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मुसीबत बना छह साल पुराना बोनस
कैथ्ाल
Updated Thu, 03 Oct 2013 12:45 AM IST
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किसानों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली प्रदेश सरकार के लिए मिलर और
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एफसीआई के बीच का मामला अब गले की फांस बनता जा रहा है। मिलर जहां अपने
भुगतान होने तक मंडियों से खरीद के लिए अड़े हैं, वहीं केंद्र की खरीद
एजेंसी एफसीआई भी अब तक कोई ढील देने के मूड में नजर नहीं आ रही है। इस
कारण मामले का कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है।
बात दिल्ली तक पहुंची
किसानों के विरोध को देखते हुए आननफानन में खरीद एजेंसियों ने मंडियों में बिना मिलर के खरीद तो शुरू कर दी है, लेकिन यदि मामला न सुलझा तो एजेंसियां बिना मिलरों के धान को कहां लेकर जाएंगे? इस प्रश्न का अब तक किसी के पास जवाब नहीं है। यदि अगले कुछेक दिनों तक इसी तरह से किसान आंदोलनरत रहे तो सरकार के प्रति किसानों में रोष बढ़ेगा। चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार न तो किसानों और न ही व्यापारियों को नाराज करने का रिस्क लेना चाह रही है। इस कारण इस मसले को सुलझाने के लिए दिल्ली में बैठे अधिकारियों के संज्ञान में मामले को लाया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि वीरवार को एफसीआई प्रदेश मुख्यालय से कोई न कोई अधिकारी कैथल का दौरा कर सकता है।
यह है मामला
दरअसल एफसीआई की ओर से वर्ष 2007-08 में किसानों को दिए गए 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं की फसल पर दिए गए बोनस के लिए आवश्यक कागजात जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसमें कई मिलरों को नोटिस में एक तय राशि जमा करवाने के साथ-साथ 2007-08 में दिए गए बोनस के कागजात जमा करवाए जाने के लिए कहा गया है। यदि कागजात सही पाए जाते हैं तो जमा करवाई गई राशि मिलरों को वापस दे दी जाएगी, लेकिन मिलरों का कहना है कि इसके लिए वे एक बार कागजात दे चुके हैं तो अब छह साल बाद इस तरह के कागजात की मांग करना गलत है।
यहां अटका है मामला
सीजन में मोटे धान को सरकारी खरीद एजेंसियां मिलर के माध्यम से खरीदती हैं। मंडी से मिलर के प्रतिनिधि के साथ खरीद करते हुए उसे धान दिया जाता है। बाद में मिलर इस धान से चावल निकाल कर सरकार को लेवी चावल जमा करवाते हैं। यही कारण है कि मंडियों से अभी तक धान की सरकारी खरीद नहीं हो रही थी। बेशक एजेंसियों द्वारा खरीद शुरू कर दी गई है, लेकिन यदि मिलरों के साथ समझौता नहीं हुआ तो एजेंसियां इस धान को कहां रखेंगी और इसकी मिलिंग कहां से करवाई जाएगी?
आला अधिकारी पहुंच सकते हैं कैथल
सरकार एवं प्रशासनिक अधिकारी भी अब इस मसले को जल्द सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में न केवल चंडीगढ़ एफसीआई, डीएफएससी सहित सरकार के आला अधिकारियों से बातचीत की जा चुकी है। बल्कि केंद्र में भी एफसीआई के बड़े अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाया गया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि एफसीआई के चंडीगढ़ मुख्यालय से अधिकारी वीरवार को कैथल का दौरा कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई।
बात दिल्ली तक पहुंची
किसानों के विरोध को देखते हुए आननफानन में खरीद एजेंसियों ने मंडियों में बिना मिलर के खरीद तो शुरू कर दी है, लेकिन यदि मामला न सुलझा तो एजेंसियां बिना मिलरों के धान को कहां लेकर जाएंगे? इस प्रश्न का अब तक किसी के पास जवाब नहीं है। यदि अगले कुछेक दिनों तक इसी तरह से किसान आंदोलनरत रहे तो सरकार के प्रति किसानों में रोष बढ़ेगा। चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार न तो किसानों और न ही व्यापारियों को नाराज करने का रिस्क लेना चाह रही है। इस कारण इस मसले को सुलझाने के लिए दिल्ली में बैठे अधिकारियों के संज्ञान में मामले को लाया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि वीरवार को एफसीआई प्रदेश मुख्यालय से कोई न कोई अधिकारी कैथल का दौरा कर सकता है।
यह है मामला
दरअसल एफसीआई की ओर से वर्ष 2007-08 में किसानों को दिए गए 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं की फसल पर दिए गए बोनस के लिए आवश्यक कागजात जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसमें कई मिलरों को नोटिस में एक तय राशि जमा करवाने के साथ-साथ 2007-08 में दिए गए बोनस के कागजात जमा करवाए जाने के लिए कहा गया है। यदि कागजात सही पाए जाते हैं तो जमा करवाई गई राशि मिलरों को वापस दे दी जाएगी, लेकिन मिलरों का कहना है कि इसके लिए वे एक बार कागजात दे चुके हैं तो अब छह साल बाद इस तरह के कागजात की मांग करना गलत है।
यहां अटका है मामला
सीजन में मोटे धान को सरकारी खरीद एजेंसियां मिलर के माध्यम से खरीदती हैं। मंडी से मिलर के प्रतिनिधि के साथ खरीद करते हुए उसे धान दिया जाता है। बाद में मिलर इस धान से चावल निकाल कर सरकार को लेवी चावल जमा करवाते हैं। यही कारण है कि मंडियों से अभी तक धान की सरकारी खरीद नहीं हो रही थी। बेशक एजेंसियों द्वारा खरीद शुरू कर दी गई है, लेकिन यदि मिलरों के साथ समझौता नहीं हुआ तो एजेंसियां इस धान को कहां रखेंगी और इसकी मिलिंग कहां से करवाई जाएगी?
आला अधिकारी पहुंच सकते हैं कैथल
सरकार एवं प्रशासनिक अधिकारी भी अब इस मसले को जल्द सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में न केवल चंडीगढ़ एफसीआई, डीएफएससी सहित सरकार के आला अधिकारियों से बातचीत की जा चुकी है। बल्कि केंद्र में भी एफसीआई के बड़े अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाया गया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि एफसीआई के चंडीगढ़ मुख्यालय से अधिकारी वीरवार को कैथल का दौरा कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई।