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पांच दिन तक बंकर में रहने के बाद ट्रेन से व पैदल चलकर पोलैंड बॉर्डर पहुंचे युवा

Sun, 06 Mar 2022 02:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 02:02 AM IST
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After staying in the bunker for five days, the youth reached Poland border by train and on foot.
गांव रुखी की पूजा और उसके परिजनों के साथ सुधीर मलिक। संवाद - फोटो : Sonipat
यूक्रेन से स्वदेश लौटने के लिए भारतीय छात्रों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्हें न केवल यूक्रेन की सेना के गलत व्यवहार का सामना करना पड़ा, बल्कि बंकरों में कई दिन तक रहने के साथ ही खाने-पीने व रुपये तक की किल्लत उठानी पड़ी। यही नहीं उन्हें कई किलोमीटर तक पैदल चलकर पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचना पड़ा। बॉर्डर पर पहुंचे तो भारत सरकार की मदद से सकुशल घर पहुंचे। घर पहुंचने पर परिजनों ने न केवल राहत की सांस ली, बल्कि छात्रों का भव्य स्वागत किया। गोहाना क्षेत्र के ऐसे पांच छात्र हैं, जो सकुशल अपने घर लौटे। इनमें बरोदा रोड निवासी लक्की जुनेजा, गांव मुंडलाना निवासी साहिल, गांव रुखी निवासी पूजा, गांव कथूरा निवासी कुमारी पंकज और गांव आहुलाना निवासी अर्पित शामिल हैं।
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दोस्तों के साथ मिलकर पहुंचे पौलेंड बॉर्डर : लक्की
लक्की जुनेजा यूक्रेन के खारकीव में चौथे वर्ष में एमबीबीएस कर रहे हैं। लक्की ने बताया कि उन्हें 22 फरवरी को फोन पर युद्ध को लेकर मैसेज आने लगे थे। गोलीबारी से लेकर बमबारी तक के सायरन बजने की जानकारी उन्हें दी जाने लगी। इसके बाद जिस दिन युद्ध शुरू हुआ, अचानक उन्हें हॉस्टल से बंकर में छिपना पड़ा। 23 से 28 फरवरी तक बंकर में रहे। खाने-पीने का सामान कम था। 1 मार्च को ट्रेन चलने का पता चला। स्टेशन तक पहुंचने के लिए टैक्सी की जरूरत थी, लेकिन टैक्सी वाले को देने के लिए किराया नहीं था। स्थानीय लोगों की सहायता से स्टेशन तक पहुंचे। ट्रेन का सफर महंगा था, ऐसे में दोस्तों से रुपये एकत्रित कर काम चलाया। ट्रेन में 18 घंटे बाद लीवीव पहुंचे। वहां से टैक्सी लेकर पोलैंड बॉर्डर से दो किलोमीटर पहले तक पहुंचे। इसके बाद पैदल चलकर बॉर्डर पार किया। वहां यूक्रेन की सेना ने भारतीय छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया। बाद में उनसे आग्रह किया तो उन्होंने पासपोर्ट पर मुहर लगाकर बाहर आने दिया। फिर वहां से पोलैंड की सरकार ने उन्हें खाने-पीने का सामान दिया। इसके बाद भारत सरकार की मदद से हवाई यात्रा कर गाजियाबाद पहुंचे और स्थानीय प्रशासन के साथ परिजन उन्हें घर लेकर आए। यहां पिता कृष्ण लाल, मां राजरानी, बहन पूनम समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने लक्की का स्वागत किया। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार के साथ ही स्थानीय प्रशासन का आभार जताया।
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युद्ध न होने की बात कही गई, जिस कारण समय पर नहीं निकल पाए : साहिल
गांव मुंडलाना निवासी साहिल लठवाल ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह यूक्रेन के खारकीव से चले थे। कर्फ्यू व गोलीबारी के बीच पैदल चलकर स्टेशन पर पहुंचे। इसके बाद ट्रेन से लीवीव पहुंचे और वहां से अपने स्तर पर वाहनों में सवार लेकर पोलैंड बॉर्डर पहुंचे। खारकीव में उन्हें रूस की सेना ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। हालांकि बच्चों को वहां भूखा रहना पड़ा। एंबेसी की तरफ से खारकीव में कोई मदद नहीं की गई। हर कोई अपने रिस्क पर वहां से पैदल व बसों में आ रहे हैं। साहिल ने कहा कि विवि प्रशासन की तरफ से उनसे फीस भी मांगी गई। युद्ध न होने की बात कही गई, जिस कारण काफी छात्र समय पर नहीं निकल पाए। बॉर्डर पर भी छात्रों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। अब वह घर पहुंचे। इस पर परिजनों ने राहत की सांस ली।
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यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों का जाना कुशलक्षेम
भाजपा के कथूरा मंडल के अध्यक्ष सुधीर मलिक ने यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों के घर पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना। वह गांव रुखी निवासी पूजा, गांव कथूरा निवासी कुमारी पंकज और गांव आहुलाना निवासी अर्पित से मिलने पहुंचे। सुधीर मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार यूक्रेन में फंसे प्रत्येक विद्यार्थी को वापस लाने का प्रयास कर रही है। इस दौरान देवेंद्र जांगड़ा, सत्यपाल लठवाल, राधेश्याम के साथ जितेंद्र शर्मा, कुलदीप वाल्मीकि, नवीन कुमार, अनूप कुंडू, कृष्ण नरवाल, बिजेंद्र नरवाल आदि मौजूद रहे।

भाई के आने पर मनाएंगे बेटे का जन्मदिन
शहर के आढ़ती बंसीलाल के भाई भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। वह अभी तक घर नहीं लौटे। इस पर बंसीलाल ने अपने बेटे का जन्मदिन अपने भाई के घर लौटने के बाद ही मनाने का निर्णय लिया। बंसीलाल ने कहा कि उसका बेटा नवमान 4 मार्च को 8 वर्ष का हो गया, लेकिन भाई के यूक्रेन में फंसे होने के कारण उन्होंने नवमान का जन्मदिन नहीं मनाया। अब वह भाई के घर आने पर खुशी से केक काटकर नवमान का जन्मदिन मनाएंगे।

अपनी बहन डॉ. शशि के साथ साहिल लठवाल।  संवाद

अपनी बहन डॉ. शशि के साथ साहिल लठवाल। संवाद- फोटो : Sonipat

लक्की जुनेजा के घर पहुंचने पर उसका स्वागत करते परिजन। संवाद

लक्की जुनेजा के घर पहुंचने पर उसका स्वागत करते परिजन। संवाद- फोटो : Sonipat

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