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गड़बड़झाला ः किसानों के खेत पूरी तरह खाली, सिर्फ कागजों में लगा मल्चिंग पेपर

Wed, 28 Oct 2020 10:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2020 10:47 PM IST
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Grumpy: Farmers' fields completely empty, mulching paper only on paper
सोनीपत। बागवानी विभाग को एकीकृत बागवानी विकास मिशन स्कीम के तहत किसानों के जिन खेतों में मल्चिंग पेपर लगवाना था, वह खेत पूरी तरह से खाली पड़े हुए हैं। करोड़ों का घपला करने के लिए मल्चिंग पेपर केवल कागजों में लगवाया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अधूरी फाइलों को पास कर दिया गया, जिनमें खेतों के फोटो तक नहीं लगाए गए तो रिपोर्ट भी पूरी तरह से फर्जी बना दी गई। इस तरह अनुदान राशि का घपला करने के लिए केवल किसानों के शपथ पत्र ही फर्जी नहीं बनवाए गए, बल्कि मल्चिंग पेपर, फोटो, रिपोर्ट सभी में फर्जीवाड़ा किया गया है। अब किसानों ने अपने उन खेतों के फोटो अधिकारियों को भेज दिए हैं, जिनमें मल्चिंग पेपर लगा हुआ दिखाकर अनुदान राशि हड़पी गई है।
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जिले के लगभग 500 किसानों ने आधुनिक खेती करने के लिए एमआईडीएच स्कीम के तहत खेत में मल्चिंग पेपर लगवाने को मार्च 2020 में आवेदन किया था। बागवानी विभाग के पास 1366 हेक्टेयर जमीन में मल्चिंग पेपर लगवाने के लिए किसानों के आवेदन आए थे। उसके बाद लॉकडाउन हुआ तो यह मामला लटक गया। लॉकडाउन खत्म होने के बाद किसानों ने बागवानी विभाग के कार्यालय में मल्चिंग पेपर लगवाने पर सरकार से मिलने वाली 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राशि के बारे में जानकारी मांगी तो उनकी अनुदान राशि एक निजी कंपनी के खाते में भेजी जा चुकी थी। इसके लिए किसानों के फर्जी शपथ पत्र लगाए गए है, जिसकी शिकायत अधिकारियों के पास की गई। गोरड़ गांव के किसान जितेंद्र, गोरड़ के योगेंद्र, पीपली गांव के किसान पुनीत दहिया ने अब उन खेतों के फोटो जारी कर दिए हैं, जिनमें मल्चिंग पेपर लगवाने के लिए आवेदन किया गया था। उन फोटो को देखकर अधिकारी भी हैरान हो गए हैं, क्योंकि किसी भी जगह एक मीटर भी मल्चिंग पेपर नहीं लगा है। करोड़ों रुपये का खेल केवल कागजों में चलता रहा। जिसमें अब बागवानी विभाग के अधिकारी व कर्मचारी फंसते नजर आ रहे हैं।
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फाइल में फोटो नहीं लगे, अफसर मौके पर नहीं गए, फिर भी डीएचओ ने पास कर दी
बागवानी विभाग में इस अनुदान राशि के खेल में कोई एक शामिल नहीं है, बल्कि अफसर से लेकर कर्मी तक शामिल है। इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद डीएचओ यह कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि वह इसकी जांच नहीं करते है। बल्कि उनके पास केवल फाइल आती है और वह उसपर हस्ताक्षर करके पास कर देते है। डीएचओ की बात से किसान भी हैरान हैं, किसान जितेंद्र ने कहा कि फाइल में फोटो भी लगाए जाते हैं, रिपोर्ट भी लगाई जाती है तो उसके बाद डीएचओ खुद जांच करके हस्ताक्षर करते हैं। लेकिन इस फाइल में मौके के फोटो तक नहीं है, रिपोर्ट नहीं है फिर भी डीएचओ ने फाइल पास कर दी।
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मैने अपने यहां एक हेक्टेयर जमीन में मल्चिंग पेपर लगाने के लिए आवेदन किया था। मेरे यहां एक मीटर भी मल्चिंग पेपर नहीं लगाया गया और मेरे यहां कोई अधिकारी जांच तक करने नहीं आया है। मैने कोई शपथ पत्र भी अनुदान राशि किसी अन्य के खाते में भेजने का नहीं दिया है। उसके बावजूद मेरे नाम से अनुदान राशि एक कंपनी के खाते में भेजी गई, जिसमें बागवानी विभाग के अफसरों ने घपला किया है। - जितेंद्र, किसान गोरड़
मैने अपने 0.8 हेक्टेयर के खेत में मल्चिंग पेपर लगाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन मेरा फर्जी शपथ पत्र बनाकर अनुदान राशि किसी कंपनी के खाते में भेज दी गई है। मेरे खेत में कोई मल्चिंग पेपर नहीं लगा और मेरे पास कोई अनुदान राशि भी नहीं आई है। - पुनीत दहिया, किसान पीपली

बागवानी विभाग में किसानों की अनुदान राशि उनके फर्जी शपथ पत्र लगाकर निजी कंपनी के खाते में भेजी गई है तो यह मामला गंभीर है। इसमें किसानों ने शिकायत की है तो उसकी जांच हो जाएगी और उसमें कोई दोषी मिलता है तो उसको बख्श नहीं जाएगा। उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- रणजीत चौटाला, मंत्री, प्रदेश सरकार
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