Sonipat: रोहणा के किसान सुरेश ने खाया 2.180 किलोग्राम चूरमा, चूरमा खाओ इनाम पाओ प्रतियोगिता के फिर बने विजेता
गांव पिपली के शिव मंदिर में नववर्ष के आगाज पर प्रतियोगिता आयोजित की गई। हरियाणवी खानपान व संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चूरमा खाओ, इनाम पाओ स्पर्धा का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेश से भी युवा पहुंचे।
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सोनीपत के गांव पिपली के शिव मंदिर में नव वर्ष के आगाज पर रविवार को दूसरी चूरमा खाओ प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में रोहणा निवासी 57 वर्षीय किसान सुरेश ने 2.180 किलोग्राम चूरमा खाकर फिर से विजेता बने। वर्ष 2020 के नवंबर माह में आयोजित की गई पहली चूरमा खाओ प्रतियोगिता में सुरेश ने 1.700 किलोग्राम चूरमा खाकर पहला स्थान प्राप्त किया था।
इस बार सुरेश ने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए दोबारा प्रतियोगिता अपने नाम की। किसान सुरेश को आयोजकों की तरफ 5100 रुपये का नकद इनाम देकर पुरस्कृत किया गया। इनके अलावा भी महिलाओं व बच्चों के वर्ग में विजेता रहे प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।
चूरमा खाओ प्रतियोगिता के देश ही नहीं विदेशों में चर्चे हो रहे हैं। इस बार प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए इंग्लैंड से युवा रोहित अहलावत, इलाहाबाद से निशा मिश्रा, उत्तर प्रदेश के खुर्जा से तरुण, उत्तर प्रदेश के मोदी नगर से पंकज पहुंचे। प्रतियोगिता के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पुरुष व महिलाएं हरियाणावी परिधान में पहुंचे, जोकि इस कार्यक्रम की विशेषता भी रही।
हरियाणवी परिधान में प्रतिभागिता करने विभिन्न स्थानों से पहुंची महिलाएं चूरमा खाते हुए। संवाद
युवाओं में भी पगड़ी बांधकर पहुंचने का क्रेज नजर आया। चूरमा खाओ प्रतियोगिता में 115 प्रतिभागियों ने भाग लेते हुए प्रतिभा दिखाई। जिसमें 75 पुरुष, 25 महिलाएं और 15 अंडर-10 आयु वर्ग के बच्चे शामिल हुए। सभी में अधिक से अधिक चूरमा खाने की होड़ लगी रही।
हरियाणवी संस्कृति और देसी खानपान को बढ़ावा देना उद्देश्य
गांव सिसाना निवासी कमांडो आशीष दहिया ने बताया कि हरियाणवी संस्कृति और यहां के देसी खानपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर यह अनोखी प्रतियोगिता शुरू की है। यह दूसरी ही प्रतियोगिता है, लेकिन इसकी चर्चा विदेशों में भी है। उन्होंने कहा कि हरियाणवी संस्कृति की अलग पहचान होने के साथ ही यहां का लजीज खानपान भी निराला है, जो कि पौष्टिक भी है। इस प्रकार के आयोजन हमारे खानपान को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं।
किसने कितना चूरमा खाया
प्रतियोगिता में गांव रोहणा निवासी किसान सुरेश ने 2.180 किलोग्राम चूरमा खाकर पहला स्थान प्राप्त किया। पानीपत के गोरे ने 2.0 किलो चूरमा खाकर दूसरा, मटिंडू निवासी हवा सिंह ने 1.800 किलोग्राम चूरमा खाकर तीसरा, थाना कलां के रामकुमार ने 1.725 किलोग्राम चूरमा खाकर चौथा स्थान, नूना माजरा के सुभाष ने 1.700 किलोग्राम चूरमा खाकर पांचवां और इस्माइला के प्रदीप ने 1.590 ग्राम चूरमा खाकर छठा स्थान प्राप्त किया।
महिलाओं और बच्चों ने भी दिखाया दम
चूरमा प्रतियोगिता में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। निधि ने एक किलोग्राम चूरमा खाकर पहला, साक्षी ने 800 ग्राम चूरमा खाकर दूसरा और सिलाना निवासी माही ने 380 ग्राम चूरमा खाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। अंडर-10 में यक्ष ने 415 ग्राम चूरमा खाकर पहला स्थान पाया।
दूध-चूरमा पसंदीदा व्यंजन, इसलिए सबको पछाड़ा
प्रतियोगिता को दूसरी बार अपने नाम करने वाले किसान सुरेश ने बताया कि वह देसी खानपान को अधिक पसंद करते हैं। उनका कहना है कि दूध-चूरमा उनका पसंदीदा व्यंजन है, जिसके चलते वे सप्ताह में दो से तीन बार इसे जरूर खाते हैं। देसी भोजन खाकर वह खेतों में कड़ी मेहनत कर पाते हैं। यही कारण है कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में सबको पछाड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया। बीते दिनों कंसाला में हुई चूरमा खाओ प्रतियोगिता में भी उन्होंने दूसरा स्थान पाया था।