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प्रशासन के आश्रय स्थल खोलने के बावजूद नहीं रुक रहा मजदूरों का पलायन

Sun, 29 Mar 2020 10:03 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2020 10:03 PM IST
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Distric administration opened Seltor Home but migration of Peoples in continue
अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए नेशनल हाईवे पर खड़े लोग। - फोटो : Sonipat
कोरोना से बचाव को लेकर पूरे देश को लॉकडाउन किया जा चुका है। इसके चलते सभी कंपनी और अन्य संस्थान बंद कर दिए गए हैं। सोनीपत में लॉकडाउन के साथ ही धारा 144 भी लगी है। लॉकडाउन के बावजूद मजदूर वर्ग अपने घरों को जाने के लिए सड़क पर निकल लिया है। मजदूर वर्ग के लोग महिलाओं व बच्चों संग पैदल ही 500 से 600 किलोमीटर दूर अपने घर जाने के लिए निकल लिए हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए भी दुविधा खड़ी हो गई है। मजदूर वर्ग खाने की किल्लत की बात कहते हुए अपने घर का रुख कर रहे हैं, लेकिन सोनीपत जिला प्रशासन की तरफ से अब उनके लिए डेढ़ दर्जन स्थानों पर आश्रय स्थल बनाकर रहने व खान-पान का प्रबंध किया जा चुका है। उसके बावजूद आश्रय स्थल खाली पड़े हैं। जिन गांवों में मजदूर वर्ग के लोग रह रहे हैं। वहां के लोग भी उनसे इस विपरीत स्थिति में बाहर नहीं जाने की मिन्नत कर रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद वह रुकने को तैयार नहीं है। ऐसे में प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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लगातार दो दिन से हाईवे के साथ ही केएमपी व केजीपी पर मजदूर वर्ग के लोगों की कतार लगी है। वह बिना किसी साधन और संसाधन के अपने प्रदेश जाने के निकल पड़े हैं। बच्चों व महिलाओं संग पैदल ही लंबा सफर तय करने की बात कर रहे हैं। सोनीपत के शहरी, राई, कुंडली व गन्नौर औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही पास-पड़ोस के जिलों से भी मजदूर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार व राजस्थान जाने को निकले हैं। लोगों के बाहर निकलने का पता लगने के बाद से सोनीपत प्रशासन ने तुरंत हरकत में आकर कई स्थानों पर आश्रय स्थल खोल दिए हैं, लेकिन सभी आश्रय स्थल अभी खाली ही पड़े हैं। हाईवे पर आईआईटीएम में बने आश्रय स्थल में रात को करीब 395 लोग पहुंचे थे। जिन्होंने वहां रुककर खाना खाया, लेकिन रात को ही आगे अपने गंतव्य की तरफ निकल गए। उन्हें रोकने का प्रयास भी हुआ, लेकिन कोई रुकने को तैयार नहीं था। इसी तरह सरस्वती स्कूल में बनाए गए आश्रय स्थल में अभी तक कोई नहीं पहुंचा है। अन्य आश्रय स्थल का कमोबेश यही हाल है। यहां मजदूर वर्ग को बुलाया तो जाता है, लेकिन वह खाने-पीने का प्रबंध होते ही आगे चल देते हैं।
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किसी को खाने की तो किसी को बच्चों की चिंता
हाईवे से अपने गंतव्य की तरफ पैदल ही जा रहे लोग अपनी-अपनी समस्या बता रहे हैं। किसी को खाने की चिंता है तो कोई बच्चों की चिंता के चलते वापस जाना चाहता है। हाईवे से गुजर रहे मध्य प्रदेश के पवन कुमार ने बताया कि यहां खाने के लाले हो गए हैं। जिस कंपनी में निर्माण कार्य में लगा था वहां काम बंद हो गया है। मालिक उन्हें खाने का सामान उपलब्ध नहीं करा रहा था। जब उसे आश्रय स्थल के बारे में बताया गया तो कहा साहब अपना पेट तो भर लूंगा, लेकिन घर पर बच्चे भी है। उनके पास चला जाऊंगा तो वहां अपनी खेती कर उनके पेट पालने का प्रबंध तो हो जाएगा। वहीं हाईवे पर जा रहे मुजफ्फरनगर यूपी के जोगेंद्र ने बताया कि घर पर बेटी तबीयत बहुत खराब हैं। यहां रहकर अब काम धंधे भी नहीं चल रहे हैं। जिसके चलते अब बच्चों के पास जा रहा हूं।
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लोगों की मिन्नत नहीं मान रहे मजदूर
राई औद्योगिक क्षेत्र अपने घरों को निकले मजदूरों को राई व बढ़मलिक के लोगों ने समझाकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। कई ग्रामीणों ने उन्हें यहां तक कह दिया कि उनके खाने का प्रबंध अब वह करेंगे, लेकिन मजदूर वर्ग के लोगों ने इससे भी मना कर दिया।
सोनीपत में यहां बनाए गए हैं आश्रय स्थल
प्रशासन की तरफ से हाईवे पर ठहरने व खानपान के लिए उत्कृष्ट प्रबंध किया गया है। आईआईटीएम मुरथल में सामाजिक संगठनों द्वारा 1000, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बीसवां मील में 100, देवऋषि वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बहालगढ़ में 600, रुकमणि देवी पब्लिक स्कूल किशोरा में 1000, राजकीय माध्यमिक स्कूल बहालगढ़ में 50, राजकीय प्राईमरी स्कूल कुंडली में 50, राजकीय हाई स्कूल रसोई में 50, राजकीय माध्यमिक स्कूल नांगल कलां में 50, सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल जीटी रोड मुरथल में 500, राजकीय हाई स्कूल हसनपुर में 100, राजकीय हाई स्कूल लड़सौली में 100, राजकीय हाईस्कूल बड़ी में 100 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। गन्नौर के जैन स्कूल में 100, अपोलो इंटरनेशनल स्कूल में 150, माडर्न कान्वेंट स्कूल में 2000 और बाल भवन स्कूल में 200 लोगों के रुकने की व्यवस्था की गई है।

एसडीएम सोनीपत आशुतोष राजन ने बताया कि प्रशसन की तरफ से सभी व्यापक प्रबंध किए गए हैं। किसी को खाने व रहने की कोई किल्लत किसी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। हाईवे पर ही डेढ़ दर्जन से अधिक आश्रय स्थल बनाए गए हैं। जिनमें प्रशासन व सामाजिक लोगों की मदद से सभी प्रबंध है। पूरा प्रयास रहेगा कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। सभी को अपनी जिम्मेदारी समझकर प्रयास करना चाहिए। कोरोना से बचाव के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
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