5 लाख पौधे लगाए जाते हैं। विभागीय नॉर्म के अनुसार 20 प्रतिशत पौधे ही सूखते हैं। पौधारोपण के दौरान लुप्त हो रही पुरानी प्रजातियों के पौधे रोपने का इस बार लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पुरानी प्रजातियों में ज्यादातर पौधे छायादार हैं। एक लाख 12 हजार कम पौधे लगाने का टारगेट मुख्यालय से तय किया गया है। उन्हें भी इसके पीछे की वजह नहीं पता है।
-राजेश आर्य, जिला वन अधिकारी, सोनीपत