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पत्नी के घर से जाने के बाद से तनाव में रहता था दीपक, कुछ महीने पहले ही जेल से छूटकर आया था
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खरखौदा/सोनीपत। गांव मटिंडू में मां-बाप की हत्या करने के बाद सिपाही के खुद जहर खाने की घटना के बाद से मातम पसरा हुआ है। कुछ समय पहले तक जहां एक पूरा परिवार खुशी से रहता था तो अब वह परिवार पूरी तरह से उजड़ गया। बताया जा रहा है कि दीपक पत्नी के घर से जाने के बाद से तनाव में रहता था। दीपक का पत्नी के ममेरे भाई से झगड़ा हुआ था और उस मामले में दीपक कुछ महीने पहले ही जेल से छूटकर आया था। उसके बाद से वह ज्यादा तनाव में रहने लगा था।
दीपक खुद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में सिपाही था और उनके पिता स्वास्थ्य विभाग में चालक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। मां किताब कौर आंगनबाड़ी वर्कर थी। रामधन के पास दो बेटे व एक बेटी है। तीनों ही शादीशुदा हैं। बड़ा बेटा दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर है। दोनों बेटे दिल्ली पुलिस में सेवारत होने और दंपती के भी सरकारी नौकरी में रहने के चलते पूरा परिवार खुशहाल था। खरखौदा सीएचसी में सेवारत रहे रामधन मिलनसार व्यक्ति थे। दीपक का पत्नी के ससुराल पक्ष से मनमुटाव हो गया था। 26 जून को दीपक की पत्नी सुमन का ममेरा भाई रोहतक के इस्माइला का सुधीर अपनी बहन के घर आया था। उसे कागजात देने के नाम पर बुलाया था। यहां पर किसी बात को लेकर उसका दीपक से झगड़ा हो गया। इस झगड़े में सुधीर ने दीपक व उसके पिता रामधन पर मारपीट करने व तेजधार हथियार से जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद दीपक की पत्नी भी अपने दोनों बच्चों साथ मायके चली गई थी। मामले में पुलिस ने दीपक को गिरफ्तार किया था। बताया गया है कि उसके बाद वह तनाव में रहने लगा था। अब पुलिस पता लगाएगी कि वह ड्यूटी से कब आया था।
परिवार के सदस्यों का रोकर बुरा हाल
तीन मौतों के बाद परिवार के सदस्यों का रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। उसके बावजूद परिवार के सदस्यों को समझ नहीं आ रहा है कि अचानक इस तरह उन्हें दुख कैसे मिल गया। परिवार के सदस्य घटना के बाद से स्तब्ध है। रविवार शाम को एक ही चिता में तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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वर्जन
हत्या और आत्महत्या का पूरा मामला साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मामले का न कोई गवाह है और न ही आरोपी जिंदा है। ऐसे में साक्ष्यों को जोड़कर गहनता से जांच की जा रही है।
- बिजेंद्र सिंह, थाना प्रभारी, खरखौदा।
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दीपक खुद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में सिपाही था और उनके पिता स्वास्थ्य विभाग में चालक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। मां किताब कौर आंगनबाड़ी वर्कर थी। रामधन के पास दो बेटे व एक बेटी है। तीनों ही शादीशुदा हैं। बड़ा बेटा दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर है। दोनों बेटे दिल्ली पुलिस में सेवारत होने और दंपती के भी सरकारी नौकरी में रहने के चलते पूरा परिवार खुशहाल था। खरखौदा सीएचसी में सेवारत रहे रामधन मिलनसार व्यक्ति थे। दीपक का पत्नी के ससुराल पक्ष से मनमुटाव हो गया था। 26 जून को दीपक की पत्नी सुमन का ममेरा भाई रोहतक के इस्माइला का सुधीर अपनी बहन के घर आया था। उसे कागजात देने के नाम पर बुलाया था। यहां पर किसी बात को लेकर उसका दीपक से झगड़ा हो गया। इस झगड़े में सुधीर ने दीपक व उसके पिता रामधन पर मारपीट करने व तेजधार हथियार से जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद दीपक की पत्नी भी अपने दोनों बच्चों साथ मायके चली गई थी। मामले में पुलिस ने दीपक को गिरफ्तार किया था। बताया गया है कि उसके बाद वह तनाव में रहने लगा था। अब पुलिस पता लगाएगी कि वह ड्यूटी से कब आया था।
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परिवार के सदस्यों का रोकर बुरा हाल
तीन मौतों के बाद परिवार के सदस्यों का रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। उसके बावजूद परिवार के सदस्यों को समझ नहीं आ रहा है कि अचानक इस तरह उन्हें दुख कैसे मिल गया। परिवार के सदस्य घटना के बाद से स्तब्ध है। रविवार शाम को एक ही चिता में तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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हत्या और आत्महत्या का पूरा मामला साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मामले का न कोई गवाह है और न ही आरोपी जिंदा है। ऐसे में साक्ष्यों को जोड़कर गहनता से जांच की जा रही है।
- बिजेंद्र सिंह, थाना प्रभारी, खरखौदा।