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रामलीला : अयोध्या में उल्लास के बीच पड़ा विघ्न, वन को चले प्रभु राम
Sun, 28 Sep 2025 07:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 28 Sep 2025 07:20 AM IST
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सोनीपत। कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला सभा व श्री ठाकुरद्वारा पंचायती मंदिर सेवा समिति की ओर से आयोजित रामलीला मंचन का शनिवार को छठा दिन रहा। वृंदावन से आचार्य सौरभ द्विवेदी, टीवी फेम स्वामी शिवदयाल शर्मा, स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा के मार्गदर्शन में कलाकारों ने कैकेयी मंथरा संवाद, राजा दशरथ कैकेयी संवाद, श्रीराम वन गमन, केवट संवाद, दशरथ देह त्याग के प्रसंग की लीला का मंचन किया।
कलाकारों ने दर्शाया कि महाराज दशरथ अपनी बढ़ती आयु को देखकर मंत्री परिषद से विचार-विमर्श करके पुत्र राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा करते हैं जिसे सुनकर अयोध्यावासियों में खुशी की लहर दौड़ जाती है। सभी श्रीराम के राजतिलक की तैयारियों में लग जाते है। इसी बीच मंथरा महारानी कैकेयी को भड़काकर उनके पुत्र भरत के लिए राजगद्दी की मांग के लिए उकसाती है।
मंथरा की बात मान कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं। महाराज दशरथ से दिए दो वचनों को मांगती है। महाराज दशरथ श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास, भरत को राजगद्दी मांग को अस्वीकार कर देते हैं तो श्रीराम पिता के वचनों की लाज रखते हुए वनवास जाने को तैयार हो जाते हैं। यह सुनकर लक्ष्मण, सीता भी उनके साथ वन को रवाना होते हैं। केवट श्रीराम को गंगा पार करवाते हैं। फिर श्रीराम चित्रकूट में वास करते हैं।
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इससे पहले मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल ठक्कर, राजकपूर जैन, पोखरमल नेहरू, नीरज वर्मा ने गणेश वंदना के साथ रामलीला मंचन का शुभारंभ किया। मंच संचालन गजेंद्र मंगला ने किया। कार्यक्रम में महेंद्र मंगला, राजकुमार, महेंद्र वर्मा, प्रवीन गोयल, अमित कुच्छल, वीरेंद्र कटारिया, अनिल जैन, जितेंद्र कटारिया ने अपनी सेवाएं दी।
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कलाकारों ने दर्शाया कि महाराज दशरथ अपनी बढ़ती आयु को देखकर मंत्री परिषद से विचार-विमर्श करके पुत्र राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा करते हैं जिसे सुनकर अयोध्यावासियों में खुशी की लहर दौड़ जाती है। सभी श्रीराम के राजतिलक की तैयारियों में लग जाते है। इसी बीच मंथरा महारानी कैकेयी को भड़काकर उनके पुत्र भरत के लिए राजगद्दी की मांग के लिए उकसाती है।
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मंथरा की बात मान कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं। महाराज दशरथ से दिए दो वचनों को मांगती है। महाराज दशरथ श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास, भरत को राजगद्दी मांग को अस्वीकार कर देते हैं तो श्रीराम पिता के वचनों की लाज रखते हुए वनवास जाने को तैयार हो जाते हैं। यह सुनकर लक्ष्मण, सीता भी उनके साथ वन को रवाना होते हैं। केवट श्रीराम को गंगा पार करवाते हैं। फिर श्रीराम चित्रकूट में वास करते हैं।
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इससे पहले मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल ठक्कर, राजकपूर जैन, पोखरमल नेहरू, नीरज वर्मा ने गणेश वंदना के साथ रामलीला मंचन का शुभारंभ किया। मंच संचालन गजेंद्र मंगला ने किया। कार्यक्रम में महेंद्र मंगला, राजकुमार, महेंद्र वर्मा, प्रवीन गोयल, अमित कुच्छल, वीरेंद्र कटारिया, अनिल जैन, जितेंद्र कटारिया ने अपनी सेवाएं दी।