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धर्म : पितृ पक्ष में धरती पर होगा पूर्वजों का आगमन, श्राद्ध का विशेष महत्व

Mon, 16 Sep 2024 07:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 16 Sep 2024 07:00 AM IST
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Religion: Ancestors will return to earth during Pitru Paksha, special importance of Shraddha
फोटो 04- श्री देवी चिट्टाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक।
सोनीपत। पितरों की आत्मिक शांति के लिए वर्ष में 15 दिन विशेष माने गए हैं। जिन्हें पितृ पक्ष व श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। यह समय पूर्वजों व पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का समय है, जब पूर्वज धरती पर आते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध करने, तर्पण व पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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श्री देवी चिट्टाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पितरों को प्रसन्न व संतुष्ट करने वाला पर्व माना गया है। पितृ पक्ष भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से प्रारंभ होकर अश्वनी माह की अमावस्या पर समाप्त होंगे। श्राद्ध पक्ष वास्तव में पितरों को याद करने, उनके प्रति श्रद्धा भाव प्रदर्शित करने का समय है। पितरों का श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पूर्णिमा तिथि 17 सितंबर को सुबह 11:44 बजे प्रारंभ होकर 18 सितंबर को सुबह 8:04 बजे तक रहेगी, इसलिए पूर्णिमा का श्राद्ध 17 सितंबर को मनाया जाएगा।
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क्या करें उपाय

पंडित अमित शौनक ने बताया कि श्राद्ध करने का सही समय सुबह 11 बजे के बाद होता है। सुबह स्नानादि के बाद ही पितरों का ध्यान करना चाहिए। सुबह व शाम को देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना व आराधना करनी चाहिए। श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों के निमित ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पूजा, पितृ गायत्री पाठ, पिंड दान, पितृ तर्पण करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में मनुष्य को मास, मदिरा जैसी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
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इन्हें भोजन कराना शुभ फलदायी



श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन के साथ गोमाता, कौआ, कुत्ते व चींटी को भोजन करवाना शुभ फलदायी माना गया है। अगर कोई ब्राह्मण भोज न करवा सके तो गोशाला में गोवंशों को हरा चारा अवश्य डालना चाहिए। इसके अलावा अपनी सुविधा के अनुसार पांडू पिंडारा, हरिद्वार या गयाजी में पिंड दान व पितृ पूजन किया जा सकता है।

पितृ पक्ष (श्राद्ध) की तिथियां



पूर्णिमा - 17 सितंबर मंगलवार

प्रतिपदा - 18 सितंबर बुधवार



द्वितीय - 19 सितंबर वीरवार



तृतीय - 20 सितंबर शुक्रवार



चतुर्थी - 21 सितंबर शनिवार



पंचमी - 22 सितंबर रविवार



छठी व सप्तमी - 23 सितंबर सोमवार

अष्टमी - 24 सितंबर मंगलवार



नवमी - 25 सितंबर बुधवार

दशमी - 26 सितंबर वीरवार

एकादशी - 27 सितंबर शुक्रवार

द्वादशी - 29 सितंबर रविवार

त्रयोदशी - 30 सितंबर सोमवार

चतुर्दशी - 1 अक्तूबर मंगलवार

सर्वपितृ अमावस्या - 2 अक्तूबर बुधवार
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