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Sonipat News: फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए उतरीं ड्रोन टीमें, 900 एकड़ पर रखी नजर

Wed, 14 Oct 2026 02:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Wed, 14 Oct 2026 02:13 AM IST
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Drone teams deployed to prevent crop residue burning; 900 acres under surveillance
सोनीपत। पराली और अन्य फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था और सख्त कर दी है। खेतों पर नजर रखने के लिए ड्रोन टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों ने पहले दिन भटाना जाफराबाद गांव में 900 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की निगरानी की।
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इस दौरान खेतों में पराली जलाने की कोई घटना नहीं मिली। विभाग का लक्ष्य येलो जोन में शामिल गांवों को ग्रीन जोन में लाना और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
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प्रदेशस्तर पर फसल अवशेषों में आग लगने की घटनाओं के आधार पर गांवों को रेड और येलो जोन में वर्गीकृत किया गया है। सोनीपत जिले में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है।
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यही वजह है कि जिले का कोई भी गांव रेड जोन में शामिल नहीं है। हालांकि अब भी 10 गांव येलो जोन में हैं। इन गांवों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग ने जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के साथ आसमान से भी नजर रखने की व्यवस्था की है।

येलो जोन के 10 गांवों में विशेष निगरानी :
जिले में इस खरीफ सीजन के दौरान करीब 2.60 लाख एकड़ भूमि में धान की खेती की गई है। वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में पराली जलाने की घटनाओं के आधार पर जिले के 10 गांवों को येलो जोन में रखा गया है। इनमें बिधलान, कटवाल, जाजी, भांवर, बली, भंडेरी, छपरा, धनाना और इशापुर खेड़ी शामिल हैं। इन गांवों में किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक करने और नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग ने प्रत्येक 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इसके साथ ही ड्रोन टीमों को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। येलो जोन के गांवों के अलावा अन्य संवेदनशील गांवों पर भी नजर रखी जा रही है।

प्रत्येक टीम में दो ड्रोन, अलग-अलग गांवों में निगरानी :
फसल अवशेषों में आग की घटनाओं का समय रहते पता लगाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रत्येक टीम में दो ड्रोन शामिल किए गए हैं। टीमें अलग-अलग गांवों में पहुंचकर खेतों की निगरानी कर रहीं हैं। इससे आग की आशंका वाले क्षेत्रों पर नजर रखने और समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

सैटेलाइट से मिलीं दो लोकेशन, औद्योगिक क्षेत्र में निकलीं घटनाएं :
कृषि विभाग सैटेलाइट के माध्यम से भी आग की घटनाओं पर नजर रख रहा है। विभाग को सैटेलाइट से दो लोकेशन मिलीं हैं। विभाग की ओर से मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया तो दोनों लोकेशन कृषि भूमि के बजाय औद्योगिक क्षेत्रों की मिलीं। इसके बाद मामले की रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दी गई ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। पिछले खरीफ सीजन के आंकड़ों के अनुसार शुरुआती अवधि में सैटेलाइट से तीन लोकेशन मिली थीं। वहीं, पूरे सीजन में कुल 68 लोकेशन मिलीं जिनमें से 11 स्थानों पर वास्तव में आग की घटनाओं की पुष्टि हुई थी। संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की गई थी।



किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील :
फसल अवशेषों में आग रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। येलो जोन के गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए जमीनी स्तर पर टीमों का गठन करने के साथ ड्रोन की मदद भी ली जा रही है। किसानों से अपील की कि वह फसल अवशेषों को आग लगाने से बचें और पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं। - डॉ. बलवंत, उपनिदेशक, कृषि विभाग, सोनीपत।
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