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Sonipat News: बजरंग पोस्ट पर मोर्चा संभालते हुए बलिदान हो गए थे गांव पिनाना के भीम सिंह
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फोटो :38: सोनीपत में बेटों और बहुओं के साथ शहीद भीम सिंह की पत्नी सुनीता देवी। संवाद
शिवकुमार सिंह जादौन
सोनीपत। कारगिल युद्ध में सोनीपत के गांव पिनाना निवासी शहीद भीम सिंह की वीरता की गाथा हर किसी को देशभक्ति के जज्बे से भर देगी। युद्ध शुरू होने के तीन महीने पहले वे छुट्टी पर घर आए थे। इसके बाद जब युद्ध शुरू हुआ तो परिजनों से कोई संपर्क नहीं हुआ। 12 जून को उनकी शहादत की सूचना मिली।
आखिरी सांस तक शहीद भीम सिंह ने दुश्मनों से मुकाबला किया। दुश्मनों को सीमा से खदेड़ने के बाद ही सांसों ने शरीर का साथ छोड़ा। भीम सिंह का जन्म साल 1965 में देशराज के घर हुआ था। भीम सिंह कारगिल में दुश्मनों से लोहा लेते हुए 12 जून 1999 को शहीद हो गए थे।
उनके दोनों बेटे अनिल व सुनील तब छोटे थे। सुनील बताते हैं कि उनके पिता की बहादुरी की गाथा से उन्हें गर्व होता है। शहीद भीम सिंह की पत्नी सुनीता देवी ने बताया कि उनके पति ने हमेशा देश सेवा को प्राथमिकता दी। पति की बहादुरी के बारे में बताते हुए वे भावुक हो जाती हैं। सुनीता देवी सोनीपत में दोनों बेटों के साथ सेक्टर-23 में रह रही हैं। संवाद
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गांव में नहीं बना शहीद स्मृति पार्क
कारगिल में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में हर गांव में शहीद स्मृति पार्क बना है। जहां शहीद की प्रतिमा स्थापित होती है लेकिन शहीद भीम सिंह के गांव में आज भी शहीद पार्क स्थापित नहीं हुआ है। यह बात उनके बेटों को खलती है। गांव में शहीद के नाम से लाइब्रेरी जरूर बनी थी, लेकिन उसका भी विस्तार नहीं हुआ। दोनों बेटे चाहते हैं कि गांव में उनके पिता के नाम शहीद पार्क बने जिससे युवा प्रेरित होकर सेना में भर्ती की तैयारी करें।
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बजरंग पोस्ट पर मोर्चा संभालते हुए थे शहीद
नायक भीम सिंह मलिक नायक के पद पर थे। यूनिट-4 जाट रेजिमेंट में बजरंग पोस्ट पर मोर्चा संभालते हुए उन्होंने दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया। 12 जून 1999 को वे देश पर बलिदान हो गए।
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सोनीपत। कारगिल युद्ध में सोनीपत के गांव पिनाना निवासी शहीद भीम सिंह की वीरता की गाथा हर किसी को देशभक्ति के जज्बे से भर देगी। युद्ध शुरू होने के तीन महीने पहले वे छुट्टी पर घर आए थे। इसके बाद जब युद्ध शुरू हुआ तो परिजनों से कोई संपर्क नहीं हुआ। 12 जून को उनकी शहादत की सूचना मिली।
आखिरी सांस तक शहीद भीम सिंह ने दुश्मनों से मुकाबला किया। दुश्मनों को सीमा से खदेड़ने के बाद ही सांसों ने शरीर का साथ छोड़ा। भीम सिंह का जन्म साल 1965 में देशराज के घर हुआ था। भीम सिंह कारगिल में दुश्मनों से लोहा लेते हुए 12 जून 1999 को शहीद हो गए थे।
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उनके दोनों बेटे अनिल व सुनील तब छोटे थे। सुनील बताते हैं कि उनके पिता की बहादुरी की गाथा से उन्हें गर्व होता है। शहीद भीम सिंह की पत्नी सुनीता देवी ने बताया कि उनके पति ने हमेशा देश सेवा को प्राथमिकता दी। पति की बहादुरी के बारे में बताते हुए वे भावुक हो जाती हैं। सुनीता देवी सोनीपत में दोनों बेटों के साथ सेक्टर-23 में रह रही हैं। संवाद
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गांव में नहीं बना शहीद स्मृति पार्क
कारगिल में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में हर गांव में शहीद स्मृति पार्क बना है। जहां शहीद की प्रतिमा स्थापित होती है लेकिन शहीद भीम सिंह के गांव में आज भी शहीद पार्क स्थापित नहीं हुआ है। यह बात उनके बेटों को खलती है। गांव में शहीद के नाम से लाइब्रेरी जरूर बनी थी, लेकिन उसका भी विस्तार नहीं हुआ। दोनों बेटे चाहते हैं कि गांव में उनके पिता के नाम शहीद पार्क बने जिससे युवा प्रेरित होकर सेना में भर्ती की तैयारी करें।
बजरंग पोस्ट पर मोर्चा संभालते हुए थे शहीद
नायक भीम सिंह मलिक नायक के पद पर थे। यूनिट-4 जाट रेजिमेंट में बजरंग पोस्ट पर मोर्चा संभालते हुए उन्होंने दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया। 12 जून 1999 को वे देश पर बलिदान हो गए।

फोटो :38: सोनीपत में बेटों और बहुओं के साथ शहीद भीम सिंह की पत्नी सुनीता देवी। संवाद