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पांडुलिपियों का नष्ट होना इतिहास का अध्याय खोने के सामान : डॉ. यशपाल
Tue, 12 May 2026 05:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 12 May 2026 05:55 PM IST
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फोटो: राजकीय काॅलेज पिपली में प्रो. डाॅ. यशपाल सिंह विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए। स्रोत: क
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। बलिदानी दलबीर सिंह राजकीय काॅलेज, पिपली में इतिहास विभाग की ओर से पांडुलिपि संरक्षण विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राचीन पांडुलिपियों के महत्व और उनके संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराना था।
मुख्य वक्ता बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रोफेसर डाॅ. यशपाल सिंह ने पांडुलिपियों के पारंपरिक व आधुनिक संरक्षण के तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डाॅ. यशपाल ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों के ज्ञान का अमूल्य भंडार हैं।
उन्होंने कहा कि इनका नष्ट होना इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के खोने के समान है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस दिशा में कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रह सकें।
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डाॅ. किरन सरोहा ने कहा कि ऐसे व्याख्यान छात्रों के ज्ञान में वृद्धि करने के साथ-साथ उनमें अपनी संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।
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खरखौदा। बलिदानी दलबीर सिंह राजकीय काॅलेज, पिपली में इतिहास विभाग की ओर से पांडुलिपि संरक्षण विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राचीन पांडुलिपियों के महत्व और उनके संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराना था।
मुख्य वक्ता बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रोफेसर डाॅ. यशपाल सिंह ने पांडुलिपियों के पारंपरिक व आधुनिक संरक्षण के तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डाॅ. यशपाल ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों के ज्ञान का अमूल्य भंडार हैं।
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उन्होंने कहा कि इनका नष्ट होना इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के खोने के समान है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस दिशा में कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रह सकें।
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डाॅ. किरन सरोहा ने कहा कि ऐसे व्याख्यान छात्रों के ज्ञान में वृद्धि करने के साथ-साथ उनमें अपनी संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।