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Sonipat News: एशियाई स्वर्ण से चमका नाहरा का लाल, अब ओलंपिक पदक पर नजर
Thu, 04 Jun 2026 02:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 04 Jun 2026 02:25 AM IST
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फोटो :: दिल्ली एयरपोर्ट में पहलवान दीपांशु दहिया का स्वागत करते परिजन व प्रशंसक। स्रोत परिजन
सोनीपत। गांव नाहरा के होनहार पहलवान दीपांशु ने वियतनाम के दा नांग शहर में 28 से 31 मई तक आयोजित 23वीं अंडर-17 एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपने गांव, जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। 92 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करने पर दीपांशु का दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया।
दीपांशु की इस उपलब्धि ने क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों के लिए नई प्रेरणा है। ग्रामीणों ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद दीपांशु ने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
दीपांशु के पिता रविंद्र किसान हैं जबकि उनके दादा मेहताब दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिजनों का कहना है कि दीपांशु बचपन से ही खेलों के प्रति समर्पित रहे हैं और उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए लगातार कठिन परिश्रम किया है।
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स्वर्ण पदक विजेता दीपांशु ने कहा कि एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है। उनका सपना भारत के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है। इसके लिए वह पहले से भी अधिक मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ तैयारी करेंगे।
दीपांशु के चाचा रोबिन दहिया ने बताया कि वह इससे पहले वर्ष 2023 में जॉर्डन में रजत, 2024 में थाईलैंड में कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनके चचेरे भाई प्रीत शूटिंग में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। जल्द ही गांव में समारोह आयोजित कर दीपांशु का स्वागत किया जाएगा।
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दीपांशु की इस उपलब्धि ने क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों के लिए नई प्रेरणा है। ग्रामीणों ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद दीपांशु ने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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दीपांशु के पिता रविंद्र किसान हैं जबकि उनके दादा मेहताब दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिजनों का कहना है कि दीपांशु बचपन से ही खेलों के प्रति समर्पित रहे हैं और उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए लगातार कठिन परिश्रम किया है।
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स्वर्ण पदक विजेता दीपांशु ने कहा कि एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है। उनका सपना भारत के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है। इसके लिए वह पहले से भी अधिक मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ तैयारी करेंगे।
दीपांशु के चाचा रोबिन दहिया ने बताया कि वह इससे पहले वर्ष 2023 में जॉर्डन में रजत, 2024 में थाईलैंड में कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनके चचेरे भाई प्रीत शूटिंग में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। जल्द ही गांव में समारोह आयोजित कर दीपांशु का स्वागत किया जाएगा।