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Sonipat News: किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखाएगा कृषि विभाग
Sat, 25 Oct 2025 02:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 25 Oct 2025 02:24 AM IST
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सोनीपत। रासायनिक खेती से खराब हो रही मिट्टी की सेहत और खाद की बढ़ती मांग के बीच कृषि विभाग ने किसानों को प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है।
कृषि विभाग ने रबी सीजन को लेकर विभाग ने विशेष प्राकृतिक खेती मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत जिले के हर ब्लॉक में दो किसान गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। गोष्ठियों में किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, तरीकों और लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ गोष्ठी में शामिल किसानों को प्राकृतिक खाद व जैविक कीटनाशक तैयार करने का प्रशिक्षण भी देंगे।
रासायनिक खादों की मांग लगातार बढ़ रही है। खरीफ सीजन में औसतन 49 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, लेकिन इस बार 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया आने के बावजूद किसान कतारों में दिखे।
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कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि रासायनिक खाद मिट्टी की उर्वरता को घटा रही है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और फसलें भी अधिक पौष्टिक व टिकाऊ बनती हैं। प्राकृतिक खेती पूरी तरह से देशी गाय पर आधारित है।
कृषि विभाग ने देशी गाय की खरीद पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। पहले यह राशि 25 हजार थी। साथ ही खाद बनाने के ड्रम और आवश्यक उपकरण भी विभाग की ओर से सब्सिडी दरों पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
अब तक 5 हजार किसानों ने कराया पंजीकरण
सोनीपत में प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। अब तक करीब पांच हजार किसान प्राकृतिक खेती पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि इस अभियान के माध्यम से और अधिक किसान इस दिशा में आगे आएं। पंजीकृत किसानों को कुरुक्षेत्र स्थित प्रशिक्षण केंद्र में विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
वर्जन-
रासायनिक खेती से फसलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है। हर ब्लॉक में दो विशेष किसान गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।-डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत
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कृषि विभाग ने रबी सीजन को लेकर विभाग ने विशेष प्राकृतिक खेती मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत जिले के हर ब्लॉक में दो किसान गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। गोष्ठियों में किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, तरीकों और लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ गोष्ठी में शामिल किसानों को प्राकृतिक खाद व जैविक कीटनाशक तैयार करने का प्रशिक्षण भी देंगे।
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रासायनिक खादों की मांग लगातार बढ़ रही है। खरीफ सीजन में औसतन 49 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, लेकिन इस बार 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया आने के बावजूद किसान कतारों में दिखे।
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कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि रासायनिक खाद मिट्टी की उर्वरता को घटा रही है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और फसलें भी अधिक पौष्टिक व टिकाऊ बनती हैं। प्राकृतिक खेती पूरी तरह से देशी गाय पर आधारित है।
कृषि विभाग ने देशी गाय की खरीद पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। पहले यह राशि 25 हजार थी। साथ ही खाद बनाने के ड्रम और आवश्यक उपकरण भी विभाग की ओर से सब्सिडी दरों पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
अब तक 5 हजार किसानों ने कराया पंजीकरण
सोनीपत में प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। अब तक करीब पांच हजार किसान प्राकृतिक खेती पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि इस अभियान के माध्यम से और अधिक किसान इस दिशा में आगे आएं। पंजीकृत किसानों को कुरुक्षेत्र स्थित प्रशिक्षण केंद्र में विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
वर्जन-
रासायनिक खेती से फसलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है। हर ब्लॉक में दो विशेष किसान गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।-डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत