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Sonipat News: रामलीला में दशरथ देह त्याग, भरत मनावन और शूर्पणखा नासिका भंग की लीला का मंचन
Sat, 17 Oct 2026 03:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 17 Oct 2026 03:06 AM IST
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सोनीपत के कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में वन गमन मंचन के दौरान प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण
सोनीपत। श्रीरामलीला सभा और श्रीठाकुरद्वारा पंचायती मंदिर सेवा समिति द्वारा कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन हुआ। रामलीला के छठे दिन शुक्रवार को कलाकारों ने दशरथ देह त्याग, भरत मनावन और शूर्पणखा नासिका भंग के प्रसंगों का मंचन किया। वृंदावन से आए कलाकारों ने जीवंत अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
वृंदावन आचार्य सौरभ द्विवेदी, प्रसिद्ध स्वामी शिवदयाल शर्मा और स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा के मार्गदर्शन में मंचन हुआ। कलाकारों ने श्रीराम, सीता और लक्ष्मण का माता-पिता की आज्ञा से 14 साल के लिए वन प्रस्थान दिखाया। महाराज दशरथ को श्रवण के माता-पिता का श्राप याद आया। पुत्र वियोग में उन्होंने प्राण त्याग दिए। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी।
इसके बाद भरत भगवान श्रीराम को अयोध्या लौटने के लिए मनाने वन पहुंचे। श्रीराम ने वचन का पालन करते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय लिया। भरत उनकी खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौटे। उन्होंने खड़ाऊ को राजसिंहासन पर विराजमान कर स्वयं वनवासी की तरह जीवन बिताने का संकल्प लिया।
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शूर्पणखा नासिका भंग :
वनवास के दौरान रावण की बहन शूर्पणखा श्रीराम की कुटिया में पहुंची। उसने श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। पत्नीव्रत का पालन करते हुए श्रीराम ने उसे मना कर दिया। शूर्पणखा ने लक्ष्मण को रिझाने का प्रयास किया। असफल होने पर वह माता सीता पर हमला करने के लिए बढ़ी जिस पर लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट दिए।
कार्यक्रम में अतिथि और आयोजक :
पूर्व निगम पार्षद हरिप्रकाश सैनी और बड़ा बाजार स्वर्णकार समाज के प्रधान नीरज वर्मा मुख्य अतिथि रहे। प्रवीण जैन, सागर वालिया और अरमान नैन अतिथि रहे। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय राजनीतिक संयोजक अरुण बंसल की अध्यक्षता में गजेंद्र सलूजा ने संचालन किया। महेंद्र मंगला, राजकुमार गोयल, अमित शौनक, प्रवीण गोयल, अमित कुच्छल, महेंद्र वर्मा, राहुल अग्रवाल और अनिल जैन आदि मौजूद थे।
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वृंदावन आचार्य सौरभ द्विवेदी, प्रसिद्ध स्वामी शिवदयाल शर्मा और स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा के मार्गदर्शन में मंचन हुआ। कलाकारों ने श्रीराम, सीता और लक्ष्मण का माता-पिता की आज्ञा से 14 साल के लिए वन प्रस्थान दिखाया। महाराज दशरथ को श्रवण के माता-पिता का श्राप याद आया। पुत्र वियोग में उन्होंने प्राण त्याग दिए। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी।
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इसके बाद भरत भगवान श्रीराम को अयोध्या लौटने के लिए मनाने वन पहुंचे। श्रीराम ने वचन का पालन करते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय लिया। भरत उनकी खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौटे। उन्होंने खड़ाऊ को राजसिंहासन पर विराजमान कर स्वयं वनवासी की तरह जीवन बिताने का संकल्प लिया।
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शूर्पणखा नासिका भंग :
वनवास के दौरान रावण की बहन शूर्पणखा श्रीराम की कुटिया में पहुंची। उसने श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। पत्नीव्रत का पालन करते हुए श्रीराम ने उसे मना कर दिया। शूर्पणखा ने लक्ष्मण को रिझाने का प्रयास किया। असफल होने पर वह माता सीता पर हमला करने के लिए बढ़ी जिस पर लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट दिए।
कार्यक्रम में अतिथि और आयोजक :
पूर्व निगम पार्षद हरिप्रकाश सैनी और बड़ा बाजार स्वर्णकार समाज के प्रधान नीरज वर्मा मुख्य अतिथि रहे। प्रवीण जैन, सागर वालिया और अरमान नैन अतिथि रहे। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय राजनीतिक संयोजक अरुण बंसल की अध्यक्षता में गजेंद्र सलूजा ने संचालन किया। महेंद्र मंगला, राजकुमार गोयल, अमित शौनक, प्रवीण गोयल, अमित कुच्छल, महेंद्र वर्मा, राहुल अग्रवाल और अनिल जैन आदि मौजूद थे।