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500 से ज्यादा बिछड़े बच्चों को दिलाई ‘ममता’ की छांव

Wed, 28 Oct 2020 12:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2020 12:45 AM IST
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सोनीपत। नौकरी को आराम से करने वाले काफी लोग होते हैं, लेकिन नौकरी को समाजसेवा की तरह करने वाले बहुत कम मिलते हैं। ऐसे ही सीपीओ ममता शर्मा हैं जो परिवार से बिछड़े 500 से ज्यादा बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटा चुकी हैं। परिवार से बिछड़कर व बाल मजदूरी को दूसरे प्रदेशों के साथ ही आसपास के जिलों से यहां आए बच्चों के घर का ममता शर्मा ने किसी तरह पता लगाया और उनको परिवार वालों से मिलाने के लिए घर पहुंचाया।
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कोरोना काल में जब हर कोई संक्रमण से बचने का प्रयास कर रहा था, तब परिवार से बिछड़े 50 से ज्यादा बच्चों के घरों का दिन-रात मेहनत करके पता किया और उनको घर तक पहुंचाया। इनके अलावा भी गरीब परिवारों के बच्चों को खुद के खर्च पर स्टेशनरी देकर वह पढ़ाई कराती है तो बच्चों की पढ़ाई के लिए लोगों को जागरूक तक करने में जुटी हुई है।
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बाल संरक्षण अधिकारी के पद पर कार्यरत ममता शर्मा कॉलेज के समय से समाजसेवा के लिए तत्पर रहती थी और वह बच्चों की शिक्षा से लेकर अन्य सामाजिक कार्य में लगी रहती थी। सीपीओ बनने पर भी यह जज्बा कायम रहा और वह परिवार से बिछड़े हर बच्चे को उनसे मिलाने में जुटी रहती है तो किसी कारण से स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाए हुए है। पिछले पांच साल में जम्मू कश्मीर, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के 500 से ज्यादा बच्चे परिवार से बिछड़कर यहां आए तो किसी को बाल मजदूरी के लिए यहां लाया गया। इन सभी बच्चों को ममता शर्मा ने अपनी जिम्मेदारी समझकर घर तक पहुंचाया। जिसके लिए उनके घरों का पता लगाना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन वह इसके लिए दिन-रात जुटी रहती हैं। घर जाकर भी वह उनका पता तलाशने में लगी रहती है, जिससे बच्चों को उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके। कोरोना काल में लॉकडाउन के समय सबसे ज्यादा स्थिति खराब हुई, जब लगभग 50 बच्चे अपने परिजनों से बिछड़ गए। उनमें अधिकतर ऐसे बच्चे थे जो अपना पता तक नहीं जानते थे। ऐसे में उनके घर व माता-पिता की जानकारी जुटाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन उस समय भी दिन-रात मेहनत करके ममता शर्मा ने बच्चों को परिवार से मिलाया।
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बालश्रम रोकने में जुटी तो बच्चों को शिक्षित करने को बांटती हैं स्टेशनरी
ममता शर्मा केवल परिवार से बिछड़े बच्चों को घर तक ही नहीं पहुंचा रही है। बल्कि वह चाहती है कि किसी भी बालश्रम नहीं हो और उसपर पूरी तरह से रोक लग सके। क्योंकि बालश्रम पर पूरी तरह से रोक लगेगी तो उसके बाद ही किसी बच्चे को पढ़ाई से वंचित नहीं रखा जाएगा। बच्चों को काम में लगा दिया जाता है, इसलिए ही वह पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। ममता शर्मा चाहती है कि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहे और इसके लिए ही वह लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जागरूक करती है। जिससे काफी परिवारों ने अपने बच्चों को स्कूल भी भेजना शुरू किया। लेकिन ऐसे भी परिवार है जो किसी कारणवश बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते तो उनको ममता ने खुद स्टेशनरी उपलब्ध कराकर पढ़ाई भी कराई है।
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